कांग्रेस के बागी विधायकों ने ठुकराई केंद्र की वाई श्रेणी सुरक्षा
उत्तराखंड में कांग्रेस से बगावत करके भाजपा का दामन थामने वाले दस विधायकों ने केंद्र द्वारा दी गई वाई श्रेणी सुरक्षा लेने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि दर्जनभर के बजाए एक-दो सुरक्षाकर्मी बहुत हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ने तो समूची सुरक्षा वापस लेने का अनुरोध करते हुए गृहमंत्री को पत्र भी लिखा है।
सत्ताधारी दल के दस विधायकों ने मुख्यमंत्री पर तमाम आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़कर सरकार के सामने सियासी संकट खड़ा कर दिया था। इसके बाद तमाम घटनाक्रम चलता रहा। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फ्लोर टेस्ट हुआ, जिसमें हरीश रावत ने पीडीएफ का सहयोग लेकर सरकार में वापसी की।
इधर केंद्र की इंटेलीजेंस एजेंसियों ने सरकार को इनपुट दिए कि इन बागी विधायकों को खतरा है। यह देख सभी को केंद्र की ओर से वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई। इसके तहत अर्धसैनिक बल के करीब चौदह कमांडो चौबीस घंटे के लिए इनकी सुरक्षा में तैनात किए गए हैं।
इतनी सुरक्षा की कोई आवश्यकता नहीं
अभी सुरक्षा मिले दो दिन ही बीते हैं कि ज्यादातर बागियों ने इन्हें वापस करने की मांग करनी शुरू कर दी। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र लिखकर कहा है कि वे जनप्रतिनिधि हैं और उन्हें इतनी सुरक्षा की कोई आवश्यकता नहीं हैं।
उन्होंने इसे वापस लेने का अनुरोध किया है। इसी तरह हरक सिंह रावत, शैला रानी रावत, अमृता रावत, शैलेंद्र मोहन सिंहल आदि ने भी अधिकतम दो गार्ड दिए जाने की बात कही है। हरक सिंह रावत ने कहा कि इस बाबत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से बात की गई है।
सिर्फ कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और उमेश शर्मा काऊ को छोड़कर बाकी सभी ने सुरक्षा में तैनात ज्यादातर गार्ड को वापस करने की बात कही है। शैला रानी रावत के मुताबिक पार्टी छोड़ने के बाद ही उनके सरकारी गनर वापस ले लिए गए।
एक दिन पहले ही दो गनर राज्य सरकार की ओर से भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की सुरक्षा पर उन्हें भरोसा नहीं है, इसलिए केंद्र की ओर से प्रदान सिक्योरिटी के दो गार्ड मौजूद रहें तो बेहतर है।