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Uttarakhand Lockdown: अब आफत नजर आने लगे राहत शिविर, सब्र का बांध टूटा तो भूख हड़ताल पर बैठे प्रवासी

Mon, 13 Apr 2020 01:35 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लक्सर (रुड़की)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लक्सर (रुड़की) Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 13 Apr 2020 01:35 AM IST
सार

  • टूटने लगा सब्र का बांध लॉकडाउन की अवधि बढ़ने की आहट के बीच खाने से किया इंकार
  • बीडीओ के समझाने पर भी नहीं माने, बाद में एसडीएम के आश्वासन पर माने और खाना लिया
     

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Coronavirus lockdown Uttarakhand: Other state Many People Sit on protest in haridwar
उत्तराखंड में लॉकडाउन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के रुड़की में राहत शिविरों में रहने वाले प्रवासी कामगारों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। इसी कड़ी में लॉकडाउन की अवधि बढ़ने की आहट के बीच लक्सर कस्बे के राहत शिविरों में रह रहे 50 से अधिक लोगों ने रविवार रात भूख हड़ताल कर दी। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने उन्हें घर भेजने की व्यवस्था नहीं की तो वे खाना नहीं खाएंगे। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे बीडीओ ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। बाद में एसडीएम के आश्वासन पर उन्होंने खाना खा लिया।

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लॉकडाउन के बाद प्रवासी कामगारों को पैदल ही घर लौटते देख केंद्र सरकार के आदेश पर 29 मार्च को प्रदेश की सारी सीमाएं पूरी तरह सील कर दी गई थीं। पुलिस-प्रशासन ने कस्बे से गुजर रहे बाहर के लोगों को रोककर राहत शिविरों में ठहराया था। प्रशासन ने लक्सर में चार राहत शिविर बनाए हैं, जिनमें दिल्ली, यूपी और बिहार के करीब 175 लोग ठहरे हैं। इन्हें नगर पालिका और समाजसेवी लोग भोजन दे रहे हैं।
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रविवार शाम को लक्सर के कुछ समाजसेवी युवराज पैलेस के शिविर में खाना लेकर पहुंचे तो 62 में से केवल दस लोगों ने ही खाने के पैकेट लिए। बाकी लोग खाना लेने से इंकार कर भूख हड़ताल पर बैठ गए। उनका कहना था कि जब वे लौट रहे थे तो उस समय प्रशासन ने केवल दो हफ्तों की बात कहकर शिविर में रोका था। साथ ही 14 अप्रैल के बाद घर भेजने की बात कही थी। जिस तरह से अब लॉकडाउन 30 अप्रैल तक बढ़ाने की बात सामने आ रही है, उससे लगता है कि उन्हें तब तक यहीं रहना पड़ेगा।
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सूचना मिलते ही बीडीओ चंदन लाल राही मौके पर पहुंचे और राहत शिविर में लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। बीडीओ का कहना है कि राहत शिविर में जिन लोगों को रोका गया है, उन्हें सरकार के आदेश के बाद ही घर भेजा जा सकता है।

आफत नजर आने लगे राहत शिविर

हरिद्वार में भी लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की बात सामने आने पर राहत शिविरों, होटल, धर्मशालाओं एवं आश्रमों में फंसे सैकड़ों आमजन का सब्र जवाब देने लगा है। इन लोगों को अब राहत शिविर आफत लगने लगे हैं। वे या तो पुलिसकर्मियों से उलझ रहे हैं या फिर उन स्थानों के प्रबंधकों व कर्मचारियों से तू-तू मैं-मैं कर रहे हैं, जहां उन्हें ठहराया गया है।

धर्मनगरी में राहत शिविरों में मौजूदा समय में करीब 262 कामगार हैं। उनकी देखभाल में हरिद्वार पुलिस जुटी है। होटल, धर्मशाला में भी करीब साढ़े सात सौ यात्री फंसे हुए हैं। अब जब यह बात सामने आ रही है कि लॉकडाउन का समय बढ़ रहा है तो वे लोग झल्ला उठे हैं। वह आश्रम, होटल एवं धर्मशालाओं के प्रबंधकों व कर्मचारियों से उलझ रहे हैं।

उनका कहना है कि उन्हें रोकने का कोई औचित्य नहीं है। वे लोग न तो बीमार हैं न ही उन्हें कोई दूसरी दिक्कत है। अब उनके पैसे भी खत्म हो चुके हैं। अब उन्हें वापस लौटना है। उनका कहना है कि 14 अप्रैल के बाद उन्हें उनके घर वापस भेजने का इंतजाम सरकार को करना चाहिए।

कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह कोश्यारी बताते हैं कि रोजाना विवाद सामने आ रहे हैं। पुलिस उनकी मनोदशा को समझकर दिलासा दिला रही है। उन्हें भेजने की बात उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है।

राहत शिविर में रुके लोगों ने बाद में समझाने पर खाना ले लिया है। शिविर में रुके लोगों को सभी प्रकार की जरूरी व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। आज सुबह उनसे फिर बातचीत की जाएगी। इसके बाद भी वे घर जाने की जिद पकड़ते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-पूरण सिंह राणा, एसडीएम

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