फर्जी IAS महिला को 43 दिन बाद मिली जमानत
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मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में फर्जी आईएएस बनकर रहने की आरोपी रूबी चौधरी को 43 दिन बाद शनिवार को जमानत दे दी गई। रूबी रविवार सुबह छह बजे जेल से रिहा हो गई। जहां से वह अपने पति के साथ मेरठ के लिए रवाना हो गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामदत्त पालीवाल की अदालत ने रूबी की जमानत याचिका मंजूर कर ली।
अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस के बाद बचाव पक्ष के तर्कों पर सहमति जताते हुए रूबी को 30 हजार की जमानत राशि पर रिहाई के आदेश दे दिए।
एलबीएस अकादमी के प्रशासनिक अधिकारी सत्यवीर सिंह ने 31 मार्च 2015 को गांव कुटबी पोस्ट कुटबा जिला मुजफ्फरनगर निवासी रूबी चौधरी के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाने, फर्जी दस्तावेजों को फर्जी जानते हुए भी उसे असल के रूप में इस्तेमाल करने सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
मसूरी थाना पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद बीती तीन अप्रैल को पुलिस ने आरोपी रूबी चौधरी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से ही रूबी जेल में थी।
पुलिस नहीं पेश कर पाई जाली पहचान पत्र
पूर्व में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद बचाव पक्ष की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत के लिए याचिका दाखिल की गई थी।
शनिवार को हुई बहस के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि पुलिस ने एटीआई (प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान) नैनीताल द्वारा जारी पहचान पत्र को रूबी के पास होना बताते हुए इसे कब्जे में लेना बताया है। वह पहचान पत्र न तो वादी द्वारा विवेचना में दिया गया न ही विवेचना में प्राप्त किया गया।
इससे स्पष्ट है कि इस तरह का कोई पहचान पत्र है ही नहीं। बचाव पक्ष के वकील विवेक गुप्ता व राजीव रतूड़ी ने कहा कि पुलिस जो पहचान पत्र की बात कर रही है उसे वह अदालत में पेश नहीं कर पाई और जो पहचान पत्र पुलिस दिखा रही है वह कोई दूसरा पहचान पत्र है।
लेकिन जेल से बाहर नहीं आ पाई रूबी
रूबी के वकील राजीव
रतूड़ी ने बताया कि जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत याचिका मंजूर होने के
बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने रिलीज ऑर्डर जारी किए थे। जेल में ऑर्डर
देरी से पहुंचने से रूबी शनिवार को जेल से बाहर नहीं आ पाई। अब रविवार को
वह जेल से बाहर आएगी।
यह बने रूबी की जमानत के आधार
बचाव पक्ष ने कहा कि रूबी चौधरी के पास से एलबीएस अकादमी में कोई फर्जी दस्तावेज, जिसमें उसके खुद के हस्ताक्षर हैं, नहीं मिला। रूबी ने अकादमी में रहकर किसी को वित्तीय क्षति नहीं पहुंचाई, वह जहां रहती थी, अनुमति से रह रही थी।
उसने आईएएस प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण के दौरान एक भी दिन प्रशिक्षण नहीं लिया। यदि वह अवैध तरीके से छह महीने से रह रही थी तो अकादमी ने उसके खिलाफ कार्रवाई इस अवधि में क्यों नहीं की? बचाव पक्ष ने कहा कि वह गार्ड देव सिंह के यहां रह रही थी, इसके लिए उसे किसी पहचान पत्र की आवश्यकता नहीं थी।
जाएगी ससुराल, पति ने ली जमानत
रूबी के वकील राजीव ने कहा कि रूबी को उसकी जमानत याचिका मंजूर होने की जानकारी मिल चुकी है। वह जेल में रूबी से मिले थे। रूबी जेल से छूटने के बाद ससुराल जाएगी। उसके जमानती के तौर पर रूबी के पति और एक अन्य ने जमानत ली।
फर्जीवाड़े का ठोस सबूत नहीं जुटा सकी पुलिस
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि पुलिस ने रूबी चौधरी के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट में कहा था कि उसके पास एटीआई नैनीताल द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, एमए द्वितीय वर्ष की अंक तालिका, पति का आधार कार्ड, पति का निर्वाचन आयोग का पहचान पत्र बरामद किया है, लेकिन इससे रूबी का अपराध साबित नहीं होता है।
कहा कि एलबीएस के कर्मचारी (गार्ड) देव सिंह के घर में रहने के लिए एटीआई के पहचान पत्र की जरूरत नहीं होती है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि पुलिस एटीआई का पहचान पत्र भी नहीं दिखा पाई।