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उत्तराखंड में कोरोना : इमरजेंसी नहीं तो सामान्य ऑपरेशन को टालना बेहतर, बढ़ जाता है संक्रमित होने का खतरा
Sun, 23 May 2021 10:01 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
जितेंद्र जोशी, अमर उजाला, ऋषिकेश
जितेंद्र जोशी, अमर उजाला, ऋषिकेश
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 23 May 2021 10:01 AM IST
सार
कोविड की दूसरी लहर में संक्रमण के गंभीर रूप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इलेक्टिव ऑपरेशन को चिकित्सक की सलाह पर तीन से चार हफ्तों तक टाला जा सकता है।
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सुरक्षा के मद्देनजर इलेक्टिव (सामान्य) ऑपरेशन बंद
- फोटो : istock
विस्तार
प्रदेश के मैदानी जिलों में कोरोना संक्रमण की दर घट रही है, लेकिन गंभीर संक्रमितों के मामले कम नहीं हो रहे हैं। अस्पतालों के कोविड वार्डों में रोजाना बड़ी संख्या में गंभीर मरीज भर्ती हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों ने मरीजों की संक्रमण से सुरक्षा के मद्देनजर इलेक्टिव (सामान्य) ऑपरेशन बंद कर दिए हैं। हालांकि इमरजेंसी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। ऐसे में अगर इमरजेंसी नहीं है तो चिकित्सक की सलाह के अनुसार ऑपरेशन के लिए इंतजार करना ही बेहतर है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. बीके बस्तिया का कहना है कि कोविड की दूसरी लहर में संक्रमण के गंभीर रूप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इलेक्टिव ऑपरेशन को चिकित्सक की सलाह पर तीन से चार हफ्तों तक टाला जा सकता है।
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डॉ. बीके बस्तिया का कहना है कि ऑपरेशन के बाद मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। रोग प्रतिरोध क्षमता कम होने से कोरोना संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में इस समय केवल इमरजेंसी (लाइफ सेविंग) ऑपरेशन को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि कोरोना संक्रमितों को भी समुचित इलाज मिल सके। डॉ. बस्तिया का कहना है कि चिकित्सकों की सलाह पर सामान्य ऑपरेशन वाले मरीजों को जरूरी दवाएं लेते रहना चाहिए।
ऑपरेशन से कैसे प्रभावित होती है प्रतिरोधक क्षमता
विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रतिरोधक क्षमता शरीर के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है। ये हमें बैक्टिरियां, वायरस और माइक्रोब्स के संक्रमण बचाती है। ऑपरेशन के दौरान शरीर पर चीरा लगाया जाता है। इस दौरान अंदरूनी अंग भी हवा के संपर्क में आते हैं। मरीज की रिकवरी के दौरान उसकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
इमरजेंसी सर्जरी के बाद ऐसे बढ़ाएं प्रतिरोधक क्षमता
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सिट्रस फल जैसे नींबू, संतरा, अंगूर खाना चाहिए। रिकवरी में ब्रोकली भी फायदेमंद है। इसमें विटामिन सी, ई और ए की भरपूर मात्रा पाई जाती है। जो लोग लंबी बीमारी या ऑपरेशन के बाद इम्युनिटी बढ़ाना चाहते हैं वे तुलसी का सेवन कर सकते हैं। तुलसी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। अगर आपके शरीर में ऑपरेशन के दौरान चीरा या घाव है तो उसे भरने में हल्दी मदद करेगी। रात को सोने से पहले गरम दूध में हल्दी मिलाकर पीएं, आपको फायदा होगा।