फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Coronavirus in uttarakhand latest news today: Plasma therapy Start in Himalayan hospital for infected people treatment

Corona in Uttarakhand: संक्रमितों को ले जाने वाले वाहन का सामान जला रहे थे स्वास्थ्य कर्मी, एसडीएम ने दिए जांच के आदेश

Wed, 09 Sep 2020 01:22 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 09 Sep 2020 01:22 PM IST
सार

  • थेरेपी शुरू करने वाला राज्य का पहला गैर सरकारी अस्पताल बना

विज्ञापन
Coronavirus in uttarakhand latest news today: Plasma therapy Start in Himalayan hospital for infected people treatment
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड के पौड़ी जिल के श्रीनगर में मंगलवार देर रात स्वास्थ्य कर्मी कोविड संक्रमितों को ले जाने वाले वाहन का सामान जला रहे थे। तभी एक युवक ने उनकी वीडियो बना ली। इस वीडियो के बारे में एसडीएम दीपेंद्र नेगी का कहना है कि चिकित्सा अधीक्षक को मामले की जांच करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

विज्ञापन


हिमालयन अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी से होगा संक्रमित मरीजों का इलाज

हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में अब प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना के मरीजों का उपचार किया जाएगा। हिमालयन अस्पताल इस थेरेपी को शुरू करने वाला राज्य का पहला गैर सरकारी अस्पताल है। कोविड संक्रमण से ठीक हो चुके लोग ही प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं। 
विज्ञापन


स्वामीराम हिमालयन विवि के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि हिमालयन अस्पताल में सामान्य रोगियों से बिल्कुल अलग दूसरी बिल्डिंग में कोविड रोगियों के उपचार की व्यवस्था की गई है। कहा कि सरकार से प्लाज्मा थेरेपी के जरिए कोविड रोगियों के उपचार की मंजूरी मिल गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन



कहा कि प्लाज्मा थेरेपी को एक रेस्क्यू ट्रीटमेंट के तौर पर देखा जा रहा है। हिमालयन अस्पताल प्रशासन काफी समय से इस थेरेपी को शुरू करने की कवायद कर रहा था। अब इसकी सभी औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं।

ये कर सकते हैं प्लाज्मा डोनेट

कोविड-19 संक्रमण से उबर चुके लोग प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं। उनके शरीर में इस संक्रमण को बेअसर करने की प्रतिरोधी एंटीबॉडीज विकसित हो जाती हैं। इस एंटीबॉडीज की मदद से दूसरे कोविड मरीज के रक्त में मौजूद वायरस को खत्म किया जा सकता है। डोनर की आयु 18 से 60 और वजन 50 किलोग्राम होना चाहिए।

यह है प्लाज्मा थेरेपी
डोनर से सहमति मिलने के बाद ऐफेरेसिस तकनीक से खून निकाला जाता है। खून से केवल प्लाज्मा को निकालकर खून को फिर से डोनर के शरीर में वापस डाल दिया जाता है। डोनर महीने में दो बार प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। इस पूरी प्रक्रिया से कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि प्लाज्मा डोनेट करने से कमजोरी नहीं आती। यह रक्तदान की तरह ही है। इसलिए कोरोना से ठीक हो चुके लोग प्लाज्मा डोनेट करने से घबराएं नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed