फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   coronavirus in uttarakhand latest news :maun mela will not organised this year

Coronavirus in Uttarakhand : इस बार नहीं लगेगा मौण मेला, 1866 से होता आ रहा है मेले का आयोजन

Wed, 24 Jun 2020 04:31 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 24 Jun 2020 04:31 PM IST
विज्ञापन
coronavirus in uttarakhand latest news :maun mela will not organised this year
maun mela - फोटो : फाइल फोटो

मसूरी के पास जौनपुर में हर साल होने वाला ऐतिहासिक मौण मेला इस साल कोरोना की वजह से नहीं होगा। मौण मेला समिति ने यह फैसला लिया है। जौनपुर में यह मेला वर्ष 1866 से आयोजित होता आ रहा है।

विज्ञापन


मौण मेले में क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के साथ ही देश-विदेश से लोग आकर शामिल होते हैं। लोग नदी में मछलियों को पकड़ने के लिए उतरते हैं। मंगलवार को मौण मेला समिति की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि मेले के आयोजन में सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन होना मुश्किल है। लिहाजा इस साल मेला आयोजित नहीं किया जाएगा। 
विज्ञापन


चारों ओर होता है उल्लास 

तेज बारिश में ही हजारों लोग अपने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और औजारों के साथ अगलाड़ नदी में मछलियां पकड़ते हैं। यह दृश्य मनमोहक होता है। मेले से पहले यहां अगलाड़ नदी में टिमरू के छाल से निर्मित पाउडर डाला जाता है। इससे मछलियां कुछ देर के लिए बेहोश हो जाती हैं। इसके बाद उन्हें पकड़ा जाता है। इस दौरान ग्रामीण मछलियों को अपने कुण्डियाड़ा, फटियाड़ा, जाल तथा हाथों से पकड़ते हैं, जो मछलियां पकड़ में नहीं आ पाती हैं, वह बाद में ताजे पानी में फिर जीवित हो जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्थानीय ग्रामीण सूरत सिंह रावत ने बताया की इस ऐतिहासिक त्योहार में टिमरू का पाउडर डालने की बारी हर साल का जिम्मा सिलवाड़, लालूर, अठज्यूला और छैजूला पट्टियों का होता है। इसमें हर साल यह काम लालूर पट्ट के देवन, घंसी, सड़कसारी, मिरियागांव, छानी, टिकरी, ढ़करोल और सल्टवाड़ी गाव करते थे। जहां के ग्रामीण पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ पाउडर लेकर अगलाड़ नदी के पटाल तोक के मौण कोट से डाला गया। देखते ही देखते नहीं के तीन किमी क्षेत्र में हजारों की संख्या में ग्रामीण पारंपरिक उपकरणों से मछलियां पकड़ने लगे।  


यह है ऐतिहासिक महत्व

मौण मेले का शुभारंभ 1866 में तत्कालीन टिहरी नरेश ने किया था। तब से जौनपुर में निरंतर मेले का आयोजन किया जाता है। क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि इसमें टिहरी नरेश स्वयं अपने लाव लश्कर एवं रानियों के साथ मौजूद रहते थे। मौण मेले में सुरक्षा की दृष्टि से राजा के प्रतिनिधि उपस्थित रहते थे। सामंतशाही के पतन के बाद सुरक्षा का जिम्मा ग्रामीण स्वयं उठाते हैं और किसी भी प्रकार का विवाद होने पर क्षेत्र के लोग स्वयं मिलकर मामले को सुलझाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed