श्री गुलाब सिंह राजकीय महाविद्यालय चकराता में एक भारत-श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रों को कर्नाटक राज्य के खानपान से रूबरू करवाया गया। नोडल अधिकारी डॉ. अरविंद वर्मा ने बताया कि योजना के तहत राजकीय महाविद्यालय चकराता राज्य को कर्नाटक राज्य से जोड़ा गया है। मुख्य वक्ता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. के एल तलवाड़ ने बताया कि कर्नाटक के व्यंजनों में सबसे कम मसाले का उपयोग होता है, जबकि चीनी या गुड़ और मिर्च पाउडर का उपयोग अधिक होता है। कर्नाटक में शाकाहारियों की संख्या अन्य दक्षिणी राज्यों से अधिक है, इसलिए वहां पर शाकाहारी भोजन ज्यादा लोकप्रिय है। उत्तर कर्नाटक में भोजनालय को खानावली कहा जाता है जो प्राय: परिवारों द्वारा चलाये जाते हैं, ये सस्ते लेकिन स्वादिष्ट घरेलू भोजन परोसते हैं। तटीय कर्नाटक के भोजन में समुद्री भोजन, नारियल और नारियल तेल का अधिक प्रयोग होता है। चावल यहां का मुख्य अनाज है और हर भोजन में सबसे महत्वपूर्ण है। प्राचार्य ने कहा कि जब कर्नाटक के छात्र चकराता महाविद्यालय में आयेंगे तो उन्हें जौनसार-बावर की संकृति के साथ -साथ यहां के स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जायेगा। भारतीय संस्कृति की अनेकता में एकता इस कार्यक्रम से उजागर होगी। इस अवसर पर कार्यक्रम में सह संयोजक डॉ. सुनील तोमर, सदस्य डॉ. कुलदीप चौधरी, डॉ. सीमा पुंडीर, डॉ. नरेश चौहान, डॉ. देशराज सिंह आदि मौजूद रहे।