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सोशल साइट्स के सहारे चमक रहा जिस्म फरोशी का धंधा

Sat, 28 Dec 2013 11:34 PM IST
कुणाल दरगन/अमर उजाला, हरिद्वार
कुणाल दरगन/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sat, 28 Dec 2013 11:34 PM IST
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using social sites for prostitution

सोशल नेटवर्किंग साइट, मोबाइल एप्लीकेशन के बूते जिस्म फरोशी का धंधा बखूबी चमक रहा है। ये खुलासा जबरन जिस्म फरोशी के धंधे में धकेली गई बिहार निवासी पीड़िता और कालगर्ल ने ही किया है।

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उनकी माने तो ग्राहक को लुभाने के लिए उन्हें ग्लैमरस बनाया जाता है। उनके फोटोशूट भी कराए जाते हैं।

मोबाइल एप्स से करते हैं धन्धा
ईमेल के जरिए जिस्मफरोशी का नेटवर्क पुरानी बात हो चुकी है। अब नए-नए मोबाइल एप्लीकेशन और सोशल साइट्स का इस्तेमाल इस धंधे को चमकाने में किया जा रहा है। पुलिस की पूछताछ में बिहार की पीड़िता और पेशेवर युवतियों ने इसका सिलसिलेवार खुलासा किया।
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होती है विशेष सजावट
बकौल युवतियां, पहले उन्हें फैशन की चकाचौंध से रूबरू कराया जाता है। मेकअप के बाद ड्रेसिंग सेंस की जानकारी दी जाती है। ग्राहक उनकी ओर आए, इसके लिए कुछ अलग हट कर दिखने वाली ड्रेस खरीदवाई जाती हैं, जूते और सैंडिल भी हाईहिल के पहनाए जाते हैं।
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वे दिखने में सुंदर और माडर्न लगे, इसका पूरा ध्यान रैकेट चलाने वाले रखते हैं। इसके बाद फोटो शूट कराया जाता है। मॉल, किसी हिल स्टेशन, बेहतरीन होटल के कमरे को फोटोशूट के लिए चुना जाता है।

यही नहीं शराब, बीयर और सिगरेट पीने में ट्रेड किया जाता है। ग्राहक के संग बदतमीजी न करने की विशेष हिदायत दी जाती है। रैकेट संचालक राबर्ट ग्राहक की पसंद नापसंद जानने के लिए सोशल साइट्स का इस्तेमाल करता था।

मौजूद लड़कियों के फोटो ग्राहक को भेजे जाते थे। इसके बाद ग्राहक की डिमांड की लड़की उपलब्ध कराई जाती थी।

ऊंचे लोगों से है सम्बन्ध
दून के बाद हरिद्वार को अपना गढ़ बना चुके चर्चित सेक्स रैकेट संचालक स्टेला और उसके पुत्र राबर्ट की सीधी एंट्री सूबे के कई नामचीनों के यहां है। राजनीतिक हस्तियों, उद्योगपतियों और सिस्टम में भी ये गहरी पैठ रखते हैं।

दून पुलिस कई बार मां बेटे की जोड़ी को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन जिस्मफरोशी को कारोबार बना चुकी यह जोड़ी सुधरने का नाम नहीं लेती। चंद दिन जेल में गुजारने के बाद ये फिर अपने धंधे की कमान संभाल लेते है।

एकमुश्त मिलती है रकम
सेक्स रैकेट संचालक राबर्ट कालगर्ल को उसकी खूबसूरती के अनुरूप एकमुश्त रकम देता था। सप्ताह, 15 दिन या महीने के हिसाब से रकम तय होती थी। खाने, पीने, रहने और ग्राहक के पास भेजने की जिम्मेदारी रैकेट संचालक की होती थी।


पुलिस की माने तो रैकेट संचालक के पास दिल्ली, पंजाब, यूपी, हरियाणा, चंडीगढ़ की कालगर्ल आती हैं।

नया साल इनके लिए सीजन
नव वर्ष का मतलब यानी सेक्स रैकेट संचालक राबर्ट का सीजन आना था। 31 दिसंबर की नाइट के मुंहमांगे पैसे देने से शौकीन पीछे नहीं हटते हैं। ये बात जब कालगर्ल ने पुलिस को बताई तो पुलिस भी चौंक गई, कि जिस्मफरोशी का भी सीजन होता है।

कालगर्ल ने पुलिस को बताया कि 31 दिसंबर की पार्टी के लिए ग्राहक विशेष तौर पर बुलाते हैं। इस दिन डबल रेट वसूले जाते हैं।

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