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कत्ल की बड़ी साजिश में उलझी कई जिलों की पुलिस

Thu, 03 Dec 2015 12:09 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 03 Dec 2015 12:09 PM IST
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police confuse on murder and kidnapping case.

देहरादून में प्रेमनगर का राजेंद्र जोशी परिवार बड़ी साजिश का शिकार हुआ है। बदमाशों ने अपराध को अंजाम देने के लिए खूब दिमाग चलाया है, जिसमें उत्तराखंड के देहरादून और ऊधमसिंह नगर की पुलिस के साथ यूपी की रामपुर की पुलिस उलझ गई है।

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कई दिनों से यह मामला सीमा विवाद में उलझा होने के कारण अपराधियों को अपनी साजिश को अंजाम देने का मौका मिल गया। वारदात का मोटिव क्या हो सकता है, अब इस पर माथापच्ची शुरू हुई है। श्यामपुर के राजेंद्र जोशी परिवार की खुली तौर पर तो किसी तरह की रंजिश नहीं है और न ही दूसरे तरह का कोई विवाद।
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मगर ऐसा कुछ ना कुछ जरूर है, जिसकी वजह से साजिश अंजाम दी गई है। ले-देकर एक विवाद सामने आया है, जो राजेंद्र जोशी की बीवी से जुड़ा है। लेकिन यह भी मामला करीब आठ साल पुराना है। जिसे जोशी परिवार भूल गया है। रविवार को इस परिवार की कार यूपी के रामपुर जिले के विलासपुर में मिलने की खबर आई तो उसे तवज्जो नहीं दी गई।
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यूपी पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया तो प्रेमनगर पुलिस ने राजेंद्र के भाई दीपक जोशी की तरफ से जीरो अपराध संख्या पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना रामपुर पुलिस को स्थानांतरित कर दी। विवेचना अब तक यूपी नहीं पहुंची और बुधवार को भास्कर का शव मिलने से मामला और गरमा गया है।

बदमाश जो कोई भी है, वह पुलिस के सीमा झमेले से पूरी तरह से वाकिफ है। पूरे मामले को इस तरह अंजाम दिया गया ताकि पुलिस उलझ जाए। कार को यूपी के विलासपुर इलाके में लावारिस छोड़ा गया, जिसमें कैश के अलावा तमाम सामान सुरक्षित मिला।

दो जिलों की पुलिस कुछ तय नहीं कर पाई कि बालक भास्कर का शव मिलने के बाद ऊधमसिंह नगर पुलिस भी उससे जुड़ गई है। भास्कर के चाचा और फौजी दीपक जोशी का कहना है कि उन्हें तो पहले से अनहोनी की आशंका थी, लेकिन पुलिस ने मामले में गंभीरता नहीं दिखाई। दीपक की माने तो भास्कर केशव पर गोली के निशान हैं। भास्कर के बाद पिता और दादी के जीवित होने की उम्मीद ना के बराबर जताई जा रही है।


चालक बनकर कौन गया ?
राजेंद्र जोशी के पास कार तो थी, लेकिन वह उसे चलाना नहीं जानते थे। रुद्रपुर जाने के लिए राजेंद्र की कार चलाकर कौन ले गया? अभी यह साफ नहीं हो सका है।

एक परिवार के तीन सदस्यों के नाम तो जाहिर हैं, लेकिन चालक कौन है अभी पता नहीं चल सका है। पुलिस के पास अभी तक किसी ने गुमशुदगी भी नहीं दर्ज कराई है। राजेंद्र का फोन तो प्रेमनगर से निकलते ही ऑफ हो गया था, जबकि उनकी मां के मोबाइल में कनखल में आखिरी मेसेज डिलीवर हुआ है।

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