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नारी निकेतनः भ्रूण निकालकर स्कूटर से ले गया था आरोपी

Wed, 02 Dec 2015 01:11 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 02 Dec 2015 01:11 PM IST
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dehradun nari niketan molestation case.

देहरादून नारी निकेतन में संवासिनी के गर्भपात और भ्रूण को इधर-उधर करने के राज का खुलासा होना अभी बाकी है।

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मसलन, गर्भपात कराने में कौन-कौन शामिल था? किसके इशारे पर नारी निकेतन से भ्रूण को निकालकर दूधली गांव के जंगल में छिपाया गया? जिस कर्मचारी की निशानदेही पर भ्रूण बरामद हुआ, वह पुलिस की गिरफ्त में तो है, लेकिन वह कुछ भी नहीं बोल रहा है। बताया जा रहा है कि आरोपी एक अन्य साथी के साथ जंगल तक स्कूटर से गया था।

नारी निकेतन में संवासिनी के शारीरिक शोषण और उसके गर्भपात मामले में बहुत कुछ साफ होना शेष है। अभी सिर्फ वही आरोपी सलाखों के पीछे गए हैं, जिन्होंने संवासिनी को अलग-अलग समय पर हवस का शिकार बनाया। गर्भपात कराने से लेकर भ्रूण को छिपाने तक के किरदारों के चेहरों से नकाब उठना बाकी है।
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15 नवंबर की रात दवा देकर संवासिनी का गर्भपात कराने के बाद भ्रूण को नारी निकेतन के परिसर में दबा दिया गया था। 17 नवंबर को मामला अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद भ्रूण को नारी निकेतन से निकाल कर दूधली के जंगल में दबा दिया गया।
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बताया जा रहा है कि भ्रूण को जंगल में दबाने के लिए नारी निकेतन का एक कर्मचारी अपने परिचित के साथ स्कूटर से गया था। पुलिस ने उसी की निशानदेही पर भ्रूण बरामद किया है। लेकिन आरोपी ने किसके इशारे पर यह काम किया इसका खुलासा नहीं हो पाया है।

उसका साथी स्कूटर से उसके साथ दूधली जाने की बात तो स्वीकार कर रहा है, लेकिन भ्रूण के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। आरोपी अपने साथी को बाहर छोड़कर अकेला जंगल के अंदर गया था।

नारी निकेतन मामले में हर आशंका को दूर करने वाली कार्रवाई की जाएगी। गर्भपात और भ्रूण को लेकर भी जल्द ही तस्वीर साफ हो जाएगी। इस खेल में जो भी शामिल रहा है, उसके खिलाफ निश्चित तौर पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सदानंद दाते, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

साक्ष्य मिटाने वालों पर कार्रवाई को मंथन

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संवासिनी की अस्मत लूटने वालों पर कार्रवाई के बाद अब गर्भपात कराने और साक्ष्य मिटाने में मुख्य रोल निभाने वालों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। साक्ष्य मिटाने में सजा के संबंध में देर रात तक मंथन चलता रहा कि उनकी गिरफ्तारी की जाए या नहीं।

बुधवार को इस मामले में पुलिस अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ा सकती है। दुराचार के आरोपियों के बाद पुलिस के सामने नारी निकेतन के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चुनौती है, जिन्होंने संवासिनी का गर्भपात कराने के साथ साक्ष्य मिटाने में अहम भूमिका निभाई है।

इनमें केन्द्र की कार्यवाह प्रभारी समेत कई महिला कर्मचारियों के नाम पुलिस की जुबान पर हैं। मामले में कार्रवाई के लिए पुलिस दो श्रेणी बना रही है। घोर लापरवाही में गिरफ्तारी की जाए और दूसरे के नाम चार्जशीट में शामिल किए जाएं, क्योंकि धारा 201 के मामले में सात साल से कम की सजा का प्रावधान होने का तर्क दिया जा रहा है।

राज्यपाल तक पहुंचा संवासिनी प्रकरण

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नारी निकेतन में संवासिनी के साथ हुए दुराचार का प्रकरण राज्यपाल तक पहुंच गया है। विपक्षी दल भाजपा ने राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है। इतना ही नहीं राज्यपाल से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल ने संवासिनी प्रकरण में पार्टी स्तर से करायी जांच की रिपोर्ट भी सौंपी।

प्रतिनिधिमंडल ने नारी निकेतन की बदहाल स्थिति पर भी सवालिया निशान उठाए हैं। बताया कि नारी निकेतन में महज 50 संवासिनी के रहने की व्यवस्था है जबकि वर्तमान में वहां 135 संवासिनी रह रही है। जिसमें से 103 संवासिनी मूक बधिर है।

नारी निकेतन की जांच के दौरान विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों ने अभिलेख दिखाने से मना किया जिससे साबित होता है कि वहां सब कुछ ठीकठाक नही है। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक या फिर सीबीआई जांच कराने की मांग की ताकि इस प्रकरण में शामिल तमाम आरोपियों को चिन्हित कर उन्हें जेल भेजा जा सके।

भाजपाई प्रतिनिधिमंडल ने सरकार व कांग्रेस पर आरोप लगाया कि विधायक सरिता आर्य द्वारा नारी निकेतन के भ्रमण के बाद सरकार को क्लीन चिट देने से स्थिति और गंभीर हो गई। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से प्रकरण की न्यायिक या फिर सीबीआई जांच की मांग के साथ ही इसमें शामिल सभी संदिग्धों को चिन्हित कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने विधायक विजय बड़थ्वाल, पूर्व विधायक आशा नौटियाल, बीना महराना, सुशीला बलूनी, मधु चौहान, मधु भट्ट, विनोद उनियाल, अनुराधा वालिया, नीलम सहगल, ब्रजलेश गुप्ता, ऊर्बादत्त भट्ट समेत कई शामिल थे।

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