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नशे पर रोक के लिए अभियान चलाएगी एसटीएफ
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
प्रदेश में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोकथाम के लिए एसटीएफ पंजाब की तर्ज पर दून में नशा विरोधी अभियान चलाएगी। अभियान के तहत 26 जून से 10 जुलाई तक प्रदेश के कई हिस्सों में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दौरान छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावकों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
एसटीएफ की डीआईजी रिधिम अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर दून एसटीएफ को ही पंजाब की तर्ज पर नशा विरोधी नीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। दून एसटीएफ की टीम पंजाब की नीति और कानून का अध्ययन करके लौट चुकी है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर एसटीएफ ने काफी होमवर्क किया गया है। इसी कड़ी में अब युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिए नशा विरोधी अभियान चलाने का निर्णय किया गया है। इसके अलावा एंटी ड्रग्स सेल की अगुवाई में 26 जून से 10 जुलाई तक अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत सामाजिक संगठनाें के सहयोग से स्कूल, कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोगों में जागरुकता के बाद खपत कम होने से नशा नेटवर्क खुद ही कमजोर हो जाएगा।
नशा बेचने वाले अधिकांश नशे के आदी
एसटीएफ के सर्वे में आया है कि नशा बाजार में कोई बड़ा माफिया सक्रिय नहीं है। अधिकांश स्मैक, चरस, अफीम आदि बेचने वाले वो लोग हैं, जो पहले से ही नशे की लत का शिकार है। अपनी लत को पूरा करने को वे नशा बाजार में उतर गए हैं। इन लोगों ने ही अलग-अलग इलाकों में अपने ग्राहक बना रखे हैं।
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प्रदेश में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोकथाम के लिए एसटीएफ पंजाब की तर्ज पर दून में नशा विरोधी अभियान चलाएगी। अभियान के तहत 26 जून से 10 जुलाई तक प्रदेश के कई हिस्सों में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दौरान छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावकों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
एसटीएफ की डीआईजी रिधिम अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर दून एसटीएफ को ही पंजाब की तर्ज पर नशा विरोधी नीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। दून एसटीएफ की टीम पंजाब की नीति और कानून का अध्ययन करके लौट चुकी है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर एसटीएफ ने काफी होमवर्क किया गया है। इसी कड़ी में अब युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिए नशा विरोधी अभियान चलाने का निर्णय किया गया है। इसके अलावा एंटी ड्रग्स सेल की अगुवाई में 26 जून से 10 जुलाई तक अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत सामाजिक संगठनाें के सहयोग से स्कूल, कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोगों में जागरुकता के बाद खपत कम होने से नशा नेटवर्क खुद ही कमजोर हो जाएगा।
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नशा बेचने वाले अधिकांश नशे के आदी
एसटीएफ के सर्वे में आया है कि नशा बाजार में कोई बड़ा माफिया सक्रिय नहीं है। अधिकांश स्मैक, चरस, अफीम आदि बेचने वाले वो लोग हैं, जो पहले से ही नशे की लत का शिकार है। अपनी लत को पूरा करने को वे नशा बाजार में उतर गए हैं। इन लोगों ने ही अलग-अलग इलाकों में अपने ग्राहक बना रखे हैं।
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