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उत्तराखंड: गिरफ्तार हुए दो माओवादियों के बारे में खुला ऐसा राज, जानकर सकते में आया पुलिस विभाग

Tue, 05 Jun 2018 12:14 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, रुद्रपुर
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, रुद्रपुर Updated Tue, 05 Jun 2018 12:14 AM IST
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Maoist attack information revealing after arresting in uttarakhand
Maoist Arrested

उत्तराखंड में गिरफ्तार हुए माओवादियों के बारे में पुलिस को कुछ ऐसी राज की बातें पता लगी हैं जिसके बाद अब महकमा और भी अलर्ट हो गया है।

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पुलिस गिरफ्त में आए रमेश और मनोज कुमार माओवादी हमलों में भी शामिल रहे हैं। करीब 13 वर्ष पहले थाना मधुबनी जिला मोतीहारी (बिहार) में ऑपरेशन धमाका के तहत हुए नक्सली हमलों में एक हमलावर टुकड़ी की अगुवाई मनीष ने ही की थी।
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वहीं, मनोज की भी हमलों में भागीदारी थी। इस टुकड़ी ने मधुबनी में सांसद के घर पर हमले किए थे। इस संबंध में मधुबनी में दर्ज मुकदमे में भी मनीष वांछित है। पुलिस अब दोनों माओवादियों की गिरफ्तारी की सूचना मोतीहारी पुलिस को देगी।

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बिहार में माओवादी हमलों में भी था शामिल

Maoist attack information revealing after arresting in uttarakhand

वर्ष 2005 में थाना मधुबनी पूर्वी चंपारण में 300 माओवादियों ने ऑपरेशन धमाका के तहत सांसद आवास, ब्लॉक, पुलिस थाना सहित नौ जगहों पर एक साथ हमले किए थे। हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।

एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि ऑपरेशन धमाका में नौ जगहों पर हमलों के लिए माओवादियों को टुकड़ियों में बांटा गया था। मधुबनी में सांसद के आवास पर हमला करने वाली टुकड़ी में रमेश की भूमिका में अहम थी।

पूछताछ में सामने आया है कि हमले में उत्तराखंड से भी आठ माओवादी गए थे, जिनमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं। ये महिलाएं कौन थीं, इस बारे में भी तफ्तीश की जा रही है।एसएसपी ने बताया कि ये लोग हमला होने के बाद वहां से निकलकर उत्तराखंड पहुंचे थे और भूमिगत होकर माओवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार में जुट गए थे। उन हमलों को लेकर दर्ज एफआईआर में भी रमेश वांछित है। इधर, रमेश ने भी बिहार में हुए हमले में शामिल होने की बात कबूली है।
 

रमेश का बड़ा भाई गोपाल भी रहा है माओवादी गतिविधियों में लिप्त

Maoist attack information revealing after arresting in uttarakhand

वर्षों पहले तोड़ लिया था माओवादी संगठन से नाता
गिरफ्त में आए रमेश उर्फ मनीष मास्टर और मनोज कुमार उर्फ अरविंद ने पूछताछ के दौरान बताया कि वे भाकपा माओवादी संगठन के सक्रिय सदस्य थे, लेकिन वर्षों पहले उन्होंने संगठन से नाता तोड़ लिया था। रमेश ने कहा कि वह जोनल कमेटी का सक्रिय सदस्य था और वर्ष 2006 में उसने संगठन छोड़ दिया था। इसी तरह मनोज ने बताया कि वर्ष 2005 में वह जोनल कमेटी का सदस्य था, लेकिन वर्ष 2010 में भाकपा माओवादी से अलग हो गया था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि दोनों माओवादी विचारधारा को फैलाने का काम कर रहे थे।

रमेश का बड़ा भाई गोपाल भी रहा है माओवादी गतिविधियों में लिप्त
हल्दूचौड़ निवासी माओवादी रमेश भट्ट के बड़े भाई गोपाल भट्ट को 29 फरवरी 2008 में माओवादी गतिविधियों में लिप्त होने की वजह पुलिस ने गिरफ्तार किया था। करीब डेढ़ वर्ष जेल में रहने के बाद कोर्ट से गोपाल को जमानत मिल गई थी। पुलिस ने माओवादी घटनाओं को लेकर गोपाल पर चार मुकदमे दर्ज किए थे। रमेश शादीशुदा होने के साथ ही एक बच्चे का पिता भी है। उसकी गिरफ्तारी से परिजन सन्न हैं। हालांकि, रमेश ने वर्ष 2006 में ही भाकपा माओवादी संगठन को छोड़ने की बात कही है।

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