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छुड़ाने वालों के लिए खुद पहेली है कुख्यात भूरा
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 04 Jan 2015 03:13 PM IST
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अमित उर्फ भूरा को पुलिस अभिरक्षा से छुड़ाने वाले अधिकांश बदमाशों के लिए भूरा खुद पहेली से कम नहीं है। शातिर नीरज बवाना और मोनू खोखर के इशारे पर भूरा को छुड़ाने वाले बदमाश भूरा से ज्यादा वाकिफ नहीं है।
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भूरा के सटीक सुराग से कोसों दूर
यही वजह है कि तीन राज्यों की पुलिस काफी माथापच्ची के बावजूद उनसे खास जानकारी नहीं उगलवा पाई हैं। पुलिस भले ही भूरा को जल्द पकड़ने का दम भरे, लेकिन सूत्रों की मानें तो पुलिस अभी भी भूरा के सटीक सुराग से कोसों दूर है।
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अपराधियों के कई गिरोहों से ताल्लुक रखने वाले अमित उर्फ भूरा को छुड़ाने के लिए ऐसे बाहरी बदमाश इस्तेमाल किए गए, जिनका भूरा से सीधे तौर पर कभी जुड़ाव नहीं रहा। दिल्ली के इनामी नीरज बवाना और बागपत के मोनू खोखर ने भूरा को छुड़वाने के लिए चुन-चुनकर टीम बनाई थी।
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ऐसे में पूरी संभावना है कि इस फरारी के पीछे कोई बड़ी साजिश रची जा रही हो। मोनू खोखर जेल में बंद सुनील राठी से जुड़ा है। वह भूरा के साथ रुड़की जेल के बाहर हुई गैंगवार में शामिल था। लेकिन भूरा को छुड़ाने के पीछे बवाना का मकसद क्या है, इसका पता नहीं चल सका है।
भूरा को छुड़ाने के आरोप में पकडे़ गए प्रिंस, सद्दाम और रवि कुमार ने आकाओं की साजिश और छुड़ाने की पूरी कहानी तो बयां कर दी, लेकिन भूरा का सुराग नहीं दे सके। ऐसे में पुलिस अभी भी अंधेरे में हाथ मार रही है।
एसटीएफ के एसएसपी सदानंद दांते का कहना है कि साजिशकर्ताओं के मिलने के बाद काफी कुछ हाथ आने की उम्मीद है। भूरा को छुड़ाने के लिए वो नीरज और मोनू के इशारे पर आए थे। इस कारण उन्हें भूरा के बारे में कम जानकारी है।
पीठ थपथपा रही पुलिस को नहीं भनक
साथियों की गिरफ्तारी को लेकर पीठ थपथपा रही उत्तराखंड पुलिस के पास भूरा का कोई सुराग नहीं है। भूरा के साथी भी दिल्ली पुलिस की मदद से ही पकड़े गए।
लूटे गए तीनों सरकारी असलहे और भूरा को लेकर जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। पुलिस अधिकारी भी अब कहने लगे हैं कि ‘आपरेशन भूरा’ में अभी थोड़ा वक्त लगेगा।
पुलिस को चकमा दे भूरा भागा नेपाल
सुरक्षा बलों की हिटलिस्ट में रहने वाला 10 लाख का इनामी बदमाश अमित ‘भूरा’ उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड की पुलिस को चकमा देकर नेपाल भाग गया। तीनों राज्यों की पुलिस ही नहीं बल्कि राज्यों के एसटीएफ (स्पेशल टॉस्क फोर्स) जैसी स्पेशल ब्रांच ने भी उसको पकड़ने के लिए पूरी ताकत लगा दी।
मगर उसने अपने गैंग का खात्मा कर पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए ऐसी जगह का रुख कर लिया, जहां से उसे पकड़ना आसान नहीं है। 90 के दशक में मोस्ट वांटेड श्रीप्रकाश शुक्ला को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने चार मई 1998 को एसटीएफ का गठन कर 23 सितंबर 1998 को उसे एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।
भूरा ऑपरेशन में लगे एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि सरनावली, मुजफ्फरनगर निवासी अमित मलिक उर्फ भूरा (29) पुत्र यशपाल मलिक ठीक श्रीप्रकाश शुक्ला की राह पर चल रहा है। जिसे पकड़ने का जिम्मा उत्तर प्रदेश में एसटीएफ को सौंपा गया और बाकायदा नोएडा में एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया।
ऑपरेशन में लगे सूत्र बताते हैं कि अमित विगत 15 दिसंबर को दिल्ली पुलिस को चकमा देकर फरार होने के बाद वह मुंबई गया और वहां से नेपाल फरार हो गया। उसका एक सिंडीकेट मुंबई में भी चल रहा था।
बताया जाता है कि उसने अपना फाइनेंस हब मुंबई को बना रखा था। अगर थोड़े दिन और वह यहां रहता तो पकड़ा जाता। भूरा के ऊपर उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड पुलिस की तरफ से 5-5 लाख का इनाम है।
अपने गैंग का किया खात्मा
सूत्रों का कहना है कि 15 दिसंबर के बाद से भूरा ने एक भी वारदात को अंजाम नहीं दिया। उसे यह मालूम है कि अगर उसने किसी भी वारदात को अंजाम दिया तो वह पुलिस की नजरों से नहीं बच पाएगा।
भूरा ने सबसे पहले अपने गैंग का खात्मा किया, जिससे एक के बाद रवि कुमार, प्रिंस, सद्दाम जैसे उसके खतरनाक साथियों को पुलिस ने दबोच लिया। वहीं, वह अब मोबाइल फोन का भी इस्तेमाल नहीं कर रहा है ताकि सर्विलांस की मदद से पुलिस उस तक न पहुंच सके।
गर्लफ्रेंड का भी पता नहीं
भूरा की दिल्ली निवासी माया उर्फ मीनाक्षी नाम की एक गर्लफ्रेंड थी। इतना ही नहीं भूरा ने अपने साथी गढ़ी निवासी मोनू को इंदिरापुरम में एक घर किराए पर दिला रखा था।
अमित और माया को जब कभी मिलना होता था तो वे उसी घर में मिलते थे। 2009 में सेक्टर-58 थाने में दर्ज एक मामले में मोनू आरोपी था, उसे पकड़ने के लिए जब नोएडा पुलिस इंदिरापुरम स्थित घर पहुंची तब मोनू और मीनाक्षी वहां मिले थे। भूरा वहां से फरार होने में सफल हो गया था। मौजूदा समय में माया का कोई रिकार्ड पुलिस के पास नहीं है।
50 से ज्यादा दर्ज हैं मामले
लूट, डकैती, किडनैपिंग, मर्डर जैसे 50 से ज्यादा मामले भूरा पर दर्ज हैं। ये मामले उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान के विभिन्न थानों में दर्ज हैं। भूरा को जब दो दिसंबर 2009 को पूर्वी दिल्ली पुलिस के स्पेशल स्टाफ ने गिरफ्तार किया था।
उस वक्त दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद, दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, जनकपुरी, कल्याणपुरी, मालवीय नगर, शामली, अमी नगर सराय बागपत में भूरा के खिलाफ दर्ज करीब 18 मामलों का खुलासा किया था। जिसमें बाकायदा लूटपाट की रकम व लक्जरी गाड़ियां बरामद की गई थीं।
अमित भूरा को पकड़ने के लिए लगातार ट्रेसिंग की जा रही है। हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं जिससे उस तक पहुंचा जा सके। इस वक्त वह तीनों प्रदेश की पुलिस का टारगेट है।
- अजय सहदेव, एएसपी एसटीएफ