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एक साल बाद भी नहीं सुलझी अंकित हत्याकांड की गुत्थी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 10 Sep 2015 01:10 PM IST
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देहरादून में नकरौंदा के विवेक विहार में डकैती के दौरान सेवानिवृत्त सहायक कृषि अधिकारी के बेटे अंकित थपलियाल की हत्या को गुरुवार को एक साल पूरा हो गया।
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छह आरोपियों में पांच तो जेल में हैं, लेकिन फरार छठा आरोपी अकरम पुलिस के लिए पहेली बन गया है। अंकित के परिजन पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट तो हैं, लेकिन अकरम की गिरफ्तारी न होने का मलाल जरूर है।
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10 सितंबर, 2014 की अल सुबह सेवानिवृत्त सहायक कृषि अधिकारी सुरेंद्र थपलियाल के परिवार पर कहर बनकर टूटी थी। इकलौते बेटे अंकित थपिलयाल की हत्या और सुरेंद्र सिंह, उनकी पत्नी अंजनी, सास बिदेश्वरी और किराएदार सिपाही रघुबीर की पत्नी समेत चार लोगों को लहूलुहान करने की घटना के बाद इलाके के लोगों का सब्र का बांध टूट गया था।
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कई दिन जाम और प्रदर्शन के बीच पुलिस और सरकार की खूब फजीहत हुई थी। मुख्यमंत्री हरीश रावत को आगे आकर कमान संभालनी पड़ी थी। घटना के 18 दिन बाद 28 सितंबर को यूपी की बिजनौर पुलिस ने लूट के मामले में शहजाद को पकड़ा तो इस हत्याकांड का खुलासा हो सका था।
इसके बाद पुलिस ने नदीम, साजिद, अखलाक, साजिद मोटा को गिरफ्तार किया, लेकिन अकरम हाथ नहीं आ सका। अकरम पर 5 हजार रुपए का इनाम घोषित है, जबकि 20 हजार रुपए का प्रस्ताव विचाराधीन है।
अंकित के पिता सुरेंद्र थपलियाल का कहना है कि वह पुलिस की अब तक की कार्रवाई से संतुष्ट हैं, लेकिन के अकरम न पकड़े जाने का मलाल है। इतना समय बीतने के बाद भी वह कानून के शिकंजे में नहीं सका है।
श्रद्धांजलि देकर करेंगे गिरफ्तारी की मांग
बालावाला की विवेक विहार कॉलोनी में संघर्ष समिति की अगुवाई में लोग अंकित थपलियाल को श्रद्धांजलि देकर अकरम की गिरफ्तारी की मांग करेंगे। संघर्ष समिति के अध्यक्ष मान सिंह रावत ने बताया कि कॉलोनी के बाहर मैदान में इलाके के लोग बुधवार सुबह एकत्र होंगे।
सुबह करीब साढ़े दस बजे के करीब पैदल मार्च करते हुए अंकित थपलियाल के आवास पर पहुंचेंगे। यहां पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा जाएगा। इसके बाद लोग वापस मैदान में जाकर पुलिस-प्रशासन को ज्ञापन देकर आरोपी अकरम की अविलंब गिरफ्तारी की मांग करेंगे। रावत का कहना है कि एक साल का समय कम नहीं होता है, लेकिन अकरम का पता लगाने में पुलिस नाकाम रही है।
खुद को बचाने के लिए झूठ भी बोल सकते हैं बदमाश
एक साल पहले हुए देहरादून के चर्चित अंकित थपलियाल हत्याकांड का खुलासा हो चुका है। अब तक पकड़े गए बदमाशों के इकबाल-ए-जुर्म से यही साफ हुआ है कि फरार अकरम निवासी बुटा (शामली) ने अंकित की हत्या की थी, लेकिन परिजनों को आशंका है कि बदमाश खुद को बचाने के लिए झूठ भी बोल सकते हैं।
अकरम के हाथ आने पर ही यह साफ हो सकता है कि असली हत्यारा कौन है। पिता कहते हैं कि वैसे तो उनकी नजर में सब कातिल हैं, लेकिन अपनी तसल्ली के लिए चाहते हैं कि पता चले बेटे को गोली दागने वाला कौन था।
सहायक कृषि अधिकारी पद से एक सप्ताह पहले सेवानिवृत्त हुए सुरेंद्र थपलियाल की आंखों में बदमाशों के कहर के मंजर को याद कर बुधवार को पानी भर आया। घटना वाली सुबह रोजमर्रा की तरह वह मार्निंग वॉक के लिए बाहर जाने की तैयारी में थे। इसी बीच जाली काटकर बदमाश अंदर दाखिल हो गए।
एक बदमाश को देखकर उन्होंने शोर मचाया तो दूसरे बदमाशों ने सिर पर ताबड़तोड़ प्रहार कर दिए। बचाव में आई पत्नी पर इसी तरह हमला किया। चीख सुनकर पहली मंजिल से आए बेटे अंकित ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान हुई हाथापाई के बाद चार बदमाशों ने अंकित को घेर लिया था।
बाद में बाथरूम में ले जाकर गोली मार दी गई। इसलिए देख नहीं पाए कि गोली किस बदमाश ने मारी थी। बदमाशों के चेहरे वह अंतिम सांस तक नहीं भूल पाएंगे। अब तक पकड़े गए पांचों बदमाशों ने यही कहा है कि अकरम ने ही विरोध करने पर अंकित को गोली मारी थी।
पुलिस लिखापढ़ी में भी यही तथ्य आया है। इस बात को लेकर थपलियाल परिवार को संदेह है। खुद सुरेंद्र और उनकी पत्नी अंजनी सवाल करती हैं कि हो सकता है कि बदमाश खुद को बचाने के लिए दोषारोपण कर रहे हों। अकरम के हाथ आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि गोली किसने चलाई थी।
सुरक्षा के साए में परिवार
थपलियाल परिवार एक साल से सुरक्षा के साए में है। गृह स्वामी सुरेंद्र को गनर उपलब्ध कराने के साथ उनके आवास पर पीएसी के जवानों की ड्यूटी लगाई गई है, जो रात भर पहरा देते हैं।
अमर उजाला का जताया आभार
थपलियाल परिवार ने अमर उजाला का आभार जताया है। सेवानिवृत्त सहायक कृषि अधिकारी सुरेंद्र थपलियाल और बेटी किरण बिष्ट ने कहा कि घटना के बाद से शुरू हुए संघर्ष में अमर उजाला का पूरा साथ मिला है। इस लड़ाई को निर्णायक दौर तक ले जाने के लिए इस तरह के सहयोग की उम्मीद भी जताई है।
बेटियों ने बेटा बनकर दिया सहारा
इकलौते भाई अंकित थपलियाल की हत्या के बाद बेटियों ने बेटा बनकर मां और पिता को संभाला है। एक साल में बेटियों ने उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा। चारों बहने आकर उनका दर्द बांटती रहीं। बड़ी बहन किरण बिष्ट की मानें तो भाई तो वापस नहीं आ सकता, लेकिन अभिभावकों को संभालने के साथ दोषियों को सजा दिलाने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।
अंकित थपलियाल चार विवाहित बहनों किरण बिष्ट, संध्या, पूजा और अनीता से छोटा होने के साथ सबका लाडला था। अंकित की हत्या से माता-पिता के साथ बहनों को भी झटका लगा। बहनों ने अपने दर्द को छिपाकर अंकित की हत्या से टूट चुके मां और पिता को सहारा दिया।
अकेलापन महसूस न हो, इस लिहाज से उन्हें कभी अकेला छोड़ने की भूल नहीं की। बेटे के तरह ही बेटियों ने जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाह किया। गृहस्थ जीवन में समन्वय बनाकर बेटियां बारी-बारी यहां आती-जाती रहीं। यही नही दामादों ने भी दुख की इस घड़ी में पूरा साथ दिया। इन दिनों दिल्ली में रहने वाली बेटी किरण बिष्ट अपने बच्चों के साथ घर पर है।
बातचीत में भाई को याद कर बहन की आंखों में आंसु आ जाते हैं। रुंधे गले से बहन बुदबुदाती है कि बदमाशों ने जो जख्म उनके परिवार को दिया है, वह ताउम्र भरने वाला नहीं है। भाई की मौत पूरे परिवार में कहर बनकर टूटी है। अब तो बस वह यही चाहते हैं कि कातिलों को जल्द से जल्द सजा मिले। मौसी सलोचना कहती हैं कि बेटियां बेटे का धर्म निभाने के साथ कानूनी लड़ाई में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
हत्यारों को फांसी पर देखना चाहती है मां
लाडले अंकित को याद कर मां अंजनी थपलियाल बिलख उठीं। रोते हुए बोलीं, अब तो यही इच्छा है कि हत्यारों को फांसी हो जाए, तभी उनके बेटे की आत्मा को शांति मिल पाएगी। अंकित का कसूर सिर्फ इतना था कि वह पिटाई का विरोध कर रहा था। बदमाशों ने घेरकर उनके बेटे को मारा था। बेटे को इंसाफ दिलाकर ही वह दम लेंगे।