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नौकरी के सब्जबाग दिखाकर करता था अस्मत का करोबार
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 06 Dec 2013 05:24 PM IST
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जून 2012 में देहरादून में हुए गैंगरेप प्रकरण का मास्टरमाइंड और डेढ़ साल से फरार दीपेश पांडे रोजगार की तलाश में परेशान युवतियों को अपने चंगुल में फांसने में माहिर है।
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दिखाता है सब्जबाग
इंटरनेट पर चैटिंग के जरिये वह युवतियों को नौकरी दिलाने के सब्जबाग दिखाता है और फिर देह व्यापार के दलदल में झोंक देता है। पीड़ित युवती भी मां को ब्लड कैंसर की बीमारी से आर्थिक रूप से परेशान थी।
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उसके घर में मां और उसके अलावा और कोई नहीं है। उसने अपने बयान में बताया कि लखनऊ के जिस होटल में उसे नौकरी दी गई थी, उसका मालिक दीपेश ही है। हालांकि, उसने वहां दुराचार न होने की बात कही।
पीड़िता ने बताई पुलिस को लोकेशन
पीड़िता को दून में जिस कमरे में बंधक बनाकर रखा गया, उसके सामने सड़क के दूसरी ओर सनराइज टेलर की दुकान थी।
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एक सप्ताह तक बंधक बने रहने के बाद युवती के हाथ एक आरोपी का फोन लगा तो उसने इसी दुकान के बारे में पुलिस को बताया।
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इसके बाद पटेलनगर पुलिस ने इंस्पेक्टर एसएस बिष्ट के नेतृत्व में ब्रह्मपुरी में लोकेशन ट्रेस कर उसे छुड़ाया। सभी आरोपी भी मौके से दबोच लिए गए थे।
फैसला आया तो बौखलाए परिजन
कोर्ट में फैसला आते ही दोषियों के परिजन कोर्ट में शोर मचाने लगे। उनका कहना था कि उन्हें दोषियों के बरी होने की पूरी उम्मीद थी। पुलिस ने हस्तक्षेप कर किसी तरह उन्हें शांत किया। बाद में वहां भारी फोर्स तैनात कर दी गई।
लैपटॉप में मिले थे कई नंबर
मौके से पुलिस को एक लैपटोप मिला था। जिसे पुलिस दीपक चौधरी का बता रही थी। पुलिस का कहना था कि इसमें सैकड़ों लोगों के मोबाइल नंबर दर्ज हैं। लैपटॉप में कुछ वीडियो और फोटो भी थे।
मामले में तेजी से आया फैसला
मामले में तेजी से गवाही हुई और कोर्ट ने डेढ़ साल के भीतर फैसला सुना दिया। शासकीय अधिवक्ता जया के मुताबिक पीड़िता ने पूरा सहयोग किया।
वह किसी लालच या दबाव में नहीं आई। हर बार गवाही के लिए वह पश्चिम बंगाल से दून आई और गवाही होने तक यहीं रुकी रही।