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लूट का सामान रखने पर तीन साल कैद
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
हत्या और लूट के मामले में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है, लेकिन लूट का सामान रखने का दोष सिद्ध हुआ है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने दोषी को तीन साल की कैद और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी दो साल नौ माह से जेल में बंद है। उसकी जेल में बिताई अवधि को भी सजा में शामिल किया जाएगा।
शासकीय अधिवक्ता जया ठाकुर ने बताया कि रोनिका रजियाना निवासी सरस्वती विहार रायपुर ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार 19 जून 2016 को उनकी माता रानू नागलिया का शव मकान से बरामद हुआ था। घर से कीमती सामान और स्कूटर आदि सामान गायब था। इस मामले में पुलिस ने हत्या और चोरी का मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने गुरुवेज सिंह उर्फ तेजा निवासी ग्राम सभादभाई थाना पुराना जिला मोगा पंजाब को गिरफ्तार किया। गुरुवेज के पास से रानू नागलिया के घर से चोरी हुआ सामान बरामद हुआ। पुलिस ने विवेचना के दौरान मुकदमे में लूट (आईपीसी 392) और लूट का सामान रखने (आईपीसी 411) की धारा बढ़ा दी। अभियोजन की ओर से कुल 13 गवाह प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष की ओर से भी कई लोगों की गवाही कराई गई। दोनों ओर की दलीलों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने तेजा को हत्या और लूट के आरोप से बरी कर दिया, लेकिन आईपीसी 411 का दोषी माना।
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हत्या और लूट के मामले में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है, लेकिन लूट का सामान रखने का दोष सिद्ध हुआ है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने दोषी को तीन साल की कैद और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी दो साल नौ माह से जेल में बंद है। उसकी जेल में बिताई अवधि को भी सजा में शामिल किया जाएगा।
शासकीय अधिवक्ता जया ठाकुर ने बताया कि रोनिका रजियाना निवासी सरस्वती विहार रायपुर ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार 19 जून 2016 को उनकी माता रानू नागलिया का शव मकान से बरामद हुआ था। घर से कीमती सामान और स्कूटर आदि सामान गायब था। इस मामले में पुलिस ने हत्या और चोरी का मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने गुरुवेज सिंह उर्फ तेजा निवासी ग्राम सभादभाई थाना पुराना जिला मोगा पंजाब को गिरफ्तार किया। गुरुवेज के पास से रानू नागलिया के घर से चोरी हुआ सामान बरामद हुआ। पुलिस ने विवेचना के दौरान मुकदमे में लूट (आईपीसी 392) और लूट का सामान रखने (आईपीसी 411) की धारा बढ़ा दी। अभियोजन की ओर से कुल 13 गवाह प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष की ओर से भी कई लोगों की गवाही कराई गई। दोनों ओर की दलीलों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने तेजा को हत्या और लूट के आरोप से बरी कर दिया, लेकिन आईपीसी 411 का दोषी माना।
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