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मानसून के पीठ फेरते ही कोबरा ने उठाया फन
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 06 Sep 2015 12:56 PM IST
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मानसून के पीठ फेरते ही कोबरा अपनी आरामगाहों से बाहर निकलने लगे हैं। ऐसी सूचना वन विभाग के पास रोज आ रही हैं।
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उत्तराखंड वन विभाग के पास सांप पकड़ने वाले केवल दो वनकर्मी हैं। ऐसे में शासन ने डीएफओ पीके पात्रो को छह वन प्रभागों को प्रशिक्षण दिलाने के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। इन वन प्रभागों में सांपों की 34 प्रजातियां हैं, जिनमें सिर्फ पांच प्रजातियां जहरीली हैं। प्रदेश के सांपों की 34 फीसदी आबादी भारतीय वन जीव संस्थान में रहती है।
डीएफओ पात्रो ने बताया कि प्रशिक्षण के संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। सांपों पर कार्य करने वाली संस्था इफैक्ट इन्हें प्रशिक्षण देगी। इफैक्ट के डा.अभिषेक सिंह ने बताया कि दून क्षेत्र में कोबरा और धामन अधिक निकलते हैं। सिर्फ जाखन और सहस्त्रधारा में करैत और रसल वाइपर मिले हैं। उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान कोबरा जगह ढूंढ कर रुक जाता है।
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जैसे ही मानसून लौटता है वह बाहर आ जाता है। बारिश के पहले वह सुरक्षित स्थान ढूंढने के लिए बाहर निकलता है। अजगर शेड्यूल-1, कोबरा, धामन, रैट स्नैक व कील बैक शेड्यूल-2 में और प्रदेश में पाए जाने वाले दूसरे सांप शेड्यूल-4 में आते हैं।
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किंग कोबरा मसूरी, चीला आदि क्षेत्रों में पाया जाता है। यह भी शेड्यूल-2 में आता है। भारतीय वन्य जीव संस्थान परिसर के 180 एकड़ दायरे में 12 प्रजातियों के सांप संरक्षित हैं। परिसर में रहने वाले सांपों में सिर्फ कोबरा और करैत ही जहरीले हैं।