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कोरोना वायरस: समय पर आईसीयू और उपचार मिले तो नहीं पड़ेगी वेंटिलेटर की जरूरत

Wed, 05 May 2021 02:30 AM IST
अलका त्यागी मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 05 May 2021 02:30 AM IST
सार

सुविधाओं के अभाव में कई मरीज गंभीर अवस्था में अस्पतालों में पहुंच रहे हैं और बमुश्किल उन्हें ऑक्सीजन या आईसीयू उपलब्ध हो पा रहे हैं। जिन्हें यह सुविधा मिल पा रही है तो देरी होने के कारण उनकी स्थिति बिगड़ जाती है। हालत यह हो रही है कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है।

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Coronavirus in Uttarakhand: Ventilators will not be needed if ICU and treatment are received on time
वेंटिलेटर - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों को अगर सही समय पर आईसीयू और उपचार की सुविधा मिल जाए तो उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत ज्यादातर मामलों में नहीं पड़ रही है। हालांकि, सुविधाओं के अभाव में कई मरीज गंभीर अवस्था में अस्पतालों में पहुंच रहे हैं और बमुश्किल उन्हें ऑक्सीजन या आईसीयू उपलब्ध हो पा रहे हैं। जिन्हें यह सुविधा मिल पा रही है तो देरी होने के कारण उनकी स्थिति बिगड़ जाती है। हालत यह हो रही है कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है।

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शहर के विभिन्न सरकारी और निजी सभी छोटे-बड़े अस्पतालों में कमोबेश यही स्थिति है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बात करें तो यहां पर कोरोना मरीजों के लिए 96 और बच्चों के लिए आठ आईसीयू बेड उपलब्ध हैं। अस्पताल में वेंटिलेटर भी उपलब्ध हैं, जिन्हें मरीजों को जरूरत पड़ने पर लगाया जाता है। 
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डॉक्टरों की कोशिश रहती है कि पहले सामान्य और फिर बाईपैप यानि छोटी वेंटिलेटर मशीन से मरीज को ऑक्सीजन दे दी जाए, लेकिन स्थिति गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर का सपोर्ट देना पड़ता है। छोटी मशीन से ऑक्सीजन देने पर 70 से 80 फीसदी मरीज ठीक होकर लौटे हैं, लेकिन वेंटिलेटर पर जाने के बाद स्वस्थ होने की संभावना कम ही दिख रही है।


मरीज की उम्र और रोग की गंभीरता पर भी स्वस्थ होने का परिणाम निर्भर करता है। अगर सही समय पर मरीज को अस्पताल में आईसीयू बेड मिल जाए तो ऑक्सीजन सामान्य मशीनों से लेकर मरीज की जान बचाई जा सकती है। आईसीयू में देरी से पहुंचने पर गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर में रखना पड़ता है। विश्व स्तर पर भी देखें तो वेंटिलेटर में जाने के बाद मरीजों के रिकवरी करने का प्रतिशत बहुत कम है।  
- डॉ. अतुल कुमार, एनेस्थेटिस्ट एवं आईसीयू के इंचार्ज, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल

अस्पताल अपनी क्षमताओं के अनुसार मरीजों को उपचार देने और उन्हें स्वस्थ करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। कोरोना में मरीजों के फेफड़ों में सीधे संक्रमण और दिक्कत आ रही है। ऐसे में अगर सही समय पर आईसीयू और उपचार मिल सके तो गंभीर मरीजों को भी दो-तीन दिन की मेहनत के बाद पहले से कम गंभीर स्थिति में लाया जा सकता है। कई बार बेड न होने की स्थिति में मरीज और उनके तीमारदारों को दूसरे अस्पतालों में आईसीयू या ऑक्सीजन बेड वाले बेड के लिए प्रयास करने का अनुरोध किया जाता है। ताकि सही समय पर मरीज को सही इलाज मिल सके और वह स्वस्थ होकर घर लौट सकें।
 - डॉ. केसी पंत, चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ फिजीशियन, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल

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