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कोरोना काल : अमर उजाला से खास बातचीत में उत्तराखंड के सीएम ने बताया अर्थव्यवस्था को सुधारने का मास्टर प्लान

Sat, 23 May 2020 08:14 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 23 May 2020 08:14 PM IST
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coronavirus in uttarakhand latest news : today evening chief minister trivendra singh rawat will talk with amar ujala
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : File Photo

कोरोना काल में उत्तराखंड सरकार द्वारा इसके बचाव और संक्रमण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज अमर उजाला से खास बातचीत में दी। आज शाम छह बजे वह अमर उजाला देहरादून के फेसबुक पेज पर लाइव जुड़े। 

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इस लिंक पर क्लिक कर आप लाइव विडियो देख सकते हैं... https://www.facebook.com/AuNewsDehradun/videos/488588071856276/

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कोरोना काल में उत्तराखंड की मौजूदा स्थिति पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय राज्य में कुल केस 173 केस आए हैं, जिनमें से 56 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं। पिछले कई दिनों से देश के विभिन्न जिलों से उत्तराखंडी राज्य में आए हैं। जिससे हमारे राज्य में संक्रमितों की संख्या बढ़ी है। लेकिन ये अच्छी बात है कि राज्य में किसी भी मरीज को आईसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ी है। 
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कहा कि गुरुग्राम, हरियाणा, हिमाचल, पंजाब और राजस्थान से लोग अभी आने बाकी हैं। गुजरात से लगभग सभी उत्तराखंडी वापस आ गए हैं। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए हम लगातार रेंडम सैंपलिंग कर रहे हैं। क्वारंटीन की राज्य में अच्छी व्यवस्था की गई है। हमारी कोशिश है कि जो भी लोग बाहर से आते हैं उन्हें हम क्वारंटीन में रखें। और रेड जोन से राज्य में आने वाले लोगों को संस्थागत क्वारंटीन में रखें।

पिछले तीन चार दिनों से उत्तराखंड में औसतन रोजाना हजार के आसपास टेस्टिंग कर रहे हैं। पहले 600 के आसपास तक कर रहे थे। बाहर से आने लोगों की संख्या देखते हुए हमने टेस्टिंग बढ़ाई है। हमने भारत सरकार से दो लैब की और डिमांड की है। आईआईपी देहरादून में स्वीकृत टेस्टिंग लैब को हम अभी शुरू नहीं कर पाए हैं। राज्य में अभी चार सरकारी और निजी टेस्टिंग लैब संचालित है।
 

अभी तक चार हजार करोड़ से अधिक का नुकसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन से राज्य को अभी तक चार हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। भरपाई के लिए तमाम तरह की योजनाएं लागू की गई हैं। जिसमें कृषि, सर्विस सेक्टर और मेन्युफैक्चरिंग सेंटर शामिल किए गए हैं। कुछ फैसले अभी किए गए हैं और कुछ हमने पहले से ही तय कर रखे थे।

जिसमें लोकल ब्रांड डेवलपमेंट के बारे में सोचा गया था कि उन्हेंं प्रमोट किया जाए। उसके तहत हमने रूरल ग्रोथ सेंटर शुरू किए गए हैं। जिसमें 88 सेंटरों में काम शुरू हो गया है और इन्हें हम बढ़ा रहे हैं। ये सब ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इस साल हम कुछ योजनाएं और लेकर आए हैं। जिसमें मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना, मुख्यमंत्री रोजगार योजना में मेन्युफैक्चरिंग में 25 लाख रुपए और सर्विस सेक्टर में हमने दस लाख रुपए तक के ऋण की व्यवस्था की है। इसमें जो ए श्रेणी है उसमें 25 प्रतिशत और बी में 20 प्रतिशत और सी व डी में 15 प्रतिशत सब्सिडी की व्यवस्था की गई है।

हमने मेन्युफेक्चरिंग और फूड प्रॉसेसिंग सेंटर को काफी बढ़ाया है। पहले से चल रही पं. दीन दयाल उपाध्याय कृषि सहकारिता योजना में शून्य प्रतिशत इंटरेस्ट पर एकल किसान और सामूहिक कृषि के लिए पांच लाख तक का ऋण एक महीना ब्याज पर हम दे रहे हैं। गरीब तबके के लोगों के लिए हम कुछ निशुल्क सुविधाओं की व्यवस्था कर रहे हैं। इनके लिए गांव में होने वाले छोटे काम और योजनाओं पर हम अभी काम कर रहे हैं।

इसी तरह पर्यटन के क्षेत्र में भी हम बाइक टैक्सी पर हम विचार कर रहे हैं। हम उन सारी योजनाओं पर विचार कर रहे हैं, जिससे हमारी अर्थ व्यवस्था को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई कर सकें। इस पर चिंतन के लिए दो कमेटी बनाई हैं। हमने सभी विभागों को कहा कि वह यह सोचें की रोजगार कैसे उत्पन्न किया जाए। भारत सरकार ने तमाम पैकेज भी दिए हैं। वो भी बहुत बड़ा पैकेज है। जिससे राज्य सरकार को बड़ी मदद मिली है। 
 

दो लाख के करीब प्रवासी राज्य में आए

दो लाख के करीब प्रवासी राज्य में आ चुके हैं और अभी और आने हैं। ये संख्या बहुत अधिक है। हमने अभी दो दिन पहले ही चकबंदी का फैसला लिया है। हमने तय किया है कि जो हमारी ये भूमि है वह ऑर्गेनिक कहलाए। प्रधानमंत्री ने भी कहा कि उत्तराखंड को ऑर्गेनिक स्टेट बनाया जाए और हम इस पर काम कर रहे हैं। मछलियों का क्लस्टर हमने तैयार किया है। सुगंधित गुलाब के कई क्लस्टर तैयार किए गए हैं। मेमेस्क रोज के तेल की कीमत आठ से 12 लाख रुपए किलो है। इसके लिए भी क्लस्टर तैयार किए गए हैं। जिनमें काम शुरू हो गया है।

ये सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान 'लोकल के लिए वोकल होना है' का ही आधार है। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों के लिए दो सौ मेगावाट से अधिक के सोलर प्लांट के लगाने की योजना है। चीड़ के पेड़ से बिजली बनाने के लिए भी हमने 50 से 60 प्रोजेक्ट अवार्ड किए हैं। लीसा के लिए भी हमारा एक प्रोजेक्ट चल रहा है। इसके अलावा 2018 में राज्य में इनवेस्टर समिट हुआ था, जिसमें चालिस हजार करोड़ रुपए के एमओयू पर्वतीय क्षेत्रों के लिए हुए। उत्तराखंड राज्य का भविष्य पर्यटन से ही है। इससे हम लोगों को रोजगार भी दे सकते हैं और उत्तर भारत के एक बेस्ट डेस्टिनेशन उत्तराखंड बन सकता है। एडवेंचर टूरिज्म पर भी हमने अलग से डिपार्टमेंट बनाया है। 

'थर्टीन डिस्ट्रिक्स थर्टीन न्यू डेस्टिनेशन' पर हम काम कर रहे हैं। वॉटर स्पोट्र्स पर भी काम चल रहा है। टिहरी झील पर 12 सौ करोड़ रुपए सेंशन भी हो गए हैं। हर तरह का पर्यटक यहां आ सके इस पर हम काम कर रहे हैं। गुजरात में लगभग सभी लोग आ चुके हैं। मुंबई, पुणे से ट्रेन आई है। त्रिवेंद्रम से भी ट्रेन चलने वाली है। बंगलुरु से हमारी ट्रेन आ गई है। अहमदाबाद, राजस्थान से लगभग सभी जगह से हम उत्तराखंडियों को ला रहे हैं। 

बाहर से आने वाले प्रवासियों को हम घरों तक पहुंचाते हैं। उनकी स्क्रीनिंग की जाती है। उन्हें समझाया जाता है कि उन्हें कैसे रहना है। हर गांव में आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक, दूसरे विभागीय कर्मचारियों को प्रवासियों के क्वारंटीन की देखरेख के लिए तैनात किया गया है।

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