पुलिस के लिए शुभ, चोरों के लिए अशुभ है पार्षद की बोलेरो
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उत्तराखंड के रुड़की में पुलिस ने अंतर्राज्यीय वाहन चोर गिरोह के चार शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से छह कार बरामद की गई है। इनमें से तीन कारें दिल्ली से चोरी की गई थी, जबकि एक बोलेरो कार पार्षद की है। पुलिस के अनुसार तीन आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।
शुक्रवार को कोतवाली में एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि वाहन चोर गिरोह को पकड़ने के लिए एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल, एसपी प्रहलाद नारायण मीणा और एसओजी के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया था। पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर 29 जनवरी की शाम चेकिंग करते समय बोलेरो कार को रोक लिया।
इसमें सवार युवकों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि जिस कार में वह सवार हैं, वह रुड़की नगर निगम पार्षद बेबी खन्ना की है। यह कार पिछले माह चोरी हो गई थी। आरोपियों ने अपने नाम अमित निवासी गांव नगली महासह थाना खतौली, संजय कुमार गांधी नगर थाना नई मंडी मुजफ्फरनगर तथा मोईन एवं फरजान निवासी गांव अंती थाना खतौली जिला मुजफ्फरनगर बताया।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने लक्सर से चोरी हुई दुग्ध संघ शिकारपुर के चेयरमैन डा. रणवीर सिंह की बोलेरो कार तथा कनखल से चोरी हुई सिलवर रंग की इंडिका कार समेत छह कार बरामद की। इसमें से सफेद रंग की आल्टो, काले रंग की वरना तथा एक सफारी कार दिल्ली से चोरी की र्गई थी।
पुलिस के लिए शुभ है पार्षद की बोलेरो
रुड़की से पार्षद बेबी खन्ना की बोलेरो कार पुलिस के लिए शुभ है। पिछले साल भी यह बोलेरो कार चोरी हो गई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच पड़ताल की थी। यह कार नेपाल बार्डर से बरामद हुई थी। इस बार भी पिछले माह चोरी हुई पार्षद बेबी खन्ना की बोलेरो कार बरामद हुई तो साथ में पांच अन्य कारें भी बरामद हुईं। बताया गया है कि पार्षद की पिछले कुछ सालों में पांच गाड़ियां चोरी हो चुकी हैं जिनमें से तीन बार गाड़ी बरामद हुई है।
सुनियोजित तरीके से बेचते थे चोरी के वाहन
पुलिस की मानें तो आरोपी शातिर तरीके से चोरी के वाहन बेचते थे। गिरोह के लोग कई चरण में काम करते थे। प्रथम चरण में मोईन, संजय और फरजान कार चोरी करते थे। इसके बाद इस गिरोह के फरार आरोपी राशिद असलम और खालिद पुरानी गाड़ियां खरीदते थे। इन पुरानी गाड़ियों को कबाड़ में कटवा देते थे तथा इनके कागजात सुरक्षित रखते थे।
इसके बाद आरोपी इन कागजातों के आधार पर चोरी के वाहनों के इंजन और चेसिस नंबर बदलते थे। इसके बाद आरोपी वाहनों को वापस राशिद और असलम को दे देते थे। इन गाड़ियों को साढ़े तीन से चार लाख के बीच बेचा जाता था। गिरोह के लोगोंका मुनाफा अलग-अलग होता था। आरोपियों ने इस बात का खुलासा किया है।