ट्रैफिक नियम तोड़ने पर जुर्माना नहीं, पढ़ाएंगे ‘पाठ'
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यातायात नियमों का पालन नहीं करने पर चालान के बावजूद देहरादून में व्यवस्था में सुधार न होने पर पुलिस की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में पुलिस ने काठमांडू पुलिस की तर्ज पर राजधानी में भी काउंसिलिंग व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार किया है।
इसके तहत नियम तोड़ने वालों से जुर्माना नहीं वसूला जाएगा, लेकिन उन्हें पांच से छह घंटे तक पुलिस नियमों का पाठ पढ़ाएगी।
माना जा रहा है कि अभी चालान भुगतकर निकल जाने वाले लोगों के लिए दिनभर बैठे रहना असरदार सबक बन सकता है। हालांकि, पुलिस अधिकारी व्यवस्था लागू करने के बाबत अभी कानूनी विशेषज्ञों से राय भी ले रहे हैं।
ऐसे होती है काउंसिलिंग
काठमांडू में यातायात नियम तोड़ने पर पुलिसकर्मी वाहन चालक से कागजात लेकर रख लेते हैं। चालक को तय तारीख पर काउंसिलिंग के लिए बुलाया जाता है। नियम तोड़ने वालों को पुलिस अधिकारी और विशेषज्ञ पांच से छह घंटे तक नियमों का पाठ पढ़ाते हैं।
काउंसिलिंग पूरी होने के बाद ही चालक को कागजात लौटाए जाते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि काउंसिलिंग में लगने वाले वक्त की वजह से ही काठमांडू में लोग यातायात नियमों का पालन करते हैं।
आठ माह में वसूले 1.72 करोड़
जिले में सिविल, ट्रैफिक पुलिस और सिटी पेट्रोल यूनिट द्वारा यातायात में सुधार के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई है। एक अप्रैल से 31 दिसंबर 2014 तक एक करोड़ 72 लाख रुपए राजस्व के रुप में वसूले गए। इनमें से 87 लाख 13800 रुपए अकेले सिटी पेट्रोल यूनिट की कार्रवाई में आए हैं।
वापस नहीं मिलता धेला
चालान के रुप में वसूली जाने वाली रकम सरकारी खजाने में जाती है। वसूली का 30 प्रतिशत हिस्सा पुलिस के संसाधनों और जवानों के कल्याण के लिए दिए जाने का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय ने बनाया था, लेकिन यह शासन में फाइलों में दबकर रह गया। यही वजह है कि वसूली भले ही बढ़ गई, लेकिन यातायात पुलिस संसाधनों की कमी से जूझ रही है।
नियम उल्लंघन- जुर्माना राशि
हेलमेट न पहनना- 100 रुपए
ट्रिपल राइडिंग- 100
बिना लाइसेंस वाहन चलाना- 250
वाहन चलाते वक्त मोबाइल पर बात- 500
नो पार्किंग- 100
सीट बेल्ट न लगाने पर- 100
यातायात नियमों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए काउंसिलिंग का प्रस्ताव बनाया है। फिलहाल कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श चल रहा है। जल्द ही इस पर कोई फैसला होने की उम्मीद है। राजधानी में हादसों का ग्राफ हर साल बढ़ता जा रहा है, इसके लिए जरूरी है कि कठोर कदम उठाए जाएं।
- पुष्पक ज्योति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक