{"_id":"65ee1c27da1cd2abce0ae4ff","slug":"cold-and-cough-troubling-pregnant-women-dehradun-news-c-5-1-drn1030-368401-2024-03-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: गर्भवतियों को परेशान कर रही सर्दी और खांसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: गर्भवतियों को परेशान कर रही सर्दी और खांसी
विज्ञापन
I
IIइन्फ्लुएंजा वायरस और अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की वजह से हो रही समस्या
I
I
I
Iखांसने में जोर लगने से गर्भस्थ पर भी पड़ सकता है प्रभाव
I
I मार्च का महीना आधा बीतने वाला है, लेकिन मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। तापमान में उतार-चढ़ाव होने से गर्मी-सर्दी हो रही है। इससे लोगों को सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या बनी हुई है। ऐसे में गर्भवतियों को खासा परेशान होना पड़ रहा है। डॉक्टर के मुताबिक यह समस्या इन्फ्लुएंजा वायरस और अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की वजह से हो रही है। इसमें नाक बहना, खांसी आना, बुखार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, सिर दर्द और थकान महसूस होती है।
I
Iदून अस्पताल के स्त्री रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रीना पाल ने बताया कि इन दिनों मौसम के बदलाव से सर्दी और खांसी से गर्भवतियों को परेशान होना पड़ रहा है। सर्दी, खांसी होने पर आम व्यक्ति से अधिक गर्भवतियों को परेशानी होती है, क्योंकि खांसने में अधिक जोर लगाना पड़ता है। इससे गर्भस्थ पर भी प्रभाव पड़ सकता है। डॉ. रीना पाल ने बताया कि गर्भवती की हालत गंभीर नहीं होती है तो इलाज स्त्री रोग विभाग में हो जाता है। जब हालत गंभीर होती हो तो इलाज के लिए रेस्पिरेटरी और मेडिसिन विभाग में भेजा जाता है।
I
I
I
I
I
Iलोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन भी कर रहा परेशान
I
Iदून अस्पताल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि फ्लू होना, नाक या गले की एलर्जी होती है तो यह सभी समस्या गले के ऊपरी भाग में रहती है। इसमें अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता है। इस वजह से खांसी सूखी आने लगती है। अगर यही खांसी गले के नीचे वाले हिस्से में जाएगी तो लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफ्केशन की समस्या होगी। इसमें फेफड़ों का इंफेक्शन और सांस की समस्या के साथ मरीज को निमोनिया हो जाता है
विज्ञापन
I
I
I
I
I
Iपिछले महीने एक गर्भवती की हो चुकी है मौत
I
I
I
Iडॉ. रीना ने बताया कि पिछले महीने अस्पताल में एक गर्भवती इलाज के लिए आई थी। गर्भवती को सीवियर निमोनिया, पीलिया और लिवर इंफेक्शन भी हो गया था। गर्भवती के परिजनों ने बताया कि सर्दी और खांसी से शुरुआत हुई। निजी अस्पताल में इलाज करवाया लेकिन फायदा नहीं हुआ। हालत बिगड़ती गई। जब गर्भवती इलाज के लिए अस्पताल आई तो हालत इतनी गंभीर थी कि उसे आईसीयू में भर्ती किया गया और 20 घंटे के बाद ही गर्भवती की मौत हो गई।
I
I
I
I
I
I- इन बातों का रखें ध्यान
I
I-ऊनी कपड़ों से दूरी न बनाएं।
I
I
I
I-गुनगुने पानी का सेवन करेंं।
I
I-सर्दी, खांसी और बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
I
I
I
I-ठंडा खाना और फ्रीज की ठंडी चीज खाने से बचें।
I
I-सर्दी से बचाव के लिए सुबह के समय वॉक पर न जाएं।I
विज्ञापन
IIइन्फ्लुएंजा वायरस और अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की वजह से हो रही समस्या
I
I
I
Iखांसने में जोर लगने से गर्भस्थ पर भी पड़ सकता है प्रभाव
I
I मार्च का महीना आधा बीतने वाला है, लेकिन मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। तापमान में उतार-चढ़ाव होने से गर्मी-सर्दी हो रही है। इससे लोगों को सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या बनी हुई है। ऐसे में गर्भवतियों को खासा परेशान होना पड़ रहा है। डॉक्टर के मुताबिक यह समस्या इन्फ्लुएंजा वायरस और अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की वजह से हो रही है। इसमें नाक बहना, खांसी आना, बुखार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, सिर दर्द और थकान महसूस होती है।
I
Iदून अस्पताल के स्त्री रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रीना पाल ने बताया कि इन दिनों मौसम के बदलाव से सर्दी और खांसी से गर्भवतियों को परेशान होना पड़ रहा है। सर्दी, खांसी होने पर आम व्यक्ति से अधिक गर्भवतियों को परेशानी होती है, क्योंकि खांसने में अधिक जोर लगाना पड़ता है। इससे गर्भस्थ पर भी प्रभाव पड़ सकता है। डॉ. रीना पाल ने बताया कि गर्भवती की हालत गंभीर नहीं होती है तो इलाज स्त्री रोग विभाग में हो जाता है। जब हालत गंभीर होती हो तो इलाज के लिए रेस्पिरेटरी और मेडिसिन विभाग में भेजा जाता है।
विज्ञापन
I
I
I
I
I
Iलोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन भी कर रहा परेशान
I
Iदून अस्पताल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि फ्लू होना, नाक या गले की एलर्जी होती है तो यह सभी समस्या गले के ऊपरी भाग में रहती है। इसमें अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता है। इस वजह से खांसी सूखी आने लगती है। अगर यही खांसी गले के नीचे वाले हिस्से में जाएगी तो लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफ्केशन की समस्या होगी। इसमें फेफड़ों का इंफेक्शन और सांस की समस्या के साथ मरीज को निमोनिया हो जाता है
विज्ञापन
I
I
I
I
I
Iपिछले महीने एक गर्भवती की हो चुकी है मौत
I
I
I
Iडॉ. रीना ने बताया कि पिछले महीने अस्पताल में एक गर्भवती इलाज के लिए आई थी। गर्भवती को सीवियर निमोनिया, पीलिया और लिवर इंफेक्शन भी हो गया था। गर्भवती के परिजनों ने बताया कि सर्दी और खांसी से शुरुआत हुई। निजी अस्पताल में इलाज करवाया लेकिन फायदा नहीं हुआ। हालत बिगड़ती गई। जब गर्भवती इलाज के लिए अस्पताल आई तो हालत इतनी गंभीर थी कि उसे आईसीयू में भर्ती किया गया और 20 घंटे के बाद ही गर्भवती की मौत हो गई।
I
I
I
I
I
I- इन बातों का रखें ध्यान
I
I-ऊनी कपड़ों से दूरी न बनाएं।
I
I
I
I-गुनगुने पानी का सेवन करेंं।
I
I-सर्दी, खांसी और बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
I
I
I
I-ठंडा खाना और फ्रीज की ठंडी चीज खाने से बचें।
I
I-सर्दी से बचाव के लिए सुबह के समय वॉक पर न जाएं।I