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सरकारी नौकरी के नाम पर ठगे चार लाख रुपये
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:53 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला /देहरादून।
बेटे को लोक निर्माण विभाग में गलत तरीके से नौकरी दिलाने के फेर में एक टीचर ने चार लाख रुपये गंवा दिए। अब पीड़ित बनकर उसने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इनमें से एक आरोपी पहले से जेल में निरुद्ध बताया गया है।
रुड़की तहसील के चुड़ियाला गांव निवासी शिक्षक योगेंद्र कुमार त्यागी के अनुसार अरविंद सुंदरियाल, पुरुषोत्तम और यशवीर सिंह ने दिसंबर 2016 में उनके बेटे की लोक निर्माण विभाग में नौकरी लगवाने की बात कही थी। यह जानते हुए भी कि पैसे देकर नौकरी पाना गलत है, बावजूद योगेंद्र ने आरोपियों को चार लाख रुपये दे दिए। जाहिर है कि नौकरी लगनी थी नहीं, आरोपी शिकायतकर्ता त्यागी को तरह-तरह की कहानी बनाकर गुमराह करते रहे। कई बार रकम वापस मांगने के बाद आरोपियों ने बात करनी छोड़ दी। नतीजा, योगेंद्र कुमार ने शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। एक पुलिस अधिकारी कहते हैं कि यूं तो इस मामले में टीचर भी कम गुनाहगार नहीं है, जिसने गलत तरीके से नौकरी पाने के लिए सौदा किया और अब ठगा गया तो पीड़ित बनकर पुलिस के पास आ गया। खैर, कानून में पीड़ित के खिलाफ कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है, लिहाजा प्रचलित कानून के तहत आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है।
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बेटे को लोक निर्माण विभाग में गलत तरीके से नौकरी दिलाने के फेर में एक टीचर ने चार लाख रुपये गंवा दिए। अब पीड़ित बनकर उसने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इनमें से एक आरोपी पहले से जेल में निरुद्ध बताया गया है।
रुड़की तहसील के चुड़ियाला गांव निवासी शिक्षक योगेंद्र कुमार त्यागी के अनुसार अरविंद सुंदरियाल, पुरुषोत्तम और यशवीर सिंह ने दिसंबर 2016 में उनके बेटे की लोक निर्माण विभाग में नौकरी लगवाने की बात कही थी। यह जानते हुए भी कि पैसे देकर नौकरी पाना गलत है, बावजूद योगेंद्र ने आरोपियों को चार लाख रुपये दे दिए। जाहिर है कि नौकरी लगनी थी नहीं, आरोपी शिकायतकर्ता त्यागी को तरह-तरह की कहानी बनाकर गुमराह करते रहे। कई बार रकम वापस मांगने के बाद आरोपियों ने बात करनी छोड़ दी। नतीजा, योगेंद्र कुमार ने शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। एक पुलिस अधिकारी कहते हैं कि यूं तो इस मामले में टीचर भी कम गुनाहगार नहीं है, जिसने गलत तरीके से नौकरी पाने के लिए सौदा किया और अब ठगा गया तो पीड़ित बनकर पुलिस के पास आ गया। खैर, कानून में पीड़ित के खिलाफ कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है, लिहाजा प्रचलित कानून के तहत आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है।
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