बच्चों के झगड़े में सपा नेता ने की आतिशबाज की हत्या
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोहल्ले में खेल रहे बच्चों के झगड़े में सपा नेता और उसके सट्टा किंग भाई ने आतिशबाज की गोली मारकर हत्या कर दी। छर्रे लगने से उसकी पत्नी भी घायल हो गई। मृतक शादियों में आतिशबाजी का काम करता था।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना उत्तराखंड के नैनीताल के थाना रामनगर के बंबाघेर मोहल्ले की है।
शनिवार देर रात समाजवादी पार्टी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष शकील और उसका भाई सट्टा किंग वसीम पुत्र रईस अहमद निवासी बंबाघेर ने दंबगई दिखाते हुए मोहल्ले में खेल रहे कुछ बच्चों की पिटाई कर दी।
बच्चों को पिटता देख एक बच्चे बिलाल (14) के पिता मोहम्मद असलम (45) बीचबचाव करने पहुंचे। उनके पीछे उनकी पत्नी नसीमा भी पहुंच गई।
बच्चों को पीटने से रोका तो मार दी गोली
असलम ने जब शकील और वसीम को टोका तो दोनों ने तमंचे से दो गोलियां असलम पर चला दीं। असलम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया और नसीमा छर्रे लगने से घायल हो गई।
गोलियों की आवाज सुनते ही मोहल्ले में दहशत फैल गई। घटना के बाद दोनों वहां से फरार हो गए। सूचना पर तुरंत एसपी सिटी पंकज भट्ट रामनगर पहुंचे।
आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने शनिवार देर रात दबिश देकर वसीम को बिजरानी रेंज की थपली बाबा मजार के पास गिरफ्तार कर लिया, जबकि शकील को रविवार को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त तमंचे भी बरामद कर लिए गए हैं। आरोपियों के खिलाफ 302, 307, 352, 506 और 25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
दोनों भाइयों पर दर्ज हैं 37 मुकदमे
वसीम और शकील पर 37 मुकदमे दर्ज हैं। वसीम के खिलाफ 20 मुकदमे तो शकील पर 17 मुकदमे दर्ज हैं। एसएसआई मोहन चंद्र पांडे ने बताया कि दोनों भाई हिस्ट्रीशीटर भी हैं।
पत्नी और पुत्र ने की सुरक्षा की मांग
मृतक की पत्नी नसीमा और पुत्र बिलाल ने जान को खतरा बताते हुए पुलिस से सुरक्षा मांगी है। कहा कि हत्या में शामिल लोग अपराधी हैं।
मोहल्ले का चेहेता था असलम
मोहम्मद असलम शादी बारातों में आतिशबाजी के साथ सजावट का काम भी करता था। दशहरे में रावण का पुतला बनाने के साथ ही लोगों को नि:शुल्क कई बीमारियों की दवा भी दिया करते थे। अपने सरल स्वभाव की वजह से वह मोहल्ले वालों के साथ ही शहर के कोने-कोने तक लोगों के जहन में बसे थे, जिसने भी सुना उसकी आंखें नम हो गईं।