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उत्तराखंड में कोरोना : अस्पताल का रूख न करें कोविड ग्रसित सामान्य मरीज - डॉ. विजय धस्मान 

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 29 Apr 2021 02:48 PM IST

सार

हर किसी की दौड़ देहरादून आकर खत्म होती है। यहां एम्स के बाद यदि कहीं सबसे अधिक मरीजों का दबाव है तो उस हॉस्पिटल का नाम है हिमालय हॉस्पिटल जौलीग्रांट।
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कुलपति डॉ. विजय धस्माना
कुलपति डॉ. विजय धस्माना - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की अगर बात करें तो हालात किसी से छुपे नहीं हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित अस्पताल हों या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सभी रेफर सेंटर से ज्यादा कुछ नहीं हैं। ऐसे में हर किसी की दौड़ देहरादून आकर खत्म होती है। यहां एम्स के बाद यदि कहीं सबसे अधिक मरीजों का दबाव है तो उस हॉस्पिटल का नाम है हिमालय हॉस्पिटल जौलीग्रांट। कोरोना काल में इस संस्थान की भी जिम्मेदारी बढ़ गई है। जिसे सामान्य मरीजों के साथ कोविड संक्रमित मरीजों को भी  देखना है। ऐसे में क्या तैयारियां हैं अस्पताल की? इस विषय पर हमारे वरिष्ठ संवाददाता विनोद मुसान ने संस्थान के कुलपति डॉ. विजय धस्माना से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश...
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प्रश्न- कोरोना की इस दूसरी लहर में हॉस्पिटल में मरीजों का अत्याधिक दबाव बढ़ गया है। कोरोना संक्रमित रोगियों को कब हॉस्पिटल आना चाहिए?

जवाब- कोरोन डिटेक्ट होने पर प्रारम्भिक 7-8 दिनों में मरीज अपने घरों में रहकर ही चिकित्सक की देख-रेख में घर पर ही दवाईयां ले सकता है। ज्यादातर मामलों में जो लोग लापरवाही कर रहे हैं, उनको दिक्कत आ रही है। ऐसे मरीजो को जिनका ऑक्सीजन लेवल 90 या 90 से ज्यादा है, उनके लिए सरकार ने कोविड केयर सेंटर की व्यवस्था की है। बड़े अस्पतालों में ऐसे मरीज जाएं, जिनका ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे है। ऐसा करके आप गंभीर मरीजों की मदद कर सकते हैं, जिन्हें अस्पताल में बेड की जरूरत है। 

प्रश्न-क्या आपको लगता है कि महामारी जनसमुदाय में फैल चुकी है? पहले और अब के हालात में क्या अंतर है? 
जवाब- पहली लहर और दूसरी लहर में बड़ा अन्तर यह है कि यह महामारी जनसमुदाय में फैल चुकी है। लापरवाही इसकी सबसे बड़ी वजह है। बीमारी से बचाव के लिए बनाए गए नियमों का कुछ ही लोग पालन कर रहे हैं। यह सर्दी, जुखाम का मौसम भी है। इस वक्त साधारण जुखाम और कोविड में अन्तर करना संभव नहीं है। ज्यादातर मामलों में कोविड बीमारी को लोग साधारण खांसी, जुखाम की बीमारी समझ रहे है। 7-8 दिनों के बाद जब फेफड़ों में समस्या आ रही है, तब लोग सांस की दिक्कत के साथ अस्पतालों की ओर भाग रहे हैं। जिससे अस्पतालों में अब बिस्तर नहीं मिल रहे हैं और मरीजों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इस वक्त यह आवश्यक है कि संक्रमण की इस चेन को तोड़ा जाए इसलिए लोग अपने-अपने घरों पर ही रहे व अनावश्यक न घुमे व पार्टियेां में न जाए। 

प्रश्न- हिमालयन हॉस्पिटल जॉलीग्रांट से जनता को भारी उम्मीदें हैं, ऐसे हॉस्पिटल की तरफ से कोविड संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए किस तरह की व्यवस्था की गई है? 
जवाब- इस संकटकाल में हिमालयन हॉस्टिल सामाजिक जिम्मेदारी के दायित्व को बखूबी निभा रहा है। हिमालयन हॉस्पिटल में कोविड संक्रमित रोगियों के लिए हॉस्पिटल की मुख्य बिल्डिंग से अलग अन्य बिल्डिंग में कोविड हॉस्पिटल बनाया गया है। वर्तमान में हिमालयन अस्पताल में कोविड के मरीजों के लिए 235 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की गयी है, जिसमें 40 बेड आईसीयू के हैं।  



प्रश्न- हॉस्पिटल की तरफ से इस संबंध में कोई हेल्पलाइन जारी की गई है? 
जवाब- जी हां, हमने इस संबंध में कुछ चिकित्सकों की एक कोर कमेटी बनाई है। जो इस पर पूरी नजर रख रही है। मरीजों व तीमारदारों की सहुलियत के लिए हमारे जनसंपर्पक अधिकारी सहित तमाम स्टाफ कर्मी रोगियों की सेवा में लगे हुए हैं। 0135-2471512, 0135-2471202, 0135-2471110, 0135-2471409 पर रोगी हॉस्पिटल में बेड उपलब्धता की जानकारी हासिल कर सकते हैं।  

प्रश्न- हॉस्पिटल आने वाले अन्य रोगियों के लिए किस तरह व्यवस्था की गई है ?
जवाब- जिन रोगियों को कोरोना संक्रमण नहीं है, उनके लिए हिमालयन अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग में ही ओपीडी सहित आईपीडी व्यवस्था पूर्व की भांति सामान्य रुप से चल रही है। हम लोगों को गुणवत्तापक स्वास्थ्य सेवा देने को हम कृतसंकल्प हैं।  

प्रश्न- संक्रमित मरीजों की वजह से हॉस्पिटल में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है, उसके लिए किस तरह की व्यवस्था की गई है?
जवाब- बीते वर्ष ही संक्रमण की पहली लहर से बचने कि लिए हॉस्पिटल में व्यवस्था कर दी गई थी। हॉस्पिटल में इन्फेक्शन कंट्रोल यूनिट संक्रमण न फैले इस पर पूरी निगरानी रखती है। टीम की निगरानी में हॉस्पिटल के सभी कॉरिडोर, ओपीडी एरिया व वॉर्ड में दिनभर में एक निश्चित समय अंतराल पर हाई डस्टिंग क्लीनिंग व सैनीटाइजेशन किया जाता है। संक्रमण न फैसे इसके लिए हॉस्पिटल के मुख्य भवन व कोविड हॉस्पिटल की बिल्डिंग में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ सहित टेक्निशियन अलग-अलग तैनात किए गए हैं। अस्पताल में प्रवेश करने वाले हर मरीज व उसके तिमारदार को मास्क पहनना अति आवश्यक है।

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