मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना : अब तक मिले मात्र पांच बच्चे, जरूरतमंद अनाथ बच्चों तक नहीं पहुंच पा रही मदद
इसके लिए महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य ने 13 मई को महिला कल्याण विभाग के सचिव, निदेशक एवं जिला प्रोबेशन अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें इस तरह के बच्चों को चिन्हित कर बच्चों की देखरेख की व्यवस्था के निर्देश दिए थे।
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कोविड से माता-पिता की मौत पर बच्चों की मदद के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना शुरू की है, लेकिन जिन्हें इस तरह के बच्चों को चिन्हित करने एवं उनकी देखभाल का जिम्मा सौंपा गया है। उन अफसरों को पिछले 10 दिन में प्रदेश में मात्र पांच बच्चे मिले हैं। जिससे इस अति संवेदनशील मसले पर सिस्टम की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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प्रदेश में कोविड की पहली और दूसरी लहर की वजह से कई बच्चों के माता-पिता की मौत हो चुकी है। जरूरतमंद इन बच्चों तक मदद पहुंचाई जा सके, इसके लिए महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य ने 13 मई को महिला कल्याण विभाग के सचिव, निदेशक एवं जिला प्रोबेशन अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें इस तरह के बच्चों को चिन्हित कर बच्चों की देखरेख की व्यवस्था के निर्देश दिए थे।
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विभागीय राज्यमंत्री की ओर से यह भी निर्देश दिया गया था कि इस तरह के बच्चों का डाटा उन्हें भी उपलब्ध कराया जाए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस संबंध में जारी निर्देश के 10 दिन बाद संबंधित अधिकारियों को प्रदेश भर में अब तक इस तरह के मात्र पांच बच्चे मिले हैं।
बागेश्वर जिले में एक, अल्मोड़ा और नैनीताल जिले में दो-दो बच्चे
महिला कल्याण निदेशक योगेंद्र सिंह यादव के मुताबिक बागेश्वर जिले में एक, अल्मोड़ा और नैनीताल जिले में दो-दो बच्चे ऐसे मिले हैं जिनके माता-पिता की कोविड से मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों की जरूरी सुविधा के संबंध में विभाग की ओर से पड़ताल की जा रही है।
इसके अलावा अन्य जिलों से भी इस संबंध में जानकारी मांगी जा रही है, लेकिन अब तक विभाग को मात्र पांच बच्चों के माता-पिता की कोविड से मौत की जानकारी मिली है। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेेगी का कहना है कि वास्तव में इस तरह के बच्चों की संख्या कई अधिक होगी।
इस तरह के बच्चों को सरकार की योजना का वास्तविक लाभ मिल सके इसके लिए धरातल पर काम करना होगा। पुलिस, अस्पताल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता आदि की इसमें अहम भूमिका है। जिन्हें इन बच्चों की मदद के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है।
जरूरतमंद बच्चों को एक अभियान के रूप में घर-घर जाकर तलाशना होगा। इसके अलावा अस्पतालों में कोविड मरीजों के भर्ती होने के दौरान उनसे एक परफॉर्मेट भी भराना होगा। जिसमें उनके बच्चों के बारे में जानकारी हो।
- ऊषा नेगी, अध्यक्ष बाल आयोग