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उत्तराखंड में नारियल की चटाई रोकेगी लैंड स्लाइड

Tue, 06 Oct 2015 04:02 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाल, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाल, देहरादून Updated Tue, 06 Oct 2015 04:02 PM IST
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Coconut matting prevent land slides.

चारधाम यात्रा मार्ग पर पहाड़ों के धसकने और भूस्खलन के खतरे से निजात मिलेगी। पहाड़ों को नारियल की चटाई, स्टील की जाली और जियो सिंथेटिक मेटेरियल से ऐसे बांधा जाएगा कि धूल भी नीचे नहीं आ पाएगी।

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भूस्खलन रोकने के लिए पहाड़ों के ट्रीटमेंट की परियोजना के पहले चरण के लिए केंद्रीय सड़क, परिवहन, राष्ट्रीय राजमार्ग ने डेढ़ सौ करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। विदेशी कंपनियों केसाथ यह परियोजना चार महीने बाद शुरू होगी।
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चारधाम यात्रा मार्ग को भूस्खलन से होने वाले हादसों से सुरक्षित करने के इस प्रोजेक्ट में सबसे पहले ऋषिकेश से बदरीनाथ के आगे माना तक मार्ग को लिया गया है। यह पहले चरण का कार्य है। इसकेबाद दूसरे रूट पर कार्य शुरू होगा।
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ऋषिकेश-माना (बदरीधाम) मार्ग पर 10 बड़े भूस्खलन जोन हैं। यहां पहले पहाड़ों का ट्रीटमेंट किया जाएगा। मंत्रालय के उत्तराखंड प्रोजेक्ट डायरेक्टर पीके मौर्या का कहना है कि नवीनतम और उच्चीकृत तकनीक से पहाड़ों केट्रीटमेंट के बाद 305 किमी लंबा यह रूट भूस्खलन और पत्थरों के गिरने के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।


चारधाम यात्रा मार्ग पर पहली बार भूस्खलन रोकने केलिए इतने बड़े प्रोजेक्ट के तहत पहाड़ों की रॉक नेलिंग होगी। इन्हें नारियल की चटाई, स्टील नेट, जियो सेंथेटिक मेटेरियल से कई परतों में बांधा जाएगा जिससे अगर पत्थर गिरेगा भी तो जाली के अंदर रहेगा। नारियल की चटाई में छेद रहेंगे। इसके ऊपर से खाद और विभिन्न वनस्पतियों केबीज डाले जाएंगे ताकि पौधों की जड़ें मिट्टी को बांध दें। इस कार्य में पहाड़ों पर भूस्खलन रोकने के ट्रीटमेंट की माहिर अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन समेत सात देशों की कंपनियों की भी मदद ली जा रही है।
- पीके मौर्या, परियोजना निदेशक

ऋषिकेश-माणा मार्ग पर भूस्खलन जोन
सेकनीधार, हेलांग, गोविंदघाट-2, गोविंदघाट-3, देव प्रयाग में धसान क्षेत्र, नंद प्रयाग, मैथाणा, बिरही, गुलाब कोठी, श्रीनगर में नदी केकटाव का क्षेत्र।

भूस्खलन जोन
चार धाम के रास्तों पर कुल 32 बड़े और अतिसंवेदनशील भूस्खलन जोन चिन्हित किए गए हैं।

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