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भाजपा को घेरने उतरी कांग्रेस खुद ही नहीं हो पाई संगठित, जानें गुटबाजी की यह दिलचस्प बात
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रपुर
Updated Thu, 28 Dec 2017 07:27 PM IST
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बीजेपी कांग्रेस
- फोटो : SELF
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भाजपा को घेरने में जुटी कांग्रेस खुद ही संगठित नहीं हो पा रही है। बुधवार को कांग्रेस के अलग- अलग बंटे गुटों के बीच जो हुआ वह जानना बेहद दिलचस्प होगा। पढ़िए पूरी खबर..
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सिंचाई विभाग की जमीन अवैध कब्जे से बचाने सहित अन्य मांगों को लेकर कांग्रेस आंदोलन में जुटी है। कांग्रेस पालिकाध्यक्ष महेंद्र चावला और प्रदेश महासचिव हरीश पनेरू खेमों में बंटी हुई है। इसका असर आंदोलन में भी साफ देखा जा रहा है।
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दिलचस्प बात रही कि दो दिन तक आंदोलन से दूर रहने वाला चावला गुट पूर्व सीएम हरीश रावत के आने की चर्चा की वजह से बुधवार को धरने में शामिल हो गया। दरअसल, विधानसभा चुनाव में पालिकाध्यक्ष महेंद्र चावला और हरीश पनेरू टिकट की दौड़ में शामिल थे, लेकिन ऐन वक्त पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने
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Harish Rawat and trivendra singh rawat
- फोटो : file photo
मैदान में उतरकर बाकी दावेदारों के अरमानों पर पानी फेर दिया था, लेकिन हरीश रावत को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव के बाद से ही पनेरू और चावला के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं। इस वजह से पार्टी दो खेमों में बंट गई। बीते अक्तूबर में जब पालिकाध्यक्ष का टेंडर निरस्त करने को लेकर ईओ के साथ हुआ विवाद सुर्खियां बना तो तब हरीश पनेरू नदारद थे।
इसके बाद नोटबंदी को एक साल पूरा होने को लेकर काला दिवस मनाने को लेकर दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं में जमकर तकरार हो गई थी। दो दिन पहले जब कोतवाली में हरीश पनेरू और किच्छा विधायक के बीच घटनाक्रम हुआ तो महेंद्र चावला नजर नहीं आए।
मंगलवार को भी रोडवेज बस अड्डे पर हुए धरने में अन्य जगहों से भी कार्यकर्ता पहुंचे, लेकिन चावला गुट ने दूरी बनाए रखी। बुधवार को जब पूर्व सीएम के आने की चर्चा हुई तो पालिकाध्यक्ष और समर्थक धरने पर पहुंच गए।
इसके बाद नोटबंदी को एक साल पूरा होने को लेकर काला दिवस मनाने को लेकर दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं में जमकर तकरार हो गई थी। दो दिन पहले जब कोतवाली में हरीश पनेरू और किच्छा विधायक के बीच घटनाक्रम हुआ तो महेंद्र चावला नजर नहीं आए।
मंगलवार को भी रोडवेज बस अड्डे पर हुए धरने में अन्य जगहों से भी कार्यकर्ता पहुंचे, लेकिन चावला गुट ने दूरी बनाए रखी। बुधवार को जब पूर्व सीएम के आने की चर्चा हुई तो पालिकाध्यक्ष और समर्थक धरने पर पहुंच गए।
harish rawat
- फोटो : file photo
सियासी संग्राम में भाजपा को मात देने में जुटी कांग्रेस के दोफाड़ होने से कार्यकर्ता भी संशय में है। हालात यह हैं कि दोनों ही गुट अंदरखाने एक-दूसरे को मात देने के अवसर तलाश रहे हैं। ऐसे हालात में सत्तारुढ़ भाजपा को मात देने में कांग्रेस सफल हो पाती है, यह देखने वाली बात होगी।
- किच्छा में हरीश पनेरू ने अपने नाम से धरने की उद्घोषण कराई थी। इसमें कहीं भी कांग्रेस पार्टी का जिक्र नहीं किया गया था। वह कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं। जब पनेरू को पुलिस ने हिरासत में लिया था तो उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सीओ से मिलकर छोड़ने की मांग की थी। कुछ अपने ही लोग उनके पार्टी छोड़ने की अफवाह उड़ाते रहते हैं। उन्होंने बुधवार को धरने में शिरकत की थी।
- महेंद्र चावला, पालिकाध्यक्ष, किच्छा
सफेदपोश नेताओं द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिशों के खिलाफ आंदोलन उनका व्यक्तिगत नहीं पार्टी का था। पालिकाध्यक्ष महेंद्र चावल बुधवार को धरनेपर आए थे और भाषण भी दिया था, लेकिन सोमवार और मंगलवार को वह आंदोलन पर क्यों नहीं आ सके, यह उनसे ही पूछें। भाजपा के खिलाफ चल रहे धर्मयुद्ध में सभी कार्यकर्ता एक साथ हैं।
- हरीश पनेरु, प्रदेश महासचिव, कांग्रेस
- किच्छा में हरीश पनेरू ने अपने नाम से धरने की उद्घोषण कराई थी। इसमें कहीं भी कांग्रेस पार्टी का जिक्र नहीं किया गया था। वह कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं। जब पनेरू को पुलिस ने हिरासत में लिया था तो उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सीओ से मिलकर छोड़ने की मांग की थी। कुछ अपने ही लोग उनके पार्टी छोड़ने की अफवाह उड़ाते रहते हैं। उन्होंने बुधवार को धरने में शिरकत की थी।
- महेंद्र चावला, पालिकाध्यक्ष, किच्छा
सफेदपोश नेताओं द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिशों के खिलाफ आंदोलन उनका व्यक्तिगत नहीं पार्टी का था। पालिकाध्यक्ष महेंद्र चावल बुधवार को धरनेपर आए थे और भाषण भी दिया था, लेकिन सोमवार और मंगलवार को वह आंदोलन पर क्यों नहीं आ सके, यह उनसे ही पूछें। भाजपा के खिलाफ चल रहे धर्मयुद्ध में सभी कार्यकर्ता एक साथ हैं।
- हरीश पनेरु, प्रदेश महासचिव, कांग्रेस