देहरादून: अस्पताल की आड़ में किडनी का धंधा करने वाले चिकित्सक दंपत्ति गिरफ्तार, खोले कई राज
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देहरादून पुलिस ने गंगोत्री चेरिटेबल अस्पताल की आड़ में किडनी की खरीद-फरोख्त के धंधे में फरार चल रहे चिकित्सक दंपति को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया। दोनों विवाह समारोह में भाग लेने के बाद अपने बच्चों से मिलने आए थे।
बिहार के इस दंपति ने नेपाल से एमडी की डिग्री ली थी। वहीं, इस मामले में सरगना डॉ.अमित का बेटा अक्षय राउत अभी भी फरार है। देहरादून और हरिद्वार पुलिस ने बीती 10 सितंबर की रात लालतप्पड़ स्थित गंगोत्री चेरिटेबल अस्पताल की आड़ में किडनी निकालने और ट्रांसप्लांट करने के खेल का भंडाफोड़ किया था।
मौके पर तीन लोग मिले थे, जिनमें से एक की किडनी निकाली जा चुकी थी। इस मामले में पुलिस ने किडनी रैकेट के सरगना डॉ.अमित समेत 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन गिरोह में शामिल बिहार के अरड़िया जनपद निवासी डॉ.संजय दास और उसकी पत्नी डॉ.सुषमा दास फरार चल रहे थे।
आठ ऑपरेशन में रहे शामिल
इन दोनों के नेपाल में छिपने की खबर थी। पुलिस उनकी तलाश में नेपाल बार्डर और बिहार तक गई थी। एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि एएसपी लोकेश्वर सिंह की अगुवाई में टीम ने इनामी डॉ.संजय और उसकी पत्नी डॉ.सुषमा को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है।
गाजियाबाद में उनके बच्चे पढ़ते हैं। दोनों आरोपी गंगोत्री चेरिटेबल अस्पताल में ऑपरेशन के समय मरीजो को बेहोश करने का काम करते थे और घटना का खुलासा होने के बाद फरार हो गए थे। सरगना डॉ.अमित के बेटे अक्षय राउत की तलाश में पुलिस की दबिश अभी भी जारी है।
आठ ऑपरेशन में रहे शामिल
पुलिस की गिरफ्त में आए डॉ.संजय ने बताया कि किडनी की खरीद-फरोख्त के सरगना डॉ.अमित से उसकी मुलाकात बीती मार्च में हुई थी। उसके बुलावे पर वो पत्नी डॉ.सुषमा के साथ दो बार ही गंगोत्री चेरिटेबल अस्पताल आया था। उसने बताया कि इस दौरान पति-पत्नी ने आठ ऑपरेशन में हिस्सा लिया था।