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तीन साल पहले हुई अंकित की हत्या के आरोपी ने कबूल किया गुनाह

ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 09 Mar 2017 10:24 AM IST
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तीन साल पहले 2014 में देहरादून के अंकित थपलियाल हत्याकांड में पकड़े गए शातिर अकरम ने खुलासा किया कि लूट की वारदात के दौरान अंकित उस पर भारी पड़ने लगा तो उसने खुद को बचाने के लिए गोली चला दी। छर्रे लगने से वह खुद भी जख्मी हो गया।
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अंकित को घायल समझकर भाग निकला, लेकिन अगले दिन पता चला कि उसकी मौत हो गई है। पुलिस से छिपते छिपाते वह गुजरात के राजकोट पहुंचा, जहां सलीम नाम से एक ढाबे पर काम कर रहा था। इस बीच अपनी पत्नी और बच्चाें को वहां शिफ्ट करने का तानाबाना बुन ही रहा था कि पुलिस ने उसे पकड़ लिया।


नकरौंदा रोड के विवेक विहार निवासी सहायक कृषि अधिकारी सुरेंद्र थपलियाल के बेटे अंकित थपलियाल की सितंबर 2014 में हुई हत्या के मामले में पकड़े गए पचास हजार रुपये के इनामी अकरम निवासी बुंटा शामली को बुधवार को मीडिया के सामने पेश किया। एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि अकरम घटना के बाद गुजरात के राजकोट में छिपा था।

जहां पर वह सलीम के नाम से ढाबे पर काम कर रहा था। पुलिस टीम उसके पीछे गुजरात तक गई थी, जहां पर पता चला कि अकरम उर्फ सलीम अपने बीवी और बच्चाें को लेने के लिए मुजफ्फरनगर गया है। इसी सूचना के आधार पर अकरम को मुजफ्फरनगर के कूकडा रोड से दबोचा गया है। उन्होंने एसपी सिटी अजय सिंह और उनकी टीम को अकरम की गिरफ्तारी का श्रेय दिया।

पुलिस हिरासत में अकरम डकैती के पूरे घटनाक्रम को बेरोकटोक बयां करता चला गया। आरोपी का कहना था कि उस रात अंकित थपलियाल भारी पड़ गया था। खुद को छुड़ाने की तमाम कोशिश नाकाम हुई तो  घबराहट में लोड तमंचे का ट्रेगर दबा दिया था। वह तो डोईवाला के अखलाक के कहने पर घटना में शामिल होने आया था। उसे झांसा दिया था कि लूट में काफी माल मिलेगा। इस घटना के बारह दिन बाद वह गुजरात के राजकोट में जाकर छिप गया था, जहां पर पहले एक ढाबे पर वेटर का काम किया। बाद में वह कारीगर बन गया था। पुलिस ने तीसरे पहर लिखा पढ़ी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।    

लूट का मोबाइल बरामद
पुलिस ने अकरम की निशानदेही पर अंकित का लूटा गया मोबाइल भी बरामद कर लिया। गोली मारने के बाद अकरम अंकित का मोबाइल छीनकर ले गया था। यह बात अलग है कि अकरम ने मोबाइल का प्रयोग नहीं किया था। अकरम ने हत्या में प्रयुक्त बड़ी नाल का तमंचा भी बरामद करा दिया है। अकरम का कहना था कि वारदात के बाद तमंचा और कारतूस गांव में पलथेडी रजवाहे के पास जमीन में दबा दिया था, जो पुलिस को बरामद करा दिया।

55 नानवेज ढाबों में हुई अकरम की खोज
दून पुलिस को राजकोट में अकरम तक पहुंचने के लिए 55 नानवेज ढाबों को खंगालना पड़ा था। पुलिस को सिर्फ यह जानकारी थी कि वह राजकोट के किसी नानवेज ढाबे पर काम कर रहा है। प्रेमनगर एसओ नरेश राठौड़, उप निरीक्षक संदीप, सिपाही चमन कुमार, सुशील चौधरी और सुनील मलिक को राजकोट भेजा गया। दो दिन तक पुलिस टीम एक ढाबे से दूसरे ढाबे पर उसे ढूंढती रही, लेकिन वहां उसे कोई अकरम के रुप में नहीं जानता था। पहचान बताई तो उसका नाम सलीम बताया गया। 

एसपी ने दिया पूरा साथ
अंकित थपलियाल के पिता सुरेंद्र थपलियाल ने अकरम की गिरफ्तारी को कानून की जीत बताया है। बंगलूरू से दूरभाष पर अमर उजाला से बातचीत में थपलियाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले। उन्हाेंने कहा कि एसपी सिटी अजय सिंह ने पहले दिन से उनका पूरा साथ दिया है। वह अब भी बीचबीच में बातकर आश्वासन देते थे कि अकरम को वह जरूर पकड़कर लाएंगे। जो वादा किया था, उसे पूरा किया है। बता दें कि अकरम की गिरफ्तारी के लिए अजय रौतेला, पुष्पक ज्योति और सदानंद दाते के कार्यकाल में टीमें लगातार दबिश देती रहीं। एक बार तो बूंटा गांव में पुलिस घिर भी गई थी। सीओ और कई एसओ भी बदले गए, लेकिन एसपी सिटी अजय सिंह ही उस दिन से अब तक इस मामले को फॉलोअप कर रहे थे।

प्रेमनगर थाने का चौथा गुडवर्क
देहरादून के प्रेमनगर पुलिस नंबर वन चल रहा है। मेरठ के कारोबारी के अपहरण में फरारी शातिर अपराधी विनय त्यागी उर्फ टिंकू और मोनू त्यागी को भी इसी थाने की पुलिस ने पकड़ा। एसओ प्रेमनगर नरेश राठौड़ के नेतृत्व वाली टीम ने लापता दिनेश पांथी को सकुशल बरामद किया था। दिनेश की हत्या की आशंका जताते हुए कई माह तक पुलिस को कटघरे में खड़ा किया गया था। अब मोस्ट वांटेड अकरम की गिरफ्तारी का श्रेय भी राठौड़ और उनकी टीम को ही मिला है।
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