उत्तराखंड में बेमौसम बरसात फिर ले आई 'आपदा'
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जून 2013 की तरह मार्च 2015 में हुई बेमौसम बरसात से एक बार फिर उत्तराखंड प्रदेश 'आपदा' का शिकार हुआ है।
इस बार बेमौसम बारिश से फसल की बर्बादी की 'आपदा' की मार पड़ रही है। मार्च-अप्रैल के बीच चार सत्रों में हुई बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी से राज्य में 51 से 69 फीसदी तक गेंहू, दलहन और तिलहन की फसल खराब हुई है। साथ ही सब्जी और फल वृक्षों के फूल गिरने व पराग खराब होने से औद्यानिक फसलों को 56.71 प्रतिशत तक क्षति हुई है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह को पत्र लिखकर जिलों में हुए नुकसान का ब्यौरा बृहस्पतिवार को भेज दिया है। साथ ही केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को भेजे पत्र में अपील की है कि राज्य लगातार प्राकृतिक और दैवी आपदाओं की चपेट रहा है।
इस साल कृषि और बागवानी क्षेत्र में हुए भारी नुकसान से राज्य का सामाजिक-आर्थिक ढांचा और कमजोर हुआ है। लिहाजा केंद्र सरकार उत्तराखंड की भरपूर मदद करे। सीएम ने वित्त मंत्री से अन्य क्षेत्रों में भी राज्य को पूर्व की भांति विशेष राज्य की तर्ज पर 90:10 के अनुपात में मदद का अनुरोध किया है।
गेंहू, जौ, मसूर, सरसों की फसलें नष्ट
वित्त मंत्री को भेजे पत्र में सीएम ने इस बात का उल्लेख किया है कि राज्य ने सहकारी बैंकों से लिए गए किसान लोन को छह महीने स्थगित कर ब्याज की रकम देने का फैसला लिया है।
ऐसे में केंद्र सरकार राज्य के किसानों की ओर से वाणिज्यक बैंकों से लिए फसली कर्ज का अगले छह महीने का ब्याज वहन करे। सीएम ने वित्त मंत्री को बताया है कि वाणिज्यक राष्ट्रीय बैंकों ने लोन और किसान क्रेडिट कार्ड के तौर पर 9500 करोड़ रुपए दिए हैं। दस फीसदी की दर से ब्याज की राशि 950 करोड़ बनती है। इस ब्याज का वहन केंद्र से करने का अनुरोध किया है।
कृषि मंत्री को लिखे पत्र में सीएम ने कहा है कि एक मार्च से अभी तक कई बार भारी बारशि और ओलावृष्टि हुई है। जिससे गेंहू, जौ, मसूर, सरसों आदि फसले नष्ट हुइ है। गेहूं की फसल गिरने से करनाल बंट नामक बीमारी लग गई है।
गेंहू काला पड़ गया है जिससे आने वाले समय में किसान को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। केंद्र सरकार अतिशीघ्र केंद्रीय टीम भेजे साथ ही किसानों को क्षतिपूर्ति के लिए धनराशि उपलब्ध कराए। पत्र में कहा गया है कि राज्य के 90 प्रतिशत किसान जो कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं को नुकसान हुआ है।
किस जिले में कितना नुकसान
नैनीताल- 57, ऊधमसिंह नगर-63, पौड़ी-56, टिहरी- 60, अल्मोड़ा- 51, हरिद्वार- 69, बागेश्वर- 55, रुद्रप्रयाग- 55, पिथौरागढ़- 60, देहरादून-61, उत्तरकाशी-55, चमोली-55, चंपावत-53
(नोट: आंकड़े प्रतिशत में हैं)