डॉक्टर के सुसाइड पर सवाल, कूदे या किसी ने धकेला?
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हल्द्वानी में मेडिकल कॉलेज के आवासीय परिसर की चौथी मंजिल से डॉक्टर के सिर के बल गिरने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। डॉक्टर करीब 35 फीट ऊंचाई से खुद कूदे या उसे धकेला गया? इसके साथ-साथ अन्य सवालों पर पुलिस उलझ गई है। एसपी सिटी यशवंत सिंह चौहान के मुताबिक मामले की गहराई से जांच करेंगे।
चौथी मंजिल पर करीब पांच फीट ऊंची दीवार है। इसे पार कर ही डॉक्टर नवीन नीचे गिरे थे। बिल्डिंग से सटकर ही केबल जा रही है। नीचे गिरते वक्त यदि शरीर केबल से लपटता तो डॉक्टर के शरीर की दिशा मुड़ सकती थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर की हड्डियां टूटने की बात सामने आई है।
रात के सन्नाटे में चौथी मंजिल से डॉक्टर के गिरने पर आवाज हुई होगी, लेकिन किसी भी पड़ोसी की इसकी भनक तक नहीं लगी। डॉक्टर पहली मंजिल में रहते थे। वह चौथी मंजिल में कब चढ़े, इसकी जानकारी भी पड़ोसियों को नहीं है। पड़ोसियों का कहना है कि शुक्रवार को डॉक्टर ने अपनी कार से कैंपस में कई चक्कर लगाए थे। इससे प्रतीत होता है कि डॉक्टर मानसिक रूप से परेशान तो थे। ये पहेली भी सुलझानी है।
सुसाइड नोट में दिल्ली के राज्यपाल समेत कईयों के नाम
चौकी प्रभारी को संबोधित नोट में दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग, जामिया मिलिया की डीन डॉ. रागिनी, सुशीला तिवारी अस्पताल के प्राचार्य डॉ. आरसी पुरोहित के साथ ही विभाग के कई डॉक्टरों के आरोप लगाए हैं। जिनमें लिखा है कि इन लोगों ने उसकी पेन ड्राइव, पत्नी का सर्टिफिकेट गायब करने के अलावा अकाउंट हैक कराया है। डाक्टर ने सुसाइड नोट में अपने को अंडरवर्ल्ड से भी खतरा बताया है।
पोस्टमार्टम में मौत के कारण का खुलासा
दिमाग और छाती में खून भरने के साथ ही अत्यधिक रक्तस्राव से मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवीन गुप्ता की मौत हुई। ऊंचाई से गिरने से सिर की हड्डियां और कई पसलियां टूटी थीं। कूल्हे की हड्डी और बाएं पैर में भी फ्रैक्चर था।
यह खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ है। अलबत्ता रिपोर्ट में किसी भी तरह का जहर या अल्कोहल लेने की पुष्टि नहीं हुई है। शनिवार देर शाम डॉ. प्रदीप पांडे, डॉ. राहुल लसपाल और डॉ. चरक संगवान ने डॉ. गुप्ता के शव का पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. गुप्ता ने रात में खाना और फल खाए थे।
हाथ में लिखा था ‘आई लव यू’
डॉक्टर के एक हाथ में नीली स्याही लगी थी। एसपी सिटी यशवंत सिंह चौहान ने हाथ चेक किया तो उसमें ‘आई लव यू’ लिखा था। इसके आगे नाम लिखकर मिटाया था। ये किसके लिए लिखा था?
आधी रात क्या करने गए थे छत पर
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. गुप्ता की मौत रात करीब दो से चार बजे के बीच हुई है। डॉ. गुप्ता चौथी मंजिल की छत पर क्या करने गए थे? मामला उलझ गया है।
डॉ. गुप्ता की पॉकेट से फोन बरामद हुआ, जिससे स्पष्ट है कि हादसे के वक्त वो किसी से फोन पर बात नहीं कर रहे थे। ऊंचाई से गिरने से उनकी जेब में फोन टूट गया। पुलिस अभी अंदाजा नहीं लगा पा रही है उन्होंने आखिरी फोन किसे किया। हालांकि रविवार को काल डिटेल मिलने पर मामला काफी हद तक सुलझ जाएगा।
11 अगस्त को ज्वाइन किया था एसटीएच
डॉ. नवीन गुप्ता ने 11 अगस्त 2014 को मेडिकल कॉलेज के फार्मोकोलाजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर ज्वाइन किया था। डॉ. गुप्ता ने 27 मार्च 2014 को जामिया मिलिया इस्लामिया डेंटल कॉलेज से त्यागपत्र दिया था। डॉ. गुप्ता जामिया मिलिया इस्लामिया डेंटल कॉलेज में चार वर्षों तक फार्मोकोलाजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर रहे।
उन्होंने नौकरी के दौरान कई बार वहां से इस्तीफा भी दिया था। डॉ. गुप्ता के पिता रमेश गुप्ता ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुरोध कर इस्तीफा वापस कराया था। डॉ. गुप्ता चंडीगढ़ के एक मेडिकल कॉलेज में भी तीन माह तक रहे। 27 मार्च 2014 को जामिया मिलिया इस्लामिया डेंटल कॉलेज छोड़ दिया था।
उन्होंने 11 अगस्त 2014 को मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर ज्वाइन किया। लगभग पांच माह के कार्यकाल के दौरान पत्नी के इलाज के लिए लगभग दो माह तक अवकाश पर रहे।
कर्मचारी ब्लॉक में रहते थे डॉ. गुप्ता
सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवीन गुप्ता को डॉक्टर्स आवासीय परिसर में आवास नहीं मिला था। वह कर्मचारी आवास डी ब्लॉक के टाइप थ्री के संख्या चार में परिवार के साथ रहते थे।
मेडिकल कॉलेज परिसर में इस बात की चर्चा थी कि जब डॉ. गुप्ता आए थे तो डॉक्टर्स आवासीय परिसर में कोई आवास खाली नहीं था, लेकिन कई माह बीतने के बाद भी कॉलेज प्रशासन द्वारा डॉ. गुप्ता को डॉक्टर्स आवासीय परिसर में आवास उपलब्ध नहीं कराया गया। उनके डिप्रेशन का एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है।
आखिरकार इतने दिनों तक डॉ. गुप्ता को कर्मचारी आवासीय परिसर में रहने को क्यों मजबूर होना पड़ा, इसकी भी जांच होनी चाहिए।