फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Corbett Pakhro Case questions were raised on responsible institutions including Forest Department Uttarakhand

Dehradun News: पाखरो प्रकरण में वन विभाग सहित जिम्मेदार संस्थाओं पर उठाए सवाल,  रिपोर्ट में नए खुलासे

Sun, 26 Feb 2023 10:53 AM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 26 Feb 2023 10:53 AM IST
सार

पाखरो टाइगर सफारी निर्माण मामले में यह पहली रिपोर्ट है, जिसमें पहली बार सीटीआर के ढिकाला, गैरल, खिनौली व धनगढ़ी में भी अवैध निर्माण होने की बात सार्वजनिक हुई है। करीब 35 बिंदुओं की इस रिपोर्ट में गाइडलाइन के विरुद्ध जाकर अवैध कार्यों के लिए कैम्पा व कॉर्बेट टाइगर फाउंडेशन से करोड़ों रुपये जारी करने की जानकारी कोर्ट को दी गई है।

विज्ञापन
Corbett Pakhro Case questions were raised on responsible institutions including Forest Department Uttarakhand
मीटिंग ( प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) के सदस्य महेंद्र व्यास ने टाइगर रिजर्व में अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई को रोकने में देरी के लिए कॉर्बेट प्रशासन और राज्य के वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इस मामले में अनुपूरक (सप्लिमेंटरी) रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है।

विज्ञापन


यह पहला अवसर है जब किसी जांचकर्ता ने नाम लेकर जिम्मेदार संस्थाओं को कटघरे में खड़ा ही नहीं किया, बल्कि कोर्ट से दोषियों के खिलाफ यथोचित कार्रवाई की अपील भी की है। पाखरो टाइगर सफारी निर्माण मामले में यह पहली रिपोर्ट है, जिसमें पहली बार सीटीआर के ढिकाला, गैरल, खिनौली व धनगढ़ी में भी अवैध निर्माण होने की बात सार्वजनिक हुई है।

विज्ञापन

करीब 35 बिंदुओं की इस रिपोर्ट में गाइडलाइन के विरुद्ध जाकर अवैध कार्यों के लिए कैम्पा व कॉर्बेट टाइगर फाउंडेशन से करोड़ों रुपये जारी करने की जानकारी कोर्ट को दी गई है। रिपोर्ट में कोर्ट को बताया गया है कि जब कॉर्बेट में अवैध रूप से कार्य हो रहे थे, तब इन कार्यों को रोकने के लिए जिम्मेदार उत्तराखंड वन विभाग एवं वन्य जीव प्रबंधन के लिए जिम्मेदार संस्थाओं ने अपने दायित्वों से आंखें फेरे रखी।

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रकरण में पहले भी पांच बार की जा चुकी जांच
रिपोर्ट में महेंद्र व्यास ने लालढांग- चिल्लरखाल रोड पर बाघ व अन्य वन्यजीवों के महत्वपूर्ण आवास (क्रिटिकल कोर हैबिटेट) में सड़क के डामरीकरण पर घोर आपत्ति जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र में करीब 40 बाघ विचरण करते हैं। उन्होंने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व सहित कालागढ़ व लैंसडौन वन प्रभागों के सभी अवैध निर्माणों सहित पाखरो, मोरघट्टी में टाइगर सफरी सहित विधि विरुद्ध किए गए सभी निर्माण को ध्वस्त करने और उनकी स्टेटस रिपोर्ट तलब किए जाने की मांग अदालत से की है।

रिपोर्ट में अदालत से अवैध निर्माण कार्यों की विस्तृत जांच केंद्र सरकार के वन पर्यावरण मंत्रालय अथवा किसी अन्य एजेंसी से कराने की भी मांग की गई है। अदालत को उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकरण में पहले भी पांच बार जांच की जा चुकी है।

ये भी पढ़ें...Tehri News: तिवाड़ गांव में सुबह-सुबह भ्रमण पर निकले मुख्यमंत्री धामी, पावर वीडर से लगाया खेतों में हल

पहली बार में रफा-दफा कर दी शिकायत
इस मामले में पहली बार जब शिकायत दर्ज की गई थी, तब कॉर्बेट के तत्कालिन निदेशक ने जांच एक एसडीओ स्तर के अधिकारी को सौंपी थी। बाद में इसे रफा दफा कर दिया गया। तत्कालिन प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) की ओर से एपीसीसीएफ कपिल जोशी की अध्यक्षता में बनाई कई कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था। सीईसी के सदस्य ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उसी समय इस मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाना चाहिए था। मीडिया में खबरें आने के बाद हॉफ ने कॉबिंग के आदेश दिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed