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कैबिनेट में फैसला न होने पर गुस्से में कोरोना योद्धा
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स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बावजूद कैबिनेट में कोरोनाकाल में आउटसोर्स में लगे कर्मचारी बहाली पर निर्णय न होने से आक्रोश में हैं। खफा कर्मियों ने बृहस्पतिवार को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के यमुना कालोनी स्थित सरकारी आवास के बाहर पहुंचकर विरोध भी जताया। स्वास्थ्य मंत्री ने नौकरी से हटाए गए कर्मियों को आश्वासन देकर शांत किया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सकारात्मक निर्णय हो चुका है, जल्द ही आदेश जारी कर दिया जाएगा। उसके बाद ये कर्मचारी दून अस्पताल में अपने धरनास्थल पर लौट गए। कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर में प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में भी संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ गई थी। ऐसे हालात से निपटने के लिए प्रदेश के तमाम सरकारी अस्पतालों में 2,250 से अधिक कर्मियों को पीआरडी और उपनल से आउटसोर्स पर नौकरी दी गई थी। अकेले राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कई संवर्गों में 610 कर्मचारियों को तैनात किया गया था। कोरोना के मामले कम हुए तो गत 31 मार्च को अनुबंध के तहत इन सभी की सेवाएं समाप्त कर दी गई थी।
हटाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों के संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय कोरंगा ने कहा कि जिस समय कोरोना मरीजों को घर के सदस्य और रिश्तेदार तक हाथ लगाना तो दूर सामने जाने में भी बच रहे थे, ऐसे में इन कर्मियों ने कोरोना योद्धा के रूप में अपनी और परिवार की जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की। कोरोना संक्रमण लगभग खत्म हो गया, तो सरकार ने अब नौकरी से निकालकर उन्हें चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। तब से यह कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास, सचिवालय कूच से लेकर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान इन कोरोना योद्धाओं के साथ पुलिस द्वारा मारपीट भी की गई। यहां तक एक गर्भवती महिला कर्मचारी के साथ भी महिला पुलिसकर्मियों ने धक्कामुक्की की, जिससे जच्चा-बच्चा की सेहत खतरे में पड़ गई थी।
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स्वास्थ्य मंत्री कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल और सार्वजनिक मंचों पर कोरोना योद्धाओं की सेवा बहाली का आश्वासन दे चुके हैं। जिसमें स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कैबिनेट होते ही इस पर निर्णय हो जाएगा। बृहस्पतिवार को हुई कैैबिनेट में आउटसोर्स कर्मचारियों की बहाली पर कोई निर्णय होने से आक्रोशित हैं। अब वह आंदोलन की अगली रणनीति बना रहे हैं।
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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सकारात्मक निर्णय हो चुका है, जल्द ही आदेश जारी कर दिया जाएगा। उसके बाद ये कर्मचारी दून अस्पताल में अपने धरनास्थल पर लौट गए। कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर में प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में भी संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ गई थी। ऐसे हालात से निपटने के लिए प्रदेश के तमाम सरकारी अस्पतालों में 2,250 से अधिक कर्मियों को पीआरडी और उपनल से आउटसोर्स पर नौकरी दी गई थी। अकेले राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कई संवर्गों में 610 कर्मचारियों को तैनात किया गया था। कोरोना के मामले कम हुए तो गत 31 मार्च को अनुबंध के तहत इन सभी की सेवाएं समाप्त कर दी गई थी।
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हटाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों के संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय कोरंगा ने कहा कि जिस समय कोरोना मरीजों को घर के सदस्य और रिश्तेदार तक हाथ लगाना तो दूर सामने जाने में भी बच रहे थे, ऐसे में इन कर्मियों ने कोरोना योद्धा के रूप में अपनी और परिवार की जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की। कोरोना संक्रमण लगभग खत्म हो गया, तो सरकार ने अब नौकरी से निकालकर उन्हें चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। तब से यह कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास, सचिवालय कूच से लेकर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान इन कोरोना योद्धाओं के साथ पुलिस द्वारा मारपीट भी की गई। यहां तक एक गर्भवती महिला कर्मचारी के साथ भी महिला पुलिसकर्मियों ने धक्कामुक्की की, जिससे जच्चा-बच्चा की सेहत खतरे में पड़ गई थी।
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स्वास्थ्य मंत्री कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल और सार्वजनिक मंचों पर कोरोना योद्धाओं की सेवा बहाली का आश्वासन दे चुके हैं। जिसमें स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कैबिनेट होते ही इस पर निर्णय हो जाएगा। बृहस्पतिवार को हुई कैैबिनेट में आउटसोर्स कर्मचारियों की बहाली पर कोई निर्णय होने से आक्रोशित हैं। अब वह आंदोलन की अगली रणनीति बना रहे हैं।