उत्तराखंड में कोरोना : एम्स ऋषिकेश में हाई रिस्क वाले संक्रमितों के लिए ब्लैक फंगस की जांच अनिवार्य
संक्रमितों की निगरानी और जांच के लिए एक 15 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भी गठित की गई है।
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अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) ऋषिकेश में भर्ती होने डायबिटीज और हायपरटेंशन से पीड़ित कोविड संक्रमितों की अनिवार्य रूप से ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) की जांच की जाएगी।
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संस्थान में भर्ती एक ब्लैक फंगस से संक्रमित की मौत समेत 17 केस मिलने के बाद एम्स प्रशासन ने यह निर्णय किया है। संक्रमितों की निगरानी और जांच के लिए एक 15 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भी गठित की गई है। एम्स ऋषिकेश में ब्लैक फंगस के रिकॉर्ड संक्रमित मिलने के बाद एम्स प्रशासन सचेत हो गया है। शनिवार रात को एम्स में ब्लैक फंगस के दो मरीज मिलने की खबर से योगनगरी में हड़कंप मच गया था।
लेकिन अब एक संक्रमित की मौत और 16 अन्य लोगों में ब्लैक फंगस संक्रमण की पुष्टि के बाद एम्स ही नहीं सरकार और स्वास्थ्य महकमा भी सकते हैं। हालांकि एम्स प्रशासन ने संक्रमण नियंत्रण और संक्रमितों के उपचार के लिए बड़ी तेजी के साथ प्रभावी कदम उठाए हैं। 11 संक्रमितों की सर्जरी कर दी गई। सर्जरी के बाद मरीजों को रोजाना एम्फोटेरिसिन बी का इंजेक्शन लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कोर्स तीन हफ्ते तक चलेगा।
अन्य पांच मरीजों पर विशेषज्ञ टीम नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर इन मरीजों की सर्जरी के लिए भी विशेषज्ञों की टीम ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके साथ अब बाहर से कोविड मरीजों को लेकर भी ऐहतियात बरती जा रही है।
डायबिटीज और हायपरटेंशन से पीड़ित कोविड संक्रमितों की ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) से संबधित जांच भी की जाएगी। एम्स ऋषिकेश के ईएनटी विभाग के डा. अमित त्यागी ने बताया ने अब एम्स में भर्ती होने वाले डायबिटीज और हायपरटेंशन जैसे हाई रिस्क वाले कोविड संक्रमितों में अनिवार्य रूप से म्यूकरमाइकोसिस की जांच की जाएगी।
ब्लैक फंगस के कारण
- अनियंत्रित मधुमेह
- स्टेरॉयड लेने के कारण इम्यूनोसप्रेशन
-कोरोना संक्रमण अधिक होने के कारण अधिक समय आईसीयू में रहना।
ब्लैक फंगस के लक्षण
- नाक जाम होना, नाक से काला या लाल स्राव होना
- गाल की हड्डी में दर्द होना चेहरे पर एक तरफ दर्द होना या सूजन
- दांत या जबड़े में दर्द, दांत टूटना
- धुंधला या दोहरा दिखाई देना
- सीने में दर्द और सांस में परेशानी
ब्लैक फंगस से ऐसे बचें
- खून में शुगर की ज्यादा नहीं होने दें और (हाइपरग्लाइसेमिया) से बचें
- कोरोना से ठीक हुए लोग ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखें
- स्टेरॉयड के इस्तेमाल में समय और डोज का पूरा ध्यान रखें
- एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर के परामर्श से ही करें।
स्टोरॉयड से ब्लैक फंगस सबसे अधिक खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार बुखार, खांसी और जुकाम होते ही लोग कोरोना की दवा शुरू कर रहे हैं। कोरोना रिपोर्ट के बगैर ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के बिना स्टेरॉयड का सेवन ब्लैक फंगस की वजह बन सकता है। बिना कोरोना के लक्षण के पांच से सात दिन तक स्टेरॉयड का सेवन करने से इसके दुष्प्रभाव दिखने लगते हैं। बीमारी के बढ़ने की आशंका रहती है।