Coronavirus in Uttarakhand : होटल इंडस्ट्री लाचार, पर्यटकों का इंतजार
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देहरादून के मधुबन समेत मसूरी के कई होटलों में इस समय बमुश्किल कमरे मिलते थे। बाहर से आने वाले लोग कई दिन पहले यहां कमरे और कांफ्रेंस आदि के लिए हॉल बुक कर लेते थे। लेकिन, इस समय सब होटल खाली और बंद हैं। होटल मधुबन में करीब डेढ़ सौ कर्मचारी काम करते थे, लेकिन कोविड-19 के प्रकोप ने सब कुछ बदल दिया। आज यहां सुरक्षाकर्मी के अलावा कोई कर्मचारी नहीं है। यह स्थिति कब तक बनी रहेगी। फिलहाल कोई कहने की स्थिति में नहीं हैं।
होटल खोलने और पर्यटकों के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने जो नियम-कानून तय किए हैं, उससे पर्यटक इच्छा के बाद भी नहीं आ पाएंगे। होटल व्यवसाय चौपट है। लेकिन, बिजली, पानी, टैक्स, कर्मचारियों के वेतन, मरम्मत आदि पर मालिकों और संचालकों को हर माह लाखों खर्च करने पड़े रहे हैं। दून नगर निगम क्षेत्र में तो अभी तक होटलों को खोलने की अनुमति तक नहीं है।
मसूरी में करीब 300 छोटे-बड़े होटल हैं, लेकिन सख्त दिशानिर्देशों के कारण मसूरी में भी होटल संचालकों ने अपने होटल खोलने से इनकार कर दिया है। छोटे होटल, गेस्ट हाउस का भी यही हाल है। तीन जुलाई से इस व्यवसाय पर पटरी पर लाने के लिए कुछ कदम उठाए जाने की चर्चा है, लेकिन होटल संचालकों को उम्मीद नहीं है कि यह व्यवसाय फिलहाल पटरी पर उतर पाएगा। ऐसे में कुछ राहत के लिए इन व्यवसायियों की नजर सरकार की मेहरबानी पर टिकी है।
कोरोना के कारण व्यवसाय पूरी तरह ठप है। आने वाले कुछ समय में भी ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है कि यह व्यवसाय पहली की तरह पटरी पर लौट पाएगा। कर्मचारी भी लौटने को फिलहाल तैयार नहीं है। वेतन देना उनकी मजबूरी है। कमाई कुछ हो नहीं रही है। लेकिन बिजली, पानी, टैक्स, लोन, मरम्मत के लिए हर माह पैसा खर्च हो रहा है। ऐसे में सरकार से उम्मीद है कि वह इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए कुछ करें।
- मनु कोचर, संचालक होटल मधुबन, महामंत्री होटल, रेस्टोरेंट एसोसिएशन उत्तराखंड
कोरोना से प्रदेशभर की होटल इंडस्ट्री को पांच सौ करोड़ की चपत लगी है। इस व्यवसाय के ठप होने से अन्य व्यवसाय जैसे ऑटो, रेस्टोरेंट, बाजार आदि भी प्रभावित हुआ है। जिस तरह से केंद्र ने होटलों और पर्यटकों के लिए प्रावधान किए हैं, उससे लगाता नहीं कि आगे भी कोई इसमें उछाल आना वाला है। सरकार बिजली के फिक्सड चार्ज को तीन और महीने माफ करें। इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को ऋण मुहैया कराए।
- संदीप साहनी, अध्यक्ष होटल, रेस्टोरेंट एसोसिएशन उत्तराखंड
इस व्यवसाय से जुड़े लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। प्रतिबंधों के कारण बाहर का पर्यटक आने को तैयार नहीं है। इसलिए अधिकतर होटल संचालकों ने अपने होटलों पर ताला लगा रखा है। अगर कोई खोलता भी है तो वह न तो शहर के हित में है और टूरिस्ट हित में। पर्यटन सीजन अब खत्म हो चुका है। इसलिए प्रदेश सरकार को चाहिए कि फिलहाल जो बिजली, पानी, टैक्स आदि में उन्हें राहत दी जा रही है, उसे अगले तीन महीने के लिए बढ़ा दी जाए।
- संजय अग्रवाल, अध्यक्ष मसूरी होटल एवं रेस्टोरेंट ऐसोसिएशन
करीब पांच सौ करोड़ की लगी चपत
कोरोना संक्रमण के चलते लागू किए गए लॉकडाउन ने धर्मनगरी हरिद्वार के होटल व्यवसाय की रीढ़ तोड़ कर रख दी है। पिछले करीब तीनमहीने में होटल इंडस्ट्री को करीब 500 करोड रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में होटल मालिकों के साथ-साथ कर्मचारियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। होटल व्यवसाई और कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता के भंवर में फंसे हुए हैं।
कोरोना के संक्रमण के चलते विगत 24 मार्च से लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। तबसे सभी होटलों पर ताला लगा हुआ है। हरिद्वार में छोटे बड़े होटल और लॉजिंगहाउसों की संख्या करीब 1200 है इन सभी में कारोबार पूरी तरह ठप है। औसतन सभी होटलों में काम करने वाले करीब दस हजार से ज्यादा कम्रचारी भी पूरी तरह बेरोजगार हो चुके हैं। तीन महीनेसे लागू प्रतिबंध सरकार ने सीमित संशोधनों के साथ हटाए भी हैं लेकिन इससे कारोबार में कोई सुधार नहीं पड़ा है।
क्योंकि सरकार ने जो व्यवस्था दी है उसके हिसाब से होटलों में आने वाले यात्रियों को कम से कम सात दिन तक होअल में क्वारंटाइन होकर रहना पड़ेगा। इससे कोई भी यात्री होटलों में नहीं आ रहा है। होटल मालिकों को सरकार से शिकायत है कि कारोबार पूरी तरह बंदहोने के बावजूद बिजली के बिल पानी और अन्य टैक्स में कोई छूट नहीं दी गईहै। व्यापारी तो राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार की ओर से करोंमें भी छूट न दिया जाना चिंता का विषय हैं।
कर्जलेकर शुरू किया व्यवसाय सब कुछ हो गया धड़ाम
धर्मनगरी में होटल व्यवसाय केभरोसे ही एक नया कारोबार भी चलता है, जिसके तहत होटल लीज पर लेकर उसे चलायाजाता है। करीब 300 से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो हरिद्वार के 80 प्रतिशत से ज्यादा से होटल और लॉजिंग हाउसों को लीज पर लेकर उनका संचालन करते हैं। इसके तहत होटल मालिकों कोनिश्चित एग्रीमेंट के तहत तय की गई धनराशि उपलब्ध करा दी जाती है इसके बादसारी जिम्मेदारी होटल लीज पर लेने वाले की होती है।
कुंभ के आकर्षण में बन गए कई नए होटल
बारह साल बाद आने वाला कुंभ हरिद्वार में कारोबार की दृष्टि से भी बड़ा आकर्षण लेकर आता है। इस बार भी वर्ष 2021 में होने वाले कुंभ मेले को लेकर काफी आकर्षण बना रहा। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हरिद्वार में करीब छोटे बड़े 20 नए होटलों का निर्माण चल रहा है।
इन सभी के संचालकों को यह उम्मीद थी कि कुंभ के सीजन के दौरान होटल का पैसा तो पूरा हो ही जाएगा साथ ही कारोबार भी खूब चलेगा, लेकिन कोरोना के बाद अब पहले चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा बंद करने के बाद कुंभ पर भी उठ रहे सवालों ने हालात बदल दिए हैं।
लॉकडाउन में होटल व्यवसाय पर बहुत भारी पड़ रहा है। कारोबार करना तो दूर अपने कर्मचारियों के परिवारों काभरण पोषण करना भी मुश्किल हो रहा है। सरकार को होटल मालिकों और कर्मचारियोंके लिए राहत पैकेज घोषित करना चाहिए। सात दिन के क्वारंटाइन की बाध्यता समाप्त कर देने चाहिए।
- आशुतोष शर्मा, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन, हरिद्वार
कोरोना ऐसे समय पर आया जब यात्रा सीजन शुरु होने वाला था। होटल मालिकों ने काफी उम्मीदों के साथ होटलों का नवीनीकरण कराया। पूरे सीजन से कारोबार की बेहतर उम्मीदें थी लेकिन सब पर पानी फिर गया। कारोबार को लेकर अनिश्चितता का माहौल है।
- कुलदीप शर्मा, अध्यक्ष बजट होटल एसोसिएशन, हरिद्वार
होटल कारोबार पिछले एक साल से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पहले ट्रेनें रेलवे लाइन के चौड़ीकरण करने के कारण कई महीनें बंद रही। अब कोरोना ने बुरी तरह कारोबार को चौपट कर दिया है। सरकार को इस बारे में कुछ राहत देनी चाहिए।
- डा. संदीप कपूर, होटल व्यवसाई
होटल लीज पर चलाने वाले सभी साथी आथ्रिक रूप से टूट चुके हैं। साथ में काम करने वाले हजारों कर्मचारी भी बेरोजगार हो गए। कई लोगों ने तो पत्नी के जेवर बेचकर और ब्याज पर रकम उठाकर
होटल लीज पर लिए थे लेकिन अब भविष्य को लेकर अनिश्चतता बनी हुई है। सरकार से आग्रह है कि लॉकडाउन की बंदिशों के साथ ही होटल खोलने की अनुमति दे। सात दिन की क्वारंटाइन व्यवस्था को बदलना चाहिए।
- विभाष मिश्रा, लीज होटल व्यवसाई