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धान लेने से मना कर रहीं सहकारी संस्थाएं

Mon, 14 Oct 2013 10:09 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 14 Oct 2013 10:09 AM IST
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cooperatives are refusing to buy rice

धान की सबसे अधिक खरीद करने वाली सहकारी संस्थाओं ने अब एक और पेच खड़ा कर दिया है।

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धान खरीद से किनारा
इन संस्थाओं ने एडवांस न मिलने पर धान खरीद से किनारा कर लेने तक का इरादा जाहिर किया है। इनका कहना है कि धान खरीद स्टेट पूल के लिए की जा रही है और भुगतान में एक साल से अधिक समय की देरी के कारण संस्थाओं को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अन्य प्रदेशों से इतर उत्तराखंड में धान की खरीद मंडी में न होकर विभिन्न खरीद केंद्रों में होती है। इनमें भी एग्रो, एफसीआई के अलावा करीब 70 प्रतिशत धान सहकारी संस्थाओं की ओर से स्टेट पूल में खरीदा जाता है।
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ऐसे में औसत करीब पांच करोड़ रुपए तक की खरीद सहकारी संस्थाएं प्रदेश में कर रही है। संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मुताबिक स्टेट पूल में खरीदे गए धान का भुगतान करीब एक साल में हो रहा है जबकि संस्थाएं किसानों को तुरंत भुगतान करती है।
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पैसा लंबे समय तक ब्लॉक
राज्य सरकार के स्तर पर धान का भुगतान देर से होने के कारण सस्थाओं का खासा पैसा लंबे समय तक ब्लॉक रहता है। वहीं यह भी साफ नहीं है कि इस बार धान को किसके सुपुर्द किया जाएगा।

शासन के स्तर पर धान खरीद का आदेश तो जारी कर दिया गया है पर यह नहीं बताया गया कि किन राइस मिलर्स को यह धान दिया जाएगा।

अभी तक की व्यवस्था में शासन स्तर पर तय कर दिया जाता था कि धान किन-किन राइस मिलर्स को दिया जाएगा। यह व्यवस्था न होने के कारण संस्थाएं यह नहीं समझ पा रही है कि धान को खरीद केंद्रों से उठाकर कहां ले जाया जाए।


80 हजार एमटी धान की जरूरत

खरीद केंद्रों पर भी धान को अधिक समय के लिए नहीं रखा जा सकता। यह तब है जबकि खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के कारण स्टेट पूल के लिए इस बार राज्य सरकार को 50 हजार एमटी की बजाय 80 हजार एमटी धान की जरूरत है।

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