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चोर चुराते हैं, खरीदने वाले कमाते हैं...

Mon, 14 Jul 2014 04:31 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 14 Jul 2014 04:31 PM IST
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crime story

चोरों का नेटवर्क सिर्फ उन्हीं तक सीमित नहीं है। चोरी के जेवर बाजार में बेचे जाते हैं, जहां से उन्हें ठिकाने लगाया जाता है।

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चोरों की ‘मेहनत’ की ज्यादातर कमाई चोरी का माल खरीदने वाले खा जाते हैं। यह बात चोरों को भी मालूम होती है लेकिन उनके पास और कोई रास्ता नहीं होता है।

खतरे और कार्रवाई का डर दिखाकर खरीदार चोरों से औने-पौने दामों पर माल खरीदते हैं।

सलाखों के पीछे बंद चोर ने बताया सच
चोरी के आरोप में सलाखों के पीछे लंबा वक्त गुजार चुके और अब सामान्य जीवन जी रहे शख्स ने अमर उजाला संवाददाता को बताया कि चोर तो सामान चुराते हैं लेकिन चोरी के सामानों को खरीदने वाले अधिक कमाई करते हैं।

पुलिस को पकड़वाने का भय दिखाकर जेवर या अन्य सामान औने-पौने दामों में खरीद लेते हैं और बाद में अच्छी कमाई करते हैं। चोरों की मजबूरी होती है कि उन्हें सामान बेचना ही है।
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बताता है कि बड़े चोर गिरोह कुछ खरीदारों से एसाइनमेंट खपाने का अघोषित अनुबंध किए रहते हैं। इससे उन्हें यह फायदा होता है कि रकम छोटी ही सही, लेकिन कैश मिलती है।
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दूसरा मुखबिरी का डर नहीं रहता। हालांकि, लोकल गैंग चोरी के जेवर फुटकर के तौर पर अलग-अलग जगह बेचते हैं।

गला दिए जाते हैं जेवर
इस शख्स की मानें तो अधिकतर खरीदार चोरों से सामान खरीदते ही उन्हें ठिकाने लगा देते हैं। गहने आदि तो तुरंत ही गला दिए जाते हैं।

जेवर को कुठाली में गरम करके गलाया जाता है। धातु की गली मात्रा के बराबर ही सिल्वर मिक्स कर इसकी केमिकल रिफाइनिंग की जाती है।

राजधानी में सराफ जागरूक
हाल ही में सफाई का काम करने वाली एक महिला घर से जेवर चुराकर बेचने पहुंची तो सराफ ने उसे पुलिस बुलाकर पकड़वा दिया।

खास बात यह है कि इस महिला ने बचाव के लिए एक चौकी प्रभारी पर ही दुराचार का आरोप लगाया था। इसी तरह डालनवाला में चेन लूट के मामले में भी पुलिस सराफ के सहारे ही आरोपियों तक पहुंची।


सर्राफ ने सीसीटीवी फुटेज पुलिस को दी थी। इस मामले में एक आरोपी की हिरासत में मौत हो गई थी।

दून सराफा मंडल से जुडे़ कारोबारी बिना आईडी के कोई जेवरात नहीं खरीदते। कुछ छोटे दुकानदार इस तरह की एहतियात नहीं बरतते। ऐसे में चोरी का माल खपने की संभावना रहती है। चोरी का माल पकड़वाने में हमारा संगठन पुलिस का हरसंभव सहयोग करता है।
- सुनील मेसोन, महासचिव, दून सराफा मंडल

(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी rakeshk@mrt.amarujala.com और इस नंबर-9675501486 पर संपर्क कर सकते हैं।)

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