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CM त्रिवेंद्र की फेसबुक पोस्ट पर छलका पलायन का दर्द, तो पढ़िए युवाओं ने क्या राय दी

Thu, 14 Sep 2017 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 14 Sep 2017 02:02 AM IST
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पौड़ी गढ़वाल के युवक आशीष डबराल के शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य पर आधारित अमर उजाला में प्रकाशित खबर के फेसबुक पर पोस्ट करने पर पहाड़ के युवाओं का पलायन का दर्द छलक पड़ा।

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बड़ी संख्या में युवाओं ने मुख्यमंत्री की पोस्ट को शेयर कर कमेंट किए। युवाओं ने लिखा कि पहाड़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें सरकार की बधाई और शुभकामनाओं के साथ प्रोत्साहन और संरक्षण की आवश्यकता है।
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युवाओं ने मुख्यमंत्री से पहाड़ में मंडी स्थापित कराने, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के उपाय और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन की मांग की। कई युवाओं ने खेती करने में दिलचस्पी दिखाते हुए आर्थिक मदद की गुहार लगाई।
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दरअसल, अमर उजाला ने विगत पांच सितंबर के अंक में पौड़ी गढ़वाल के तिमली विद्यापीठ के युवक आशीष डबराल के ग्रामीणों के सहयोग से 25 नाली बंजर भूमि को आबाद कर उसमें गोभी की फसल उगाने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

शुभकामनाओं से पलायन नहीं रुकेगा

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बुधवार सुबह करीब 11 बजे मुख्यमंत्री ने अपने फेसबुक पेज पर आशीष की पहल से प्रदेश के युवाओं को प्रेरणा लेने की अपील कर उन्हें शुभकामनाएं दी थी। उनके पोस्ट करते ही पहाड़ के युवाओं ने पोस्ट को धड़ाधड़ शेयर और कमेंट करना शुरू कर दिया।

संजय चौहान ने लिखा कि मुख्यमंत्री जी, केवल पुरस्कारों, बधाई और शुभकामनाओं से पलायन नहीं रुकेगा। स्वरोजगार कर रहे युवाओं को सरकार को प्रोत्साहन और सुविधाएं देनी होगी। प्रमोद नेगी ने पलायन का दर्द साझा करते हुए लिखा कि गोभी खाने वाला भी गढ़वाल में होना चाहिए।

रविंद्र सिंह नेगी ने लिखा कि पहाड़ में बहुत आशीष हैं, बंदर, सुअरों और लंगूरों से फसलों को बचाने के उपाय करें। मनवीर रावत ने किसानों की फसलों के उचित दाम न मिलने और बिचौलियों के हाथों ठगे जाने पर चिंता जताई।

अमित जोशी ने कहा कि वो खेती करने के इच्छुक हैं, पर उनके पास पैसा नहीं है। सजेंद्र कठैत लिखते हैं कि ढोंग क्यों करते हो? प्रेरणादायक आप भी बन सकते हो। जो आपके गांव खाली हुए हैं, उनमें खेती करके। इसके अलावा कई अन्य लोगों ने भी आशीष को बधाई देते हुए सरकार से पहाड़ में सुविधाएं देने की मांग की है।

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