सहकारी संघ का बोर्ड भंग, प्रशासकीय समिति तैनात
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प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड सहकारी संघ (यूसीएफ) के बोर्ड को भंग करते हुए पांच सदस्यीय प्रशासकीय समिति की तैनाती कर दी है। समिति को छह माह के अंदर निर्वाचित बोर्ड का गठन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस संबंध में निबंधक सहकारिता बीएम मिश्रा ने बृहस्पतिवार को आदेश जारी कर दिया है।
उत्तराखंड सहकारी संघ से जुड़ी 96 विपणन समितियों की सदस्यता अक्तूबर माह के दौरान समाप्त कर दी गई थी। समितियों को भंग किए जाने की वजह से संघ के दस निदेशकों की सदस्यता भी समाप्त हो गई थी।
इस वजह से संघ के बोर्ड में 12 की जगह दो निदेशक ही रह गए थे। इस कारण बोर्ड का कोरम पूरा नहीं हो पा रहा था, जिससे रूटीन का कामकाज प्रभावित हो रहा था।
इस स्थिति में सरकार के सामने प्रशासक या प्रशासकीय समिति तैनात करने का विकल्प था। सरकार ने प्रशासकीय समिति तैनात करने के विकल्प को चुना और इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।
फैसले को कोर्ट में चुनौती दे सकती है कांग्रेस
प्रशासकीय समिति में अपर सचिव सहकारिता तुलसी राम, यूसीएफ बोर्ड के निदेशक प्रमोद कुमार सिंह, राजेंद्र सिंह नेगी, राज्य सहकारी बैंक के निदेशक घनश्याम नौटियाल और रुड़की के प्रदीप कुमार को शामिल किया गया है।
पांच सदस्यीय समिति संघ का रूटीन कामकाज करने के अलावा आने वाले दिनों में होने वाले संघ के चुनाव को संपन्न कराएगी। सहकारी संघ के बोर्ड को भंग किए जाने के फैसले को कांग्रेस कोर्ट में चुनौती दे सकती है।
कांग्रेस ने पहले ही एलान कर रखा है कि अगर प्रदेश सरकार संघ के बोर्ड को भंग करती है तो वह इस मामले को कोर्ट में चुनौती देगी। विपणन समितियों की सदस्यता रद्द किए जाने के मामले में कई लोगों की ओर से कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।