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अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटा कारोबारी, साजिश में महिला मित्र भी

Sun, 21 Feb 2016 03:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 21 Feb 2016 03:02 AM IST
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kidnapped businessman get free.

देहरादून के डूंगा फार्म हाउस से अगवा मेरठ के कारोबारी मनोज गुप्ता शनिवार शाम अपहरणकर्ताओं के चंगुल से सकुशल छूट गए। पुलिस का दावा है कि दबाव के चलते अपहरणकर्ताओं ने उन्हें छोड़ा है। लेकिन चर्चाएं यह हैं कि मोटी रकम अदा करने के बाद उनकी रिहाई हुई है। बताया जा रहा है कि अपहरणकर्ताओं ने एक करोड़ की डिमांड की थी।

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पुलिस का दावा है कि महिला जनप्रतिनिधि के पति ने गुप्ता को अगवा कराया था। अपहरण में शामिल बदमाशों की तलाश में मेरठ और मुजफ्फरनगर में हुई छापेमारी में मोबाइल कंपनी के प्रतिनिधि समेत तीन लोग पकड़े गए हैं। पुलिस का दावा है कि अपहरण की साजिश में मनोज की महिला मित्र भी शामिल रही है।
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प्रेमनगर के डूंगा स्थित फार्म हाउस से मेरठ के कारोबारी मनोज गुप्ता अपनी महिला मित्र के साथ 18 फरवरी की रात गायब हो गए थे। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद शुक्रवार देर रात मनोज गुप्ता के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर मेरठ और मुजफ्फरनगर में जांच शुरू की थी। अपहरण की साजिश मेरठ के शातिर अपराधी ने रची थी, जो काफी समय से सियासी लबादा ओढ़ने की तैयारी में है।
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अपहरणकर्ता मेरठ से गुप्ता का पीछा करते हुए फार्म हाउस पहुंचे थे। शुक्रवार से एसपी सिटी अजय सिंह की अगुवाई में वेस्ट यूपी में आपरेशन चल रहा था। मोबाइल सिम उपलब्ध कराने के आरोप में मुजफ्फरनगर से एक युवक समेत तीन को हिरासत में लिया गया है। पुलिस टीम देर रात कारोबारी को लेकर दून पहुंच गई। मेडिकल के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

तीन हिरासत में, सफेदपोश गैंग का हाथ

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पुलिस दबाव के चलते कारोबारी मनोज गुप्ता को अपहरणकर्ताओं ने मुक्त किया है। अपहरण में एक सफेदपोश गैंग का नाम सामने आने आ रहा है। तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने फिरौती देने की बात से इनकार किया है।
-सदानंद दाते, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून।

मैं सही हूं, जल्द वापस आऊंगा
मनोज गुप्ता ने रात में ही फोन पर परिजनों से बात कर सब कुछ सही होने की बात कही है। अपहरणकर्ताओं द्वारा गुप्ता की बात कराने के पीछे पुलिस और परिजनों के बीच के समन्वय तोड़ने की नजर से देखा जा रहा है। दून पुलिस का कहना है कि गुप्ता ने परिजनों से कहा है कि मैं सही हूं, जल्द घर आ जाऊंगा। किसी तरह की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है।
 
बदलते रहे सिम के मालिक
मनोज गुप्ता की रिहाई के लिए जिस फोन से एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी, उस सिम के मालिक लगातार बदलते रहे। यह सिम एक मोबाइल कंपनी के प्रतिनिधि ने जारी किया था। बाद में सिम दूसरे को दिया गया। सिम से फिरौती मांगी गई तो पुलिस आईडी के आधार पर उसके पहले मालिक तक पहुंच गई, जहां से पता चला कि वह सिम तो प्रतिनिधि को वापस कर दिया। रात में पुलिस ने मुजफ्फरनगर के जट नंगला निवासी कंपनी के प्रतिनिधि को उठाया तो पूरी कहानी से पर्दा उठता चला गया।

महिला मित्र नहीं आई हाथ
मनोज गुप्ता के अपहरण में खास रोल निभाने वाली महिला मित्र को पकड़ने में पुलिस नाकामयाब रही है। पुलिस अभी तक उसका सही ठिकाना नहीं खोज पाई है।

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