मासूमों की आंखों में एक पिता के कहर की कहानी
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चार साल के शुभम और तीन साल की चंद्रा को मालूम नहीं है कि उनकी मां कहां चली गई है। लेकिन उनकी आंखों में उस कहर का खौफ नजर आता है जो उनके पिता ने उनकी मां पर बरपाया था।
अब बुआ के घर पर टिके इन बच्चों का सहारा उनकी बड़ी बहन आठ साल की मासूम नंदिनी है। लेकिन नंदिनी भी पिता की करनी से खौफजदा है।
उसने हर उस पल को समझा है, जिसने मां को पिता के हाथों दर्द दिया। हर वो रात देखी है, जब छोटे भाई-बहन के सोने के बाद पिता मां को नशे में धुत होकर मारता था।
और फिर उसने वो काली सुबह भी देखी है, जब उन्हें अपने हाथों से नाश्ता कराने के बाद मां दुनिया छोड़ गई।
बार-बार मां को पुकार कर रो पड़ते हैं मासूम
चंद्रा, शुभम और नंदिनी उस उमा के बच्चे हैं, जिसे उसके ही पति रमेश ने मौत के घाट उतार दिया। चंद्रा और शुभम का तो रो-रोकर बुरा हाल है।
बेसुध पड़ी मां को देखने के बाद उनकी समझ में नहीं आ रहा कि आखिर उसे क्या हुआ है। वे बार-बार मां को पुकार कर फूट पड़ते हैं। लेकिन, नंदिनी जानती है कि अब मां नहीं लौटेगी।
पुलिस ने नंदिनी से जानकारी ली तो मालूम हुआ कि रमेश की कोई रात ऐसी नहीं बीतती थी, जब वह पत्नी उमा को जमकर पीटता न हो।
शराब में उड़ा देता था उमा की सारी कमाई
उमा घरों में साफ-सफाई कर जो भी कमाती थी, उसे रमेश शराब पीने में उड़ा देता था। नंदिनी ने बताया कि दो महीने पहले ही रमेश ने उमा को इस कदर पीटा था कि उसके पैर की हड्डी टूट गई थी।
बाद में उसके पैर में रॉड डाली गई थी। यही नहीं, तीन दिन पहले शराब के लिए पैसे न देने पर उसने उमा के सिर पर चाकू दे मारा था। इससे उमा के सिर पर हल्का घाव हो गया था।
मां की मौत और पिता के जेल जाने के बाद तीनों बच्चे अनाथ हो गए हैं। ऐसे में इन तीनों बच्चों की देखभाल का सवाल खड़ा हो गया है।
बच्चों के लिए लौटी थी घर
पूछताछ में पता चला कि उमा रविवार रात पड़ोसी के घर चंद घंटे रहने के बाद सोमवार तड़के ही घर लौट आई थी। उसे रातभर बच्चों की चिंता में नींद नहीं आई थी।
घर लौटने के बाद उसने नाश्ता बनाया और तीनों बच्चों को खिलाया। इसी बीच रमेश उठा और फिर उमा की जान लेकर ही शांत हुआ।
मकान मालकिन के पिता ने समझाया था
रमेश परिवार संग विजयलक्ष्मी के मकान में किराये पर रह रहा था। विजयलक्ष्मी रोज-रोज के झगड़ों से परेशान थी और कई बार रमेश को समझा चुकी थी, लेकिन उस पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
जानकारी मिलने पर रविवार को पंडितवाड़ी निवासी विजयलक्ष्मी के पिता विक्रम सिंह भी घर आए थे। उन्होंने भी रमेश को ऐसा न करने की हिदायत दी थी।
लेकिन, रमेश ने उनसे भी अभद्रता कर डाली थी। आस-पड़ोस के लोग भी रमेश को समझाया करते थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
‘पूछा था, रात में कहां थी?’
आरोपी रमेश ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि सुबह उसने उमा से पूछा था कि वह रात को कहां थी? उमा ने कोई जवाब नहीं दिया तो झगड़ा बढ़ गया।
उसका कहना है कि उसका गुस्सा बढ़ता गया और अनहोनी हो गई। रमेश के मुताबिक उसे लगा कि उमा बेहोश हो गई है।
होश में लाने के लिए उसके चेहरे पर पानी के छींटे भी मारे थे, लेकिन बाद में पता चला कि वह मर चुकी है।