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आओ करें रक्तदान, बचाएं मरीजों की जान
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प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आजकल रक्त की भारी कमी है, जिसके चलते मरीजों के इलाज में डॉक्टरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों और तीमारदारों की समस्या को देखते हुए अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अपनी सामाजिक सहभागिता के तहत रक्त की मात्रा बढ़ाने के लिए फिर पहल की गई है।
दून अस्पताल के ब्लड बैंक में शनिवार (आज) को सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। रक्तदान शिविर में कई राजनीतिक व सामाजिक संगठनों से जुड़े और अन्य लोगों से अपील की कि मरीजों की जान बचाने के लिए शिविर में पहुंचकर बड़ी संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना, दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनएस खत्री और ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. शशि उप्रेती ने भी अधिक से अधिक लोगों से शिविर में पहुंचकर रक्तदान की अपील की है।
कहा कि रक्तदान को लेकर कई लोगों में तमाम भ्रांतियां हैं। इन भ्रांतियों को दरकिनार कर युवाओं को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए, ताकि मरीजों की जान बचाई जा सके। कहा कि समाज में इस तरह की भ्रांति है कि रक्तदान से कमजोरी आती है, जबकि वास्तविकता यह है कि रक्तदान करने के 24 घंटे के भीतर शरीर में उतना ही नया रक्त बन जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक व्यक्ति के एक बार रक्तदान करने से चार मरीजों की जान बचाई जा सकती है। डॉ. उप्रेती ने बताया कि 18 साल से 60 साल का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने के लिए नाश्ता कर जरूर आएं। रक्तदान के बाद रक्तदाताओं को रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था अस्पताल में होगी।
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ये होती हैं निशुल्क जांचें---
दून अस्पताल के ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. उप्रेती ने बताया कि स्वैच्छिक रक्तदान से पहले रक्तदाताओं की मलेरिया, सिफलिश, एचआईवी एड्स, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, हिमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप और ब्लड ग्रुप आदि की निशुल्क जांच की जाती है। किसी भी तरह की बीमारी निकलने पर गोपनीय रखा जाता है और विशेषज्ञों से काउंसलिंग कराई जाती है।
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दून अस्पताल के ब्लड बैंक में शनिवार (आज) को सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। रक्तदान शिविर में कई राजनीतिक व सामाजिक संगठनों से जुड़े और अन्य लोगों से अपील की कि मरीजों की जान बचाने के लिए शिविर में पहुंचकर बड़ी संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना, दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनएस खत्री और ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. शशि उप्रेती ने भी अधिक से अधिक लोगों से शिविर में पहुंचकर रक्तदान की अपील की है।
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कहा कि रक्तदान को लेकर कई लोगों में तमाम भ्रांतियां हैं। इन भ्रांतियों को दरकिनार कर युवाओं को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए, ताकि मरीजों की जान बचाई जा सके। कहा कि समाज में इस तरह की भ्रांति है कि रक्तदान से कमजोरी आती है, जबकि वास्तविकता यह है कि रक्तदान करने के 24 घंटे के भीतर शरीर में उतना ही नया रक्त बन जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक व्यक्ति के एक बार रक्तदान करने से चार मरीजों की जान बचाई जा सकती है। डॉ. उप्रेती ने बताया कि 18 साल से 60 साल का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने के लिए नाश्ता कर जरूर आएं। रक्तदान के बाद रक्तदाताओं को रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था अस्पताल में होगी।
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दून अस्पताल के ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. उप्रेती ने बताया कि स्वैच्छिक रक्तदान से पहले रक्तदाताओं की मलेरिया, सिफलिश, एचआईवी एड्स, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, हिमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप और ब्लड ग्रुप आदि की निशुल्क जांच की जाती है। किसी भी तरह की बीमारी निकलने पर गोपनीय रखा जाता है और विशेषज्ञों से काउंसलिंग कराई जाती है।