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उत्तराखंड मे कोरोना : शुरुआती दौर में स्टेरॉयड का इस्तेमाल है घातक, शरीर में ला सकता है कई बदलाव

Sat, 08 May 2021 12:36 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 08 May 2021 12:36 PM IST
सार

यह कोरोना संक्रमण बढ़ाने के साथ ही शरीर में कई अन्य तरह के बदलाव ला सकता है। शुरुआती दौर में इन दवाओं का सेवन नहीं किया जाना चाहिए।

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coronavirus in uttarakhand latest news : in starting infection steroid is dangerous
शुरुआती दौर में स्टेरॉयड की दवाओं का सेवन नहीं किया जाना चाहिए - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

कोरोना में कुछ लोग डॉक्टर की बिना सलाह के ही शुरुआती संक्रमण होने में ही स्टेरॉयड की दवाओं का इस्तेमाल शुरू कर दे रहे हैं। यह कोरोना संक्रमण बढ़ाने के साथ ही शरीर में कई अन्य तरह के बदलाव ला सकता है। शुरुआती दौर में इन दवाओं का सेवन नहीं किया जाना चाहिए।

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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कोरोना के नोडल अफसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कोरोना संक्रमण के शुरूआती 4-5 दिन तक मरीज को हल्की एंटीबायोटिक दवा दी जाती है। शुरुआत में स्टेरॉयड दिया जाना खतरनाक साबित हो सकता है। 5-6 दिन बाद भी अगर बुखार न उतरे और फेफड़ों में इंफ़ेक्शन ठीक न हो, सांस फूल रही हो तब स्टेरॉयड देना बहुत सही है।
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टर्नर रोड स्थित वेलमेड अस्पताल के वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक वर्मा ने बताया कि शुरुआत में स्टेरॉयड देने से शरीर की इम्यूनिटी डाउन होती है। स्टेरॉयड इम्यूनिटी घटाने और अन्य बीमारियों को बढ़ा सकता है। इससे दूसरे बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकते हैं। साथ ही वायरस जल्दी मल्टीफिकेशन करता है। सेकंड वीक तक अगर इंफेक्शन नहीं उतर रहा है तो डॉक्टर की सलाह पर ही स्टेरॉयड दिया जाना चाहिए।

सीटी स्कैन से नहीं खतरा लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के न कराएं जांच 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया के कोरोना संक्रमण काल में सीटी स्कैन कराने को लेकर दिए गए बयान के बाद उसके नुकसान और फायदे के बारे में व्यापक स्तर पर बहस छिड़ी हुई है। अमर उजाला ने भी इस संबंध में देहरादून के कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों और सीटी स्कैन से जुड़े विशेषज्ञों से बातचीत की। इसे लेकर डॉक्टरों के अपने-अपने तर्क हैं।

कोरोना काल में सीटी स्कैन कराने का चलन बढ़ा है। कोरोना के लक्षण हैं या इसके बिना भी सामान्य दवाई दी जा सकती है। एक्स-रे से भी कोरोना काफी कुछ ट्रेस हो जाता है। युवा वर्ग को तो इससे बचना चाहिए। एक बार का सीटी स्कैन 300 एक्स-रे के बराबर है। रेडिएशन से कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। चार-चार बार तक लोग सीटी कर रहे हैं। उसमें कोई खास मदद नहीं मिलती कि क्या दवा दी जानी चाहिए। हल्की स्टेज या ठीक होती स्टेज में थोड़ा बहुत धब्बे दिख जाते हैं। इससे भी लोग अनावश्यक परेशान होते हैं। जबकि बीमारी ठीक हो रही होती है। अगर लंबे समय तक बुखार नहीं उतर रहा है या बीमारी ठीक नहीं हो रही है तो डॉक्टर की सलाह पर सीटी स्कैन कराना चाहिए।
- डॉ अनुराग अग्रवाल वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल

सिटी स्कैन आजकल खतरनाक नहीं है। इस आपदा को देखते हुए बीमारी ज्यादा खतरनाक है सीटी स्कैन नहीं। जब आपदा नहीं थी तब मसला दूसरा था। आजकल के सीटी स्कैन बहुत एडवांस हो गए हैं। इनमें रेडिएशन भी बहुत कम है और पूरे शरीर का सीटी स्कैन लगभग 30 सेकंड में पूरा हो जाता है। एडवांस सीटी स्कैन में डोजीमीटर लगा होता है। जिससे यह पता चल जाता है कि आप के मरीज को कितना रेडिएशन दिया गया। मेडिकल साइंस के ज्यादातर क्षेत्रों में सीटी स्कैन बहुत जरूरी है। यह मेडिकल साइंस की आंख है। बस इतना जरूर है कि डॉक्टर की सलाह पर ही सीटी स्कैन कराना चाहिए।
- डॉ. यतेंद्र सिंह, वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट, मसूरी उप जिला चिकित्सालय

आज की तारीख में तो कई लोगों में अरटीपीसीर जांच में भी कोरोना निगेटिव आ रहा है। संक्रमण का सटीक पता सीटी स्कैन से ही लग रहा है। आजकल के सीटी स्कैन इतने एडवांस आ गए हैं कि उनमें बहुत ज्यादा डोज नहीं लगता। साथ ही बहुत कम समय में सीटी स्कैन की जांच हो जाती है। पुराने जमाने के सीटी स्कैन मशीन में आधा-आधा घंटे तक जांच में लग जाता था जो कि रेडिएशन ज्यादा होने की वजह से भी खतरनाक माना जाता था। इतना जरूर है कि बिना डॉक्टर की सलाह के या सिर्फ बुखार आने पर ही सीटी स्कैन करा लिया जाए यह प्रवृति ठीक नहीं है।
- डॉ. मुकेश सुंद्रियाल वरिष्ठ फिजीशियन, प्रेमनगर उप जिला चिकित्सालय

इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन ने भी इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि नए जमाने की सीटी स्कैन मशीनों से रेडिएशन का बहुत ज्यादा खतरा नहीं होता। न ही इससे कैंसर होने का जोखिम रहता है। आजकल की सीटी स्कैन मशीन इतनी एडवांस है कि वह बहुत कम डोज में और बहुत कम समय में पूरे शरीर की जांच कर लेते हैं। ऐसे में लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है कोरोना संक्रमण में तो यह अहम साबित हो रहा है। हालांकि लोगों से अपील है कि बिना डॉक्टर की सलाह और बार-बार सीटी कराने से बचें।
- महेंद्र सिंह भंडारी रेडियोलॉजी विभाग के प्रभारी तकनीशियन, राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल

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