कोरोना की दूसरी लहर: उत्तराखंड में 20 प्रतिशत से ज्यादा पहुंची कोविड संक्रमण की दर
प्रदेश में कोरोना संक्रमित मामलों की रफ्तार कम नहीं हो रही है। रोजाना पांच हजार से अधिक संक्रमित मामले प्रदेश में मिल रहे हैं।
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उत्तराखंड में कोरोना की दूसरी लहर का खतरा अभी कम नहीं हुआ है। सैंपल जांच के आधार पर प्रदेश में संक्रमण दर 20 प्रतिशत से ज्यादा है। विशेषज्ञों की मानें तो संक्रमण को लेकर सजग और चौकस रहने की जरूरत है। तभी संक्रमण से बचा जा सकता है।
प्रदेश में कोरोना संक्रमित मामलों की रफ्तार कम नहीं हो रही है। रोजाना पांच हजार से अधिक संक्रमित मामले प्रदेश में मिल रहे हैं। बीते छह दिनों में सैंपल जांच के आधार पर प्रदेश की संक्रमण दर 20 प्रतिशत से अधिक है। 1 से 11 मई तक प्रदेश में कुल 368792 सैंपलों की जांच हुई है। जिसमें 76413 संक्रमित मामले सामने आए हैं। जबकि 1390 कोरोना मरीजों की मौत हुई है।
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सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का कहना है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण का खतरा कम नहीं हुआ है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि इन बातों पर ध्यान न दें कि कोरोना की दूसरी लहर कम हो रही है या ग्राफ कम हो रहा है। प्रदेश की संक्रमण दर 20 प्रतिशत से अधिक है। जिससे लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है।
बीते छह दिनों में प्रदेश में कोरोना संक्रमण दर पर एक नजर
दिन सैंपल जांच संक्रमित दर
6 मई 35735 8517 23.9
7 मई 36850 9642 26.2
8 मई 39310 8390 21.3
9 मई 26713 5890 22.0
10 मई 26562 5541 20.9
11 मई 27928 7120 25.5
(संक्रमण दर प्रतिशत में)
दूसरी लहर में बच्चों में भी बढ़ रहा संक्रमण
कोरोना की दूसरी लहर में बच्चों में भी संक्रमण का प्रकोप बढ़ रहा है। बच्चों को अभिभावकों से सीधे या अन्य माध्यमों से कोरोना का संक्रमण होने की बात सामने आई है। हालांकि राहत की बात यह है कि ज्यादातर बच्चे घर पर ही जरूरी दवाएं दिए जाने से ठीक हो रहे हैं।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि बच्चे या तो संक्रमित अभिभावकों या सीधे दूसरे माध्यमों से कोरोना संक्रमित हो रहे हैं।
अभिभावक द्वारा बच्चों को सामान्य बुखार और अन्य लक्षणों में अस्पताल लाने में और कोरोना की आक्रमकता को देखते हुए परहेज किया जा रहा है। ऐसे में अभिभावक डॉक्टरों से ऑनलाइन सलाह लेकर घरों में ही बच्चों को जरूरी दवाई देकर ठीक कर रहे हैं।
डॉ. अशोक ने बताया कि हालांकि गंभीर लक्षण दिखने पर ही बच्चों को अस्पताल में यहां तक कि आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ रहा है। उन्होंने अपील की है कि बच्चों की तबीयत ज्यादा खराब होने पर तत्काल अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर को ही दिखाएं।