नोटबंदी की 'वर्षगांठ' पर कांग्रेस का हल्ला बोल, काला दिवस मनाकर बताई इस फैसले की पूरी सच्चाई
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पार्टी नेताओं ने कहा कि पांच सौ और एक हजार के नोट बंद करने से काले धन का खुलासा नहीं हुआ, उल्टा सरकार की लापरवाही के कारण लाखों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस भवन से गांधी पार्क, घंटाघर, पलटन बाजार, कोतवाली, डिस्पेंसरी रोड होते हुए राजीव कांप्लेक्स तक जुलूस निकाला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के अविवेकपूर्ण फैसले के कारण लाखों गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों को परेशानी झेलनी पड़ी।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि केवल कुछ बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए आनन-फानन में नोटबंदी कर दी, जिसकी कीमत कई आम लोगों को चुकानी पड़ी।
जीएसटी पर भी नाराजगी
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि नोटबंदी का एक साल पूरा होने के बावजूद देश में स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। गरीब, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी, कारोबारी और निम्न आय वर्ग के लोग आज भी नोटबंदी से हुए नुकसान की कीमत चुका रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने किया।
इस दौरान विधायक ममता राकेश, फुरकान अहमद, पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल, मंत्री प्रसाद नैथानी, नवप्रभात, मातबर सिंह कंडारी, हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक राजकुमार, देवी जोशी, दिनेश रावत, हर्षवर्धन शर्मा, अल्पसंख्यक कल्याण के पूर्व निदेशक मुस्तफा एडवोकेट, प्रदेश महासचिव फरमान मलिक, दानिश कुरैशी, मनीष नागपाल समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जीएसटी पर भी नाराजगी
कांग्रेस नेताओं ने जीएसटी में टैक्स की दरें अधिक किए जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय लाए गए जीएसटी के प्रस्ताव का भाजपा के नेताओं ने विरोध किया था। अब सरकार आने पर उसके कई प्रावधानों में बदलाव करते हुए लागू कर दिया गया। जीएसटी में जानबूझकर ऐसे प्रावधान किए गए, जिससे छोटे व्यापारियों व आम लोगों को दिक्कतें हो रही हैं।
हरीश रावत की गैरमौजूदगी पर चर्चा
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की गैरमौजूदगी कार्यक्रम के दौरान चर्चा का विषय बनी रही। हरीश रावत लगातार पार्टी के तीसरे कार्यक्रम से नदारद रहे। इसको लेकर खुद पार्टी के भीतर चर्चा होने लगी है। कुछ ने इसे उनकी नाराजगी से जोड़ा तो कई कार्यकर्ता प्रदेश पदाधिकारियों से उनकी पटरी न बैठने की चर्चा करते रहे।