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‘पापा’ का नाम सुनते ही सिहर उठती है आंचल
अमर उजाला, रुड़की
Updated Fri, 27 Dec 2013 09:22 PM IST
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नौ साल की मासूम आंचल उर्फ मानसी को सौतेले बाप की ओर से दिए गए जख्मों से उबरने में अरसा लग जाएगा। अब तो उसे ‘पापा’ के नाम से ही नफरत सी हो गई है।
ईंट से मारा फिर कुएं में फेंका
कोई उसे कुएं में फेंकने वाले सौतेले बाप अरविंद का जिक्र करता है तो उसके चेहरे पर तनाव की लकीरें साफ झलकती हैं। आंचल बताती है कि पापा ने पहले उसके सिर में ईंट मारी और फिर कुएं में धक्का दे दिया।
मासूम भाई-बहन के भी अभी तक नहीं मिलने से आहत बच्ची वारदात को याद कर सिहर उठती है।
11 दिसम्बर को हुई थी घटना
11 दिसंबर को सौतेले पिता अरविंद ने आंचल को कुएं में और उसके छोटे भाई बहन को गंगनहर में फेंक दिया था। आंचल को लोगों ने कुएं से निकाल लिया था।
जिंदगी और मौत के बीच चल रही आंचल की इस जंग में निर्णायक भूमिका निभाने वाले हाशिम बृहस्पतिवार देर रात आंचल को जौलीग्रांट अस्पताल से छुट्टी दिलाकर अपने घर ले आए। हाशिम का परिवार अपनों की तरह उसकी सेवा कर रहा है।
अभी नहीं हो पाई स्वस्थ
आंचल अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाई है। ‘अमर उजाला’ ने भी शुक्रवार को हाशिम के आवास पर पहुंचकर बच्ची का हाल जाना। पापा का जिक्र किए जाने पर वह चुप्पी साधकर गुस्से में घूरने लगती है।
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हाशिम और उसकी मां के प्रयासों से सामान्य सी नजर आती आंचल बताती है कि पापा ने सिर पर पहले ईंट मारी और फिर कुएं में धक्का दे दिया। हाशिम ने बताया कि पापा का नाम लिए जाने पर आंचल रूठ जाती है।
हाशिम देंगे परिवार को आसरा
जौलीग्रांट अस्पताल से छुट्टी के बाद बालिका आंचल को वैसे तो पुलिस ने उसकी मां की सुपुर्दगी में दे दिया है, लेकिन हाशिम का परिवार बच्ची के पूरी तरह स्वस्थ होने तक उसे और उसकी मां को आसरा देगा।
आंचल का अभी करीब दो माह तक इलाज चलेगा। हाशिम के मुताबिक ‘अमर उजाला’ के प्रयासों से मिली आर्थिक सहायता को उसके उपचार और भविष्य संवारने पर खर्च किया जाएगा।
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ईंट से मारा फिर कुएं में फेंका
कोई उसे कुएं में फेंकने वाले सौतेले बाप अरविंद का जिक्र करता है तो उसके चेहरे पर तनाव की लकीरें साफ झलकती हैं। आंचल बताती है कि पापा ने पहले उसके सिर में ईंट मारी और फिर कुएं में धक्का दे दिया।
मासूम भाई-बहन के भी अभी तक नहीं मिलने से आहत बच्ची वारदात को याद कर सिहर उठती है।
11 दिसम्बर को हुई थी घटना
11 दिसंबर को सौतेले पिता अरविंद ने आंचल को कुएं में और उसके छोटे भाई बहन को गंगनहर में फेंक दिया था। आंचल को लोगों ने कुएं से निकाल लिया था।
जिंदगी और मौत के बीच चल रही आंचल की इस जंग में निर्णायक भूमिका निभाने वाले हाशिम बृहस्पतिवार देर रात आंचल को जौलीग्रांट अस्पताल से छुट्टी दिलाकर अपने घर ले आए। हाशिम का परिवार अपनों की तरह उसकी सेवा कर रहा है।
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अभी नहीं हो पाई स्वस्थ
आंचल अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाई है। ‘अमर उजाला’ ने भी शुक्रवार को हाशिम के आवास पर पहुंचकर बच्ची का हाल जाना। पापा का जिक्र किए जाने पर वह चुप्पी साधकर गुस्से में घूरने लगती है।
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हाशिम और उसकी मां के प्रयासों से सामान्य सी नजर आती आंचल बताती है कि पापा ने सिर पर पहले ईंट मारी और फिर कुएं में धक्का दे दिया। हाशिम ने बताया कि पापा का नाम लिए जाने पर आंचल रूठ जाती है।
हाशिम देंगे परिवार को आसरा
जौलीग्रांट अस्पताल से छुट्टी के बाद बालिका आंचल को वैसे तो पुलिस ने उसकी मां की सुपुर्दगी में दे दिया है, लेकिन हाशिम का परिवार बच्ची के पूरी तरह स्वस्थ होने तक उसे और उसकी मां को आसरा देगा।
आंचल का अभी करीब दो माह तक इलाज चलेगा। हाशिम के मुताबिक ‘अमर उजाला’ के प्रयासों से मिली आर्थिक सहायता को उसके उपचार और भविष्य संवारने पर खर्च किया जाएगा।