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फिर ओवरलोडिंग बस बनी हादसे का कारण
Updated Wed, 29 Aug 2018 02:16 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, मुनिकीरेती/ऋषिकेश। पहाड़ में ओवरलोडिंग के कारण बस हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे। धुमाकोट में हुई बस दुर्घटना का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था, कि अब नरेंद्रनगर ब्लॉक में बस दुर्घटना ने कहीं न कहीं परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि यदि ओवरलोडिंग पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है, तो विभाग पाबंदी को लागू क्यों नहीं करवा पा रहा है। बता दें कि 22 मिनी बस में 35 सवारियां बैठाई गई थी। अब तक दुर्घटना के पीछे ओवरलोडिंग ही सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। हालांकि दुर्घटनाग्रस्त हुई बस के चालक अखिलेश सिंह का कहना है कि बस का टायर पुश्ते से गिरे पत्थर से टकराया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा।
धूमाकोट बस दुर्घटना के बाद राज्य सरकार ने सूबे की सड़कों पर वाहनों में ओवरलोडिंग रोकने का दावा किया था, जिसके लिए कुछ दिनों तक चेकिंग अभियान चलाकर चालान व वाहनों को सीज करने की रस्म अदायगी की गई और इसके बाद सरकारी कुनबा गहरी नींद सो गया। नतीजतन ओवरलोडिंग के कारण फिर से एक दुर्घटना सामने आई है। मंगलवार को दुर्घटनाग्रस्त हुई बस की एक अहम वजह स्थानीय लोग यह भी बताते हैं कि जिस स्थान पर बस खाई में लुढ़की है वहां पर मार्ग अत्यधिक संकरा है। दूसरी ओर इस स्थान पर सड़क के ऊपर की ओर लगा पुश्ता ढह रहा है, जिससे सड़क पर लगातार पत्थर गिर रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो जिस वक्त बस दुर्घटनास्थल मिंडाथ के चायपानी नामक स्थान से गुजर रही थी, पुश्ते से एक पत्थर आकर सड़क पर आ गिरा, जिस पर वाहन का टायर चढ़ गया, जिसके कारण अनियंत्रित होकर बस सड़क के दूसरी ओर बनी खाई में लुढ़क गई। उधर उपजिलाधिकारी नरेंद्रनगर लक्ष्मीराज चौहान ने स्वीकारा कि दुर्घटनाग्रस्त बस में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठी थी, प्रशासनिक मशीनरी दुर्घटना की जांच में जुट गई है।
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धूमाकोट बस दुर्घटना के बाद राज्य सरकार ने सूबे की सड़कों पर वाहनों में ओवरलोडिंग रोकने का दावा किया था, जिसके लिए कुछ दिनों तक चेकिंग अभियान चलाकर चालान व वाहनों को सीज करने की रस्म अदायगी की गई और इसके बाद सरकारी कुनबा गहरी नींद सो गया। नतीजतन ओवरलोडिंग के कारण फिर से एक दुर्घटना सामने आई है। मंगलवार को दुर्घटनाग्रस्त हुई बस की एक अहम वजह स्थानीय लोग यह भी बताते हैं कि जिस स्थान पर बस खाई में लुढ़की है वहां पर मार्ग अत्यधिक संकरा है। दूसरी ओर इस स्थान पर सड़क के ऊपर की ओर लगा पुश्ता ढह रहा है, जिससे सड़क पर लगातार पत्थर गिर रहे हैं।
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प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो जिस वक्त बस दुर्घटनास्थल मिंडाथ के चायपानी नामक स्थान से गुजर रही थी, पुश्ते से एक पत्थर आकर सड़क पर आ गिरा, जिस पर वाहन का टायर चढ़ गया, जिसके कारण अनियंत्रित होकर बस सड़क के दूसरी ओर बनी खाई में लुढ़क गई। उधर उपजिलाधिकारी नरेंद्रनगर लक्ष्मीराज चौहान ने स्वीकारा कि दुर्घटनाग्रस्त बस में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठी थी, प्रशासनिक मशीनरी दुर्घटना की जांच में जुट गई है।
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