फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   combined farming in pauri village.

सामूहिक खेती से बंजर जमीन भी उगल रही है सोना

Sun, 03 Jan 2016 01:41 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 03 Jan 2016 01:41 PM IST
विज्ञापन
combined farming in pauri village.

उत्तराखंड सरकार को भले ही अब खबर लगी हो, पर पौड़ी के एक गांव ने सामूहिक रूप से कई जटिल समस्याओं का हल खोज निकाला।

विज्ञापन


पौड़ी के गौरीकोट गांव के 16 परिवारों ने मिलकर खेती की और दो साल के बाद तीसरे साल ये परिवार करीब सात लाख का मुनाफा भी हासिल करने जा रहे हैं। इस पहल से गांव की बंजर जमीन भी सोना उगल रही है।

गांव से बाहर रहने वालों को भी बैठे-बिठाए खेती से आय हो रही है और जो गांव में हैं, वे अब कहीं बाहर जाने की खास जरूरत महसूस नहीं कर रहे हैं। अब वन विलेज, वन फार्म अभिधारणा के तहत प्रदेश सरकार इस तरह की कोशिश अन्य गांवों में भी करने जा रही है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन भी कर दिया है।
विज्ञापन


गौरीकोट गांव के करीब 16 परिवारों ने मिलकर सामूहिक खेती का फैसला किया। यह फैसला करने में भी इस गांव के स्वयं सहायता समूह की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

समूह सहायता समूह की वजह से तमाम सरकारी और सहकारी विभाग सामने आए। शुरू में 12.72 लाख रुपये का कुल निवेश किया गया। गांव के लोगों को पहले साल 1.68 लाख, दूसरे साल 2.16 लाख और अब इस साल करीब 6.74 लाख रुपये का लाभ होने का अनुमान है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गांव की इस कोशिश को एनआईआरडी से जुड़े रहे बीपी मैठाणी अब सरकार के सामने लेकर आए हैं। मैठाणी के इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वीकार भी कर लिया है।

शासन के मुताबिक अब इस प्रस्ताव को अन्य गांवों में लागू करने की तैयारी की जा रही है। वन विलेज, वन फार्म नाम की इस योजना को गांवों की कई समस्याओं के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है तरीका
- पूरा गांव मिलकर गांव की पूरी जमीन पर खेती करता है। जितना मुनाफा होता है, वह जमीन के अनुपात में वितरित कर दिया जाता है। जो लोग खेती कर रहे हैं, वह सब मिलकर तय करते हैं कि कहां कौन सी उपज ली जाए।


- सामूहिक खेती का फायदा एक तो यह है कि गांव की बंजर जमीन का भी उपयोग हो रहा है। क्योंकि जमीन के मालिकाना हक से कोई छेड़छाड़ नहीं है, लिहाजा किसी की ओर से गांव में कोई आपत्ति भी दर्ज नहीं कराई गई। ऐसे में एबसेंटी लैंडलॉर्ड भी इस मामले में समस्या नहीं बन रहे हैं।

- समूह में खेती होने से उत्पाद अधिक मिल रहा है और इससे गांव वालों को उपज को खपाने में भी आसानी होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed