फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   construction in kedarghati prohibited

खतरे में केदारधाम, एक ईंट कर देगी 'सर्वनाश'

Tue, 14 Oct 2014 04:23 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 14 Oct 2014 04:23 PM IST
विज्ञापन
construction in kedarghati prohibited

अब आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र ने भी साफ कह दिया है कि केदारनाथ धाम क्षेत्र से जितनी कम छेड़छाड़ की जाए उतना बेहतर है।

विज्ञापन


केदारनाथ में किसी तरह का भारी निर्माण केदारनाथ को और अधिक असुरक्षित बना देना है। सलाह है कि  केदारनाथ मंदिर और आसपास के परिसर में भारी निर्माण से बचा जाए।

केदारनाथ मंदिर के आसपास के क्षेत्र को लेकर सरकार पहले से ही तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय व्यवसायियों के दबाव में है। हाल ही में हुए कैबिनेट फैसले में सरकार यह भी मान लिया था कि केदारनाथ मंदिर परिसर क्षेत्र में भवन निर्माण होगा।
विज्ञापन


पर अब डीएमएमसी की रिपोर्ट साफ कह रही है कि इस क्षेत्र में किसी तरह की छेड़छाड़ खतरनाक साबित होगी। जून 2013 की आपदा ने इस क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना (जियोमॉरफोलॉजी) को पूरी तरह से बदल दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

तटबंद को मजबूत किया जाय

construction in kedarghati prohibited

केदारनाथ की यह भू आकृति नए तरीके की है और इससे छेड़छाड़ करने का मतलब है कि इस ढाल को और अधिक अस्थिर करना।

रिपोर्ट में मंदाकिनी और सरस्वती नदी को अपने पुराने रास्ते पर लाने की कोशिश से बचने की भी सलाह दी गई है। कहा गया है कि प्रकृति को अपना काम करने दिया जाए और अगर सरस्वती और मंदाकिनी की एक धारा हो गई है तो उसे अलग न किया जाए।

रिपोर्ट का महत्वपूर्ण पहलु यह भी है कि इसमें साफ तौर पर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में भारी निर्माण करने से मना किया गया है। कहा गया है कि यह बेहद हल्का निर्माण हो और जर्जर और टूट फूट गए भवनो के मलवे का उपयोग मंदाकिनी के तटबंद को मजबूत करने के लिए किया जाए।

जाहिर है कि यह रिपोर्ट भी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनेगी। सरकार पर तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय व्यवसायियों का दबाव है। इन लोगों की मांग है कि आपदा में रहने लायक बच गए भवनों को तोड़ा न जाए और केदारनाथ में पट्टाधारकों को जमीन दी जाए। ऐसे पट्टाधारक करीब सात सौ बताए जा रहे हैं। पट्टाधारकों की जमीन उन्हीं केनाम रहने देने का फैसला सरकार पहले ही कर चुकी है। अब मामला निर्माण पर अटका हुआ है।

ये हैं महत्वपूर्ण बिंदु

construction in kedarghati prohibited

 -चोराबारी झील का अब अस्तित्व नहीं रह गया है लिहाजा इससे कोई खतरा नही है। मंदिर के पूर्व दिशा में बह रही सरस्वती नदी अब सक्रिय है और इससे कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
-यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि केदारनाथ ग्लेशियर केमलबे के ढेर पर स्थित है और जून 2013 की आपदा ने इस मलबे में इजाफा कर दिया है। यहां अब नई भू आकृति बन गई है और इससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ इस भू आकृति को और अधिक असंतुलित कर सकती है।
-मंदिर टाउनशिप में किसी तरह का नया निर्माण नहीं होना चाहिए। जरूरी पूजा और इससे संबंधित काम केलोगों के लिए छोटे और बेहद हल्के निर्माण किए जा सकते हैं। इस क्षेत्र में मलबे का ढेर लगा हुआ है। इस क्षेत्र को सुधार कर पुरानी हालत में लाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
-निर्माण कार्य में किसी तरह के विस्फोटकों का प्रयोग न हो। मलबे के निस्तारण की ठोस व्यवस्था की जाए। इस मलबे का उपयोग सरस्वती नदी के तटबंद को मजबूत करने के लिए किया जाए।

क्या कर रही है सरकार
-केदारनाथ टाउनशिप को लेकर सरकार दबाव में हैं। तीर्थ पुरोहित इस क्षेत्र में पहले जैसी स्थिति के पक्षधर हैं। हालांकि सरकार यह भी कह रही है कि जीआइएस और अन्य वैज्ञानिक एजेंसियों की रिपोर्ट का ध्यान रखा जाएगा।
-मंदाकिनी और सरस्वती को पुराने रास्ते पर लाने का काम करीब दो माह पूर्व किया जा चुका है।
-25 अक्टूबर तक हर हाल में काम शुरू करने का दावा सरकार कर रही है। जिस तरह से भारी मशीन और एमआई 26 का उपयोग करने की कोशिश है उससे लगता नहीं कि केदारनाथ में भू आकृति से छेड़छाड़ नहीं होगी।
-जीएसआई पहले ही इस पर एक रिपोर्ट दे चुका है। जीएसआई से एक बार फिर सरकार ने सलाह मांगी थी। जीएसआई भीयह स्पष्ट कर चुका है कि केदारनाथ क्षेत्र में कौन सा क्षेत्र स्थिर है और कौन सा नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed